“मजहब, मर्यादा और मिज़ाज पर हमला: इंडिया टीवी, हिंदुस्तान समाचार की विश्व शांति रहनुमा, नोबेल शांति पुरस्कार के अकेले पूरी दुनिया में हकदार रहबर अयातुल्लाह अली खामेनई के खिलाफ साजिशन झूठी रिपोर्टिंग पर भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथारिटी आफताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद नकवी का सख़्त एहतिजाज”
भारत सरकार से कड़ी कार्यवाही की किया
भारत सरकार से कड़ी कार्यवाही की किया
🖋 तहलका टुडे स्पेशल रिपोर्ट /सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा/28 जुलाई 2025
✒️ “सत्य को अफवाहों से नहीं दबाया जा सकता, और विश्व शांति रहनुमा के नेतृत्व को और नोबेल शांति पुरस्कार के पूरी दुनिया में अकेले हकदार को ट्विटर की अफवाहों से नहीं गिराया जा सकता” — डॉ. कल्बे जवाद नकवी
एक ओर जहां ईरान अंतरराष्ट्रीय मंच पर आत्मनिर्भरता, न्याय और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर भारत के कुछ मीडिया संस्थान, विशेषकर इंडिया टीवी, हिंदुस्तान ने हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई पर आधारहीन, अपमानजनक और सांप्रदायिक रंग वाली रिपोर्ट प्रसारित की है।
इन झूठे दावों में उन्हें “ड्रग्स लेने वाला”, “दिनभर सोने वाला” और “नशे में रहने वाला” बताया गया — जबकि यह सब कुछ एक अप्रमाणित सोशल मीडिया अकाउंट के हवाले से फैलाया गया।
इस शर्मनाक रिपोर्टिंग के विरुद्ध भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथारिटी आफताबे शरीयत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नकवी साहब ने गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे “धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने वाला और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को दूषित करने वाला षड्यंत्र” बताया है।
🛡️ डॉ. कल्बे जवाद नकवी का बयान: “भारत की पहचान गंगा-जमुनी तहज़ीब है, झूठी इस्लामोफोबिक पत्रकारिता नहीं”
लखनऊ से जारी बयान में डॉ. कल्बे जवाद नकवी ने कहा:
❝आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी उम्मत के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। उनका जीवन संयम, इबादत, सादगी, और जनता की सेवा का आदर्श उदाहरण है। उन पर झूठे आरोप लगाकर कुछ मीडिया संस्थान न सिर्फ धार्मिक भावना को आहत कर रहे हैं, बल्कि भारत की छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल कर रहे हैं।❞
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि:
❝भारतीय मीडिया को चाहिए कि वह स्वतंत्रता का अर्थ जिम्मेदारी से समझे। किसी एक देश के धार्मिक नेता को ‘नशेड़ी’ और ‘अयोग्य’ बताना, किसी भी सभ्य लोकतंत्र की पत्रकारिता नहीं हो सकती।❞
🕋 विश्व शांति रहनुमा अयातुल्लाह खामेनेई की असल पहचान: ईरानी मीडिया और वैश्विक दृष्टिकोण
ईरानी राष्ट्रीय चैनलों जैसे IRIB, Press TV, IRNA, Al-Alam और दर्जनों स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट्स के अनुसार:
- आयतुल्लाह खामेनेई दिनचर्या में सख्त अनुशासित, समयनिष्ठ और अध्ययनशील नेता हैं।
- वे प्रतिदिन राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान, धर्म, और न्याय से जुड़ी सैकड़ों रिपोर्टों की समीक्षा करते हैं।
- हर हफ्ते वे सैनिकों, छात्रों, बुद्धिजीवियों और मज़लूमों से संवाद करते हैं।
- वे दुनिया की उन गिनी-चुनी शख्सियतों में से हैं जो सत्ता में होते हुए भी अपने घर का पंखा तक खुद बंद करते हैं।
उनका जीवन पूरी तरह से सादा, पारदर्शी और ईश्वरमय है — जिसका प्रमाण उनके दशकों के सार्वजनिक कार्य, शिक्षा और मज़लूमों के हक़ के लिए संघर्ष है।
❗ इंडिया टीवी की रिपोर्ट: पत्रकारिता नहीं, ज़हर फैलाने की रणनीति
इंडिया टीवी ने अपने 27 जुलाई 2025 के प्रसारण में जिस कथित “मोसाद फ़ारसी X अकाउंट” का हवाला दिया, वह न तो इज़राइली सरकार द्वारा प्रमाणित है, न ही किसी आधिकारिक सुरक्षा संस्था द्वारा।
Fox News द्वारा रिपोर्ट की गई ये अफ़वाह पहले भी सोशल मीडिया पर कई बार फेक न्यूज के रूप में चिन्हित की जा चुकी है।
तथ्य यह है कि यह एक राजनीतिक और वैचारिक युद्ध का हिस्सा है, जिसे अब कुछ भारतीय चैनल भी “ट्रैफिक और टीआरपी” के लिए अपना रहे हैं।
⚖️ भारत सरकार और प्रेस परिषद से डॉ. कल्बे जवाद की मांगें:
- इंडिया टीवी हिंदुस्तान और संबंधित वेबसाइटों से इस खबर को अविलंब हटाया जाए।
- काजल कुमारी (एडिटर), रजत शर्मा (चेयरमैन) सहित जिम्मेदार हिंदुस्तान के संपादकों के खिलाफ IPC की धारा 153A, 295A, 505(2) और IT एक्ट की धाराओं में FIR दर्ज की जाए।
- धार्मिक नेताओं की छवि खराब करने वाले मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी के लिए विशेष समिति गठित की जाए।
📣 प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट की कड़ी निंदा
✍️ “सच वह सूरज है जो झूठ के बादलों से कुछ देर छिप सकता है, लेकिन बुझ नहीं सकता।”
प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट का साफ़ तौर पर यह कहता है कि किसी धार्मिक नेतृत्व को कलंकित करने का प्रयास न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग है, बल्कि यह भारत की उस विविधता और सहिष्णुता को भी चोट पहुंचाता है, जिस पर हमें गर्व है।
विश्व शांति रहनुमा रहबर आयतुल्लाह खामेनेई जैसे व्यक्तित्व की गरिमा को ट्विटर के फर्जी अकाउंट या स्टूडियो की स्क्रिप्ट से नहीं गिराया जा सकता।
- भारत की सरकार, न्याय प्रणाली और जागरूक नागरिकों को इस तरह की “झूठी और तोड़-मरोड़ कर परोसी गई पत्रकारिता” के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।