नजफ़-ए-हिंद, जोगीपुरा-जहाँ मौला अली (अ.स.) की याद ने एक गाँव को अमर कर दिया, एक वक्फ़नामे, एक करामत और एक खानदान की चार सौ साल की दास्तान “जायदादें वारिसों में बँट जाती हैं, लेकिन अमानतें सदियों तक इंसानियत की हो जाती हैं…”
नजफ़-ए-हिंद, जोगीपुरा जहाँ मौला अली (अ.स.) की याद ने एक गाँव को…

