तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
दुनिया की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अमेरिका ने एक साथ 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग पर रोक लगाने का एलान कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम एशिया से लेकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक अमेरिका की नीतियों के खिलाफ गुस्सा उफान पर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का यह कदम साफ तौर पर डर, दहशत और असुरक्षा की मानसिकता को उजागर करता है। जो अमेरिका खुद को “लोकतंत्र और मानवाधिकारों का झंडाबरदार” कहता है, वही आज पूरी दुनिया के सामने नस्लवादी और दमनकारी चेहरे के साथ खड़ा है।
🌍 75 देशों पर एक साथ वार — किससे डर गया अमेरिका?
अमेरिकी United States Department of State के अनुसार, जिन देशों के इमिग्रेंट वीज़ा रोके गए हैं, उनमें शामिल हैं:
सोमालिया, रूस, अफ़ग़ानिस्तान, ब्राज़ील, ईरान, इराक़, मिस्र, नाइजीरिया, थाईलैंड, यमन समेत एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के कुल 75 मुल्क।
यह महज़ इमिग्रेशन नीति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दहशत का ऐलान है। सवाल उठता है—
👉 आखिर 75 देशों के आम नागरिकों से अमेरिका को ऐसा कौन-सा खतरा महसूस होने लगा?
🇮🇷 “एक ईरान” जिसने हिला दिया वाशिंगटन
सच यह है कि एक ईरान ने ही अमेरिका की नींद उड़ा रखी है।
जिस ईरान पर कभी हमला करने की खुली धमकियाँ दी जाती थीं, उसी ईरान ने आज अमेरिका को इस कदर असहज कर दिया है कि वह वीज़ा रोक, डिपोर्टेशन और सोशल मीडिया निगरानी जैसे कदम उठा रहा है।
ट्रंप प्रशासन की यह घबराहट बताती है कि
जो खुद को सुपरपावर समझते थे, आज उन्हें जनता से डर लगने लगा है।
🗣️ नस्लवाद की सारी हदें पार
राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही गैर-यूरोपीय मूल के लोगों के खिलाफ ज़हर उगलते रहे हैं।
उन्होंने Somalia के लोगों को “कचरा” तक कह दिया और खुलेआम कहा कि उन्हें “जहाँ से आए हैं, वहीं लौट जाना चाहिए।”
वहीं दूसरी ओर उन्होंने सिर्फ यूरोपीय देशों, खासकर स्कैंडिनेवियाई देशों के लोगों को अमेरिका बुलाने की बात कही।
यह बयान नहीं, बल्कि खुला नस्लवाद है — जिसकी आज पूरी दुनिया निंदा कर रही है।
📊 रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई: वीज़ा रद्द, लाखों डिपोर्ट
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से अब तक
- 1,00,000 से अधिक वीज़ा रद्द किए जा चुके हैं
- 6,05,000 से ज्यादा लोगों को डिपोर्ट किया गया
- जबकि 25 लाख से अधिक लोग डर के माहौल में खुद ही अमेरिका छोड़ चुके हैं
यह आँकड़े बताते हैं कि अमेरिका आज आत्मविश्वास नहीं, भय के सहारे चल रहा है।
🔍 हर शख़्स पर शक, हर आवाज़ से डर
हालांकि सरकार का दावा है कि यह रोक टूरिस्ट और बिज़नेस वीज़ा पर लागू नहीं होगी, लेकिन साथ ही यह भी ऐलान किया गया है कि
हर वीज़ा आवेदक के सोशल मीडिया अकाउंट्स की सख्त जांच होगी।
मतलब साफ है—
✋ बोलोगे तो रोके जाओगे,
✋ लिखोगे तो शक के घेरे में आओगे।
✊ जालिम की निंदा, मज़लूमों के साथ दुनिया
आज दुनिया यह साफ देख रही है कि
- जालिम कौन है,
- और डरा हुआ कौन।
चले थे ईरान पर हमला करने,
आज 75 देशों के लोगों से दहशत में अमेरिका दरवाज़े बंद कर रहा है।
यह फैसला ट्रंप की ताकत नहीं, बल्कि उनकी कमज़ोरी का सबूत है।
इतिहास गवाह है—
ज़ुल्म जितना बढ़ता है, उसके ख़ात्मे का वक्त उतना ही क़रीब आता है।
🔥 यह खबर नहीं, एक चेतावनी है —
अमेरिकी दहशत की, और मज़लूमों की बढ़ती ताकत की।




