“खुमार के रंग में डूबा बाराबंकी: गुलों से महका मज़ार, आसमान से बरसी रहमत की बूंदें,भीगती रही फ़िज़ा, खुमार बाराबंकवी साहब की जयंती पर सजी यादगार नूरानी महफ़िल”
हसनैन मुस्तफा बाराबंकी।धीरे-धीरे बरसते आसमान और भीगी हुई फ़िज़ाओं के बीच सिविल…


हसनैन मुस्तफा बाराबंकी।धीरे-धीरे बरसते आसमान और भीगी हुई फ़िज़ाओं के बीच सिविल…
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