तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
तेहरान | न्यूयॉर्क | वॉशिंगटन:
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक युद्ध, ऊर्जा संकट और आर्थिक तबाही की चेतावनी में बदलता जा रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य धमकियों के जवाब में ईरान ने दो स्तरों पर सख्त और रणनीतिक संदेश दिया है—एक ओर ईरान के वरिष्ठ रणनीतिकार सैयद मोहम्मद मरांदी, तो दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र में ईरान का स्थायी मिशन।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह न तो डरने वाला है और न ही किसी दबाव में झुकने वाला।
⚠️ “तेल-गैस की कीमतें आसमान छू जाएंगी, वैश्विक अर्थव्यवस्था ढह जाएगी”
ईरान के जाने-माने रणनीतिक विश्लेषक और तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बेहद गंभीर चेतावनी जारी की। उन्होंने लिखा—
“Oil and gas prices will go through the roof, and the global economy will collapse.
The biggest loser will be the West.
We are not intimidated at all.
We know what needs to be done.”
मरांदी के इस बयान को होर्मुज़ जलडमरूमध्य, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिमी अर्थव्यवस्था के लिए सीधा अलार्म माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ईरान-अमेरिका टकराव बढ़ा तो सबसे पहला और सबसे गहरा असर तेल, गैस, डॉलर और शेयर बाजारों पर पड़ेगा।
🛑 संयुक्त राष्ट्र से ईरान का अमेरिका को आईना
इसी बीच न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन (I.R. Iran Mission to UN) ने भी अमेरिका को उसके अतीत की भारी कीमत याद दिलाई। मिशन ने ट्वीट में कहा—
“Last time the U.S. blundered into wars in Afghanistan and Iraq, it squandered over $7 trillion and lost more than 7,000 American lives.”
यानी अमेरिका की पिछली सैन्य गलतियों ने न सिर्फ अरबों डॉलर डुबोए, बल्कि हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान भी ली।
ईरान ने आगे साफ शब्दों में कहा—
“Iran stands ready for dialogue based on mutual respect and interests —
BUT IF PUSHED, IT WILL DEFEND ITSELF AND RESPOND LIKE NEVER BEFORE!”
यह बयान केवल चेतावनी नहीं, बल्कि रणनीतिक लाल रेखा (Red Line) माना जा रहा है।

⚔️ ट्रंप की धमकी और ईरान का जवाब
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान की ओर एक विशाल सैन्य बेड़ा भेजा है, जिसकी अगुवाई एयरक्राफ्ट कैरियर कर रहा है। ट्रंप ने ईरान से “डील कर लो वरना हालात और खराब होंगे” जैसी भाषा का इस्तेमाल किया।
लेकिन ईरान ने इन धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि
- वह संवाद के लिए तैयार है
- लेकिन धमकी या दबाव में नहीं झुकेगा
- और अगर हमला हुआ, तो जवाब अभूतपूर्व होगा
🌍 पश्चिम के लिए दोहरा खतरा
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात बिगड़े तो पश्चिमी देशों को दोहरे संकट का सामना करना पड़ेगा—
- ऊर्जा संकट (तेल-गैस की रिकॉर्ड तोड़ कीमतें)
- आर्थिक तबाही (मंदी, महंगाई और बाजारों में गिरावट)
ईरान के बयान यह संकेत देते हैं कि यह टकराव सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक व्यवस्था को हिला सकता है।
ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर थोपा गया तो उसकी कीमत अमेरिका और पश्चिम को पहले से कहीं ज्यादा चुकानी पड़ेगी। अब दुनिया की नजर इस पर है कि अमेरिका टकराव का रास्ता चुनता है या कूटनीति का।




