तहलका टुडे | हसनैन मुस्तफा
कुछ ख़बरें दिन की सुर्ख़ियाँ बनती हैं।
कुछ सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती हैं।
और कुछ—बिना शोर किए, सीधे दिल में उतर जाती हैं।
यह रिपोर्ट उसी तीसरी क़िस्म की है।
भारत की उस सरज़मीं से, जहाँ इंतज़ार को सब्र कहा जाता है और काम को इबादत, एक ऐसी कहानी उभरकर सामने आती है जो दिखावे से दूर है, मगर असर में गहरी। यह कहानी है उस सोच की, जो हाथ पर हाथ रखकर इंतज़ार नहीं करती, बल्कि अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी निभाकर दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने में यक़ीन रखती है।
यही सोच इमाम ज़माना (अ.फ़.) के चाहने वालों की पहचान है—और इसी सोच के बीच एक नाम उभरता है: M.Q. Syed।
इंतज़ार, जो ख़ामोश रहता है मगर कमज़ोर नहीं होता
इमाम ज़माना (अ.फ़.) के चाहने वालों का इंतज़ार कोई निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं है।
यह इंतज़ार आत्म-सुधार का नाम है।
समाज को बेहतर बनाने की निरंतर कोशिश का नाम है।
यह वह यक़ीन है कि जब इंसाफ़, अमन और ज़िम्मेदारी ज़मीन पर मज़बूत होंगे, तभी इंतज़ार अपने अर्थ तक पहुँचेगा। भारत में यही सोच एक ख़ामोश लहर की तरह काम कर रही है—बिना शोर, बिना दिखावे, लेकिन गहरी जड़ों के साथ।
M.Q. Syed: जब काम दुआ का रूप ले ले
M.Q. Syed उन व्यक्तित्वों में से हैं जिनकी पहचान भाषणों से नहीं, उनके काम से बनती है।
27 वर्षों से अधिक का अनुभव—मीडिया, कन्वेंशंस एंड फेयर्स, हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट, FMCG और हेल्थकेयर जैसे विविध क्षेत्रों में—उनके सफ़र की व्यापकता को दर्शाता है।
TradeFairTimes,
Imamia Chamber of Commerce & Industry,
Council of Indian Exhibition Organisers,
TradeFairTimes Arabia—
ये नाम सिर्फ़ संस्थान नहीं,
एक सोच की तर्जुमानी हैं।
लेकिन यह यात्रा सिर्फ़ बिज़नेस ग्रोथ की कहानी नहीं है।
यह उस नज़रिए की कहानी है जो मानता है कि तरक़्क़ी तभी मुकम्मल होती है, जब वह दूसरों के लिए भी जगह बनाए।
EXHICON ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उन्होंने केवल संस्थान नहीं खड़े किए, बल्कि ऐसी संरचनाएँ विकसित कीं जो रोज़गार देती हैं, अवसर पैदा करती हैं और भरोसे की बुनियाद मज़बूत करती हैं।
वैश्विक मंच, मगर ज़मीन से जुड़ी सोच
संयुक्त राष्ट्र के UNCTAD–Empretec मंच पर भूमिका से लेकर Top 500 Brands in Asia जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मानों तक, M.Q. Syed का सफ़र भारत से निकलकर वैश्विक क्षितिज तक पहुँचता है।
फिर भी, इस वैश्विक पहचान के बावजूद उनकी सोच स्थानीय ज़रूरतों, सामाजिक ज़िम्मेदारी और इंसानी सरोकारों से गहराई से जुड़ी रहती है। यही संतुलन इस पूरी कहानी को अलग और प्रभावशाली बनाता है।
जहाँ उड़ान है, वहाँ जवाबदेही भी
जब United Helicharters Pvt. Ltd. (UHPL) के बेड़े में Airbus H125 जैसे आधुनिक विमान शामिल होते हैं, तो यह केवल तकनीकी विस्तार नहीं होता। यह उस मानसिकता की झलक है जो मानती है कि ऊँचा उड़ना तभी सार्थक है, जब ज़मीन पर भरोसा और ज़िम्मेदारी कायम रहे।
यह उड़ान दिखावे की नहीं—
यह ज़िम्मेदारी की उड़ान है।
इंतज़ार और उड़ान: विरोध नहीं, संतुलन
इंतज़ार इंसान को विनम्र बनाता है।
उड़ान उसे आगे बढ़ाती है।
जब दोनों साथ चलते हैं, तो एक ऐसा रास्ता बनता है जहाँ न घमंड होता है, न ठहराव। M.Q. Syed का सफ़र इसी संतुलन की मिसाल है—जहाँ गति तेज़ है, मगर नीयत ठहरी हुई।
इंसानियत—इस कहानी की असली पहचान
यह कहानी किसी एक व्यक्ति, किसी एक कंपनी या किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है।
यह कहानी है इंसानियत की।
जहाँ अमन कोई नारा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा का व्यवहार है।
जहाँ तरक़्क़ी का मतलब सिर्फ़ ऊँचाई नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी भी है।
कुछ ख़बरें पढ़कर हम आगे बढ़ जाते हैं।
और कुछ पढ़कर हम थोड़ी देर ठहरते हैं।
यह रिपोर्ट ठहरने वाली है।
क्योंकि यह याद दिलाती है कि अगर इंतज़ार सही नीयत से किया जाए, तो वह इंसान को ख़ुद बेहतर बना देता है।
और उसी इंतज़ार में, M.Q. Syed की उड़ान—ख़ामोशी से, मगर पूरे यक़ीन के साथ—बुलंदी की ओर बढ़ती चली जाती है।
भारत की सुकून की ओर,
और बुलंदी की ओर।





