तहलका टुडे टीम
जयपुर/लखनऊ। भारत की मेजबानी में जयपुर में आयोजित BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक में ईरान ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल की है। ईरान ने ‘BRICS एक्सपो’ के नियमित और बारी-बारी से आयोजन का प्रस्ताव रखते हुए व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।
ईरान के उद्योग, खान एवं व्यापार मंत्रालय में वाणिज्य मामलों के उपमंत्री मोहम्मद-सादिक मोफत्तेह ने बैठक को संबोधित करते हुए भारत सरकार की मेजबानी की सराहना की और कहा कि BRICS आर्थिक सहयोग मजबूत करके, आपसी विश्वास बढ़ाकर तथा सदस्य देशों की एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का इस्तेमाल करके अधिक संतुलित, समावेशी और विकासोन्मुख वैश्विक व्यापार व्यवस्था बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
मोफत्तेह ने कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान BRICS को व्यापार और निवेश के विस्तार के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में देखता है।
भारत आएं मोहम्मद-सादिक मोफत्तेह से सैयद रिज़वान मुस्तफा की अपील
ईरान की इस पहल का स्वागत करते हुए तहलका टुडे के एडिटर सैयद रिज़वान मुस्तफा ने ईरान के वाणिज्य मामलों के उपमंत्री मोहम्मद-सादिक मोफत्तेह से एक विशेष अपील की है।
उन्होंने कहा कि “अब BRICS की बैठकों से आगे बढ़कर भारत की जमीन पर आकर भारतीय कारोबारियों, उद्योगपतियों, युवाओं और प्रोफेशनल्स के साथ सीधा संवाद करने का समय है। मोहम्मद-सादिक मोफत्तेह खास तौर पर भारतीय शिया कारोबारियों एवं उद्यमियों के साथ आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर बातचीत करें।”
सैयद रिज़वान मुस्तफा का कहना है कि भारत और ईरान के रिश्ते केवल सरकारों के बीच कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सदियों पुरानी सभ्यता, संस्कृति, भाषा, शिक्षा और मानवीय रिश्तों की मजबूत विरासत मौजूद है।
ऐसे में इन रिश्तों को अब व्यापार, निवेश, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नई ऊंचाई देने की जरूरत है।

‘भारत में व्यापार करे ईरान, भारतीय शियाओं को बनाए भागीदार’
सैयद रिज़वान मुस्तफा ने ईरान से अपील की कि भारत में व्यापार और निवेश बढ़ाते समय भारतीय शिया समुदाय को केवल भावनात्मक रिश्तों के नजरिये से न देखा जाए, बल्कि उसे आर्थिक साझेदारी का सक्रिय भागीदार बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत में शिया समाज के बीच बड़ी संख्या में कारोबारी, उद्यमी, इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षाविद, चार्टर्ड अकाउंटेंट, तकनीकी विशेषज्ञ और युवा मौजूद हैं। ईरान इन क्षमताओं को अपने व्यापारिक विस्तार से जोड़ सकता है।
इससे एक ऐसा नेटवर्क विकसित हो सकता है, जिसमें—
ईरान का निवेश + भारतीय शिया उद्यमिता + भारतीय बाजार + नई तकनीक + रोजगार
एक साथ आगे बढ़ सकें।

जंग के मुश्किल दौर में भारत के समर्थन का जवाब विकास से हो
सैयद रिज़वान मुस्तफा ने कहा कि हाल के कठिन और तनावपूर्ण दौर में भारत के अनेक लोगों ने ईरान के प्रति समर्थन और मानवीय एकजुटता दिखाई।
उन्होंने कहा कि ऐसे रिश्तों का जवाब केवल धन्यवाद तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास की साझेदारी के रूप में सामने आना चाहिए।
उन्होंने कहा—
“भारत के लोगों ने मुश्किल वक्त में ईरान के साथ खड़े होकर दोस्ती और समर्थन का परिचय दिया। अब ईरान भी भारत में कारोबार और निवेश का विस्तार करते हुए भारतीय शिया समाज के युवाओं, कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को इस आर्थिक साझेदारी में भागीदार बनाए। रिश्ते केवल भावनाओं के नहीं, विकास के भी होने चाहिए।”
किन्तूर में ‘इमाम खुमैनी रिफाइनरी’ का प्रस्ताव भेजे ईरान
सैयद रिज़वान मुस्तफा ने ईरान के उद्योग, खान एवं व्यापार मंत्रालय से एक और महत्वपूर्ण पहल की मांग की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि ईरान सरकार भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को बाराबंकी के किन्तूर क्षेत्र में ‘इमाम खुमैनी रिफाइनरी’ तथा कच्चे तेल और गैस के भंडारण केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव भेजे।
ये स्थान वो है जहां का सीधा ताल्लुक़ ईरान क्रांति के नायक इमाम खुमैनी से है।
उन्होंने कहा कि भारत और उत्तर प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव की तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और औद्योगिक व्यवहार्यता का विशेषज्ञों से अध्ययन कराएं।
यदि परियोजना व्यवहार्य पाई जाती है तो ईरान की ऊर्जा एवं तकनीकी क्षमता और भारत के विशाल बाजार तथा औद्योगिक ढांचे को जोड़कर इसे एक बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट में बदला जा सकता है।
बाराबंकी का किन्तूर बन सकता है आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र
सैयद रिज़वान मुस्तफा के मुताबिक, यदि तकनीकी अध्ययन में उपयुक्त पाया जाता है तो किन्तूर में ऊर्जा भंडारण और रिफाइनरी जैसी परियोजना से पूरे अवध क्षेत्र में—
- रोजगार के नए अवसर,
- तकनीकी प्रशिक्षण,
- लॉजिस्टिक्स और परिवहन,
- छोटे एवं मध्यम उद्योग,
- पेट्रोकेमिकल गतिविधियां,
- गैस आधारित उद्योग,
- स्थानीय कारोबार
को बढ़ावा मिल सकता है।

BRICS एक्सपो को भारत-ईरान व्यापार से जोड़ने की जरूरत
सैयद रिज़वान मुस्तफा ने कहा कि मोफत्तेह द्वारा प्रस्तावित BRICS एक्सपो को भारत और ईरान के कारोबारी संबंधों के विस्तार के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि BRICS एक्सपो भारत में आयोजित हो रहा है, उसमें भारतीय शिया कारोबारियों, स्टार्टअप, MSME, निर्यातकों, तकनीकी विशेषज्ञों और निवेशकों को भी विशेष रूप से जोड़ने की व्यवस्था की जाये ।
इससे ईरानी कंपनियों को भारतीय बाजार समझने और भारतीय कंपनियों को ईरान में कारोबार के अवसर तलाशने का सीधा मंच मिल सकता है।
ईरान की ताकत और भारत का बाजार—मिलकर बना सकते हैं नया मॉडल
BRICS बैठक में मोफत्तेह ने ईरान की ऊर्जा, खनन, पेट्रोकेमिकल, कृषि, तकनीकी एवं इंजीनियरिंग सेवाओं और ट्रांजिट क्षमता को सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है।
सैयद रिज़वान मुस्तफा का कहना है कि इन क्षमताओं को भारत के विशाल बाजार और भारतीय उद्यमिता से जोड़ा जाए तो दोनों देशों के लिए विन-विन आर्थिक मॉडल तैयार हो सकता है।
उनका मानना है कि इसका लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे कारोबारी, युवा, महिलाएं, तकनीकी विशेषज्ञ, स्टार्टअप और सामाजिक संस्थाएं भी इससे जुड़ें।
शिक्षा और स्वास्थ्य में भी बने साझेदारी
सैयद रिज़वान मुस्तफा ने कहा कि भारत-ईरान आर्थिक साझेदारी का दायरा केवल तेल, गैस और उद्योग तक सीमित नहीं होना चाहिए।
ईरान और भारत मिलकर—
मेडिकल शिक्षा, अस्पताल, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीकी शिक्षा, रिसर्च, छात्रवृत्ति, कौशल विकास और हेल्थकेयर सेवाओं
में भी सहयोग बढ़ा सकते हैं।
विशेष रूप से भारतीय शिया युवाओं के लिए ईरान की यूनिवर्सिटीज, तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के साथ शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
“मोहम्मद-सादिक मोफत्तेह भारत में इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के खानवादे के साथ नई साझेदारी की शुरुआत कीजिए”
सैयद रिज़वान मुस्तफा ने ईरान के वाणिज्य मामलों के उपमंत्री मोहम्मद-सादिक मोफत्तेह से सीधे अपील करते हुए कहा—
“आपने जयपुर में BRICS के मंच से भारत की मेजबानी की सराहना की है। अब एक कदम और आगे बढ़िए। भारतीय उद्योगपतियों, कारोबारियों, युवाओं और खास तौर पर शिया समाज के उद्यमियों से मिलिए। भारत और ईरान के बीच व्यापार और निवेश की ऐसी साझेदारी का मॉडल तैयार कीजिए, जिसका लाभ दोनों देशों के आम लोगों तक पहुंचे।”
उन्होंने कहा कि BRICS का भविष्य केवल घोषणाओं में नहीं, बल्कि जमीन पर बनने वाली आर्थिक साझेदारियों में है।
उन्होंने मांग की
ईरान भारत में कारोबार बढ़ाए।
भारतीय शिया कारोबारियों और उद्यमियों को भागीदार बनाए।
भारत के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा करे।
शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाए।
भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को किन्तूर में ‘इमाम खुमैनी रिफाइनरी’ एवं कच्चे तेल-गैस भंडारण परियोजना का प्रस्ताव भेजे।
और सबसे महत्वपूर्ण—
भारत और ईरान के सदियों पुराने रिश्तों को अब नई पीढ़ी के लिए व्यापार, रोजगार, शिक्षा और विकास की साझेदारी में बदला जाए।





