तहलका टुडे टीम
नई दिल्ली, 20 मार्च 2026 :
देश की पत्रकारिता के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (UNI) के रफी मार्ग स्थित दफ्तर पर अचानक पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने धावा बोल दिया।
यह कोई सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं थी—
यह एक संगठित कब्जा, न्यूज़रूम पर हमला और सच की आवाज़ को दबाने की कोशिश थी।
सैकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी बिना किसी पूर्व सूचना के दफ्तर में घुसे, पत्रकारों को कुर्सियों से उठाकर बाहर फेंका गया और पूरे परिसर को मिनटों में सील कर दिया गया।
⚠️ बिना नोटिस, बिना आदेश — सिर्फ ताकत का प्रदर्शन
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 300 पुलिस और अर्धसैनिक बल, सरकारी अधिकारी और कुछ वकील अचानक UNI दफ्तर में दाखिल हुए।
उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर हो रही है, लेकिन—
👉 किसी भी कर्मचारी को कोई लिखित आदेश नहीं दिखाया गया।
कर्मचारियों ने जब कुछ समय मांगा, स्थिति समझने की बात कही, प्रबंधन से संपर्क करना चाहा—
तो उनकी एक भी नहीं सुनी गई।
😡 “हम पत्रकार नहीं, जैसे अपराधी हों”
UNI के कर्मचारियों के साथ जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।
HR अधिकारी सरिका साहनी ने कहा:
“इतनी बड़ी संख्या में पुलिस ऐसे घुसी जैसे हम कोई आतंकवादी संगठन हों। महिला पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी हुई। हमें वक्त तक नहीं दिया गया। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण लगती है।”
🚨 “सेकंडों में बाहर फेंक दिया गया”
UNI के सोशल मीडिया हेड साबिर हक़ ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा:
“हमें कुछ समझने का मौका नहीं मिला। पुलिस अंदर आई और हमें सेकंडों में बाहर निकाल दिया। महिला पत्रकारों को भी धक्का दिया गया, कुछ को जमीन पर गिराया गया। हमारा सामान अंदर ही रह गया, और हमें सड़क पर फेंक दिया गया।”
🚪 गेट सील, मैनेजमेंट भी बाहर
कार्रवाई के दौरान हालात इतने कठोर थे कि:
- दफ्तर के मुख्य गेट सील कर दिए गए
- बाहर मौजूद पत्रकारों को अंदर आने से रोका गया
- सीनियर मैनेजमेंट को भी प्रवेश नहीं दिया गया
- कर्मचारियों को अपने निजी सामान तक लेने नहीं दिया गया
कई कर्मचारी बिना मोबाइल, लैपटॉप और जरूरी दस्तावेजों के ही सड़क पर खड़े रह गए।
📉 मिनटों में ठप हो गई खबरों की धड़कन
UNI, जो दशकों से देशभर में समाचार सेवा दे रही थी, उसकी सेवाएं:
- हिंदी
- अंग्रेज़ी
- उर्दू
👉 तीनों भाषाओं में तुरंत बंद हो गईं।
इससे देशभर के 500 से अधिक मीडिया संस्थान और ग्राहक प्रभावित हुए।
यह घटना न केवल एक दफ्तर बंद होने की, बल्कि पूरे सूचना तंत्र के अचानक ठप पड़ने की कहानी है।
🗣️ प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट ने जताया कड़ा विरोध
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट ने गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है।
ट्रस्ट ने अपने बयान में कहा:
“UNI जैसे ऐतिहासिक संस्थान पर इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। बिना नोटिस, बिना पारदर्शिता और बलपूर्वक पत्रकारों को हटाना—यह प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”
ट्रस्ट ने मांग की:
- इस घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो
- दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
❗सिर्फ UNI नहीं, पूरी मीडिया पर हमला
UNI पर यह कार्रवाई सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं है—
यह हर उस पत्रकार, हर उस कलम और हर उस आवाज़ पर हमला है जो सच लिखती है।
अगर आज न्यूज़रूम में घुसकर पत्रकारों को चुप कराया जा सकता है,
तो कल लोकतंत्र की आवाज़ भी खामोश हो सकती है।





