तहलका टुडे ब्यूरो/हसनैन मुस्तफ़ा
लखनऊ, 2 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए एक बेहद राहत भरी और भविष्य को संवारने वाली बड़ी खबर सामने आई है। अब वे विद्यार्थी, जो किसी भी कारणवश छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के लाभ से वंचित रह गए थे, उन्हें एक बार फिर आवेदन करने का मौका मिलने जा रहा है।
समाज कल्याण विभाग जल्द ही शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत संचालित छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत छूटे हुए छात्रों के लिए पोर्टल दोबारा खोलेगा। इस फैसले से हजारों नहीं बल्कि लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस फैसले का अम्बर फाउंडेशन के चेयरमैन वफा अब्बास ने स्वागत करते हुए इसे गरीब, जरूरतमंद और वंचित छात्रों के भविष्य को संवारने वाला निर्णय बताया है।
यह कदम उन विद्यार्थियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जिनकी पढ़ाई सिर्फ इसलिए प्रभावित हो गई थी क्योंकि आवेदन में कोई तकनीकी त्रुटि रह गई, दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं हो सके, बैंक खाते की समस्या आई, सत्यापन प्रक्रिया में देरी हुई या किसी अन्य प्रशासनिक कारण से वे योजना के लाभ से वंचित रह गए।
अब किसी योग्य छात्र की पढ़ाई नहीं रुकेगी
राज्य सरकार का यह निर्णय साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि अब किसी भी पात्र छात्र को केवल प्रक्रिया संबंधी कमी या तकनीकी कारणों की वजह से छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
शिक्षा आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति जैसी योजनाएं उन परिवारों के लिए जीवनरेखा साबित होती हैं, जिनके लिए उच्च शिक्षा का खर्च वहन करना आसान नहीं होता।
समाज कल्याण विभाग का यह फैसला हजारों परिवारों के लिए किसी राहत पैकेज से कम नहीं है, क्योंकि इससे वे छात्र फिर से मुख्यधारा में लौट सकेंगे जिनकी पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण रुकने की कगार पर थी।
सामान्य, एससी, एसटी वर्ग के छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
इस बार पोर्टल दोबारा खोले जाने से सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्र-छात्राओं को सीधा लाभ मिलेगा।
विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ वास्तव में हर उस छात्र तक पहुंचे, जो इसके लिए पात्र है और जिसकी पढ़ाई आर्थिक सहयोग के अभाव में प्रभावित हो सकती है।
यह फैसला खासतौर पर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों के लिए भी बड़ी राहत है, जहां अब भी बड़ी संख्या में छात्र सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं।
पिछले वर्ष 53,041 छात्रों को मिली थी राहत, 81.12 करोड़ रुपये हुए वितरित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं के अंतर्गत विभाग द्वारा पोर्टल खोले जाने के बाद कुल 53,041 छात्रों को लाभ दिया गया था।
इन छात्रों को कुल मिलाकर 81.12 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि वितरित की गई थी, जो इस योजना की उपयोगिता और प्रभाव को दर्शाती है।
वर्गवार लाभ का ब्यौरा
- अनुसूचित जाति (SC) के 25,395 छात्रों को 30.65 करोड़ रुपये
- सामान्य वर्ग के 27,646 छात्रों को 50.47 करोड़ रुपये
यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार की छात्रवृत्ति योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर हजारों विद्यार्थियों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है।
ट्रांसजेंडर छात्रों को शामिल करना सामाजिक समावेशन की बड़ी पहल
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण और सराहनीय बात यह है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के छात्रों को भी इसका लाभ देने की व्यवस्था की गई है।
समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक अत्यंत सकारात्मक और प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।
आज जब देश और प्रदेश में समावेशी विकास की बात की जा रही है, तब शिक्षा के क्षेत्र में ट्रांसजेंडर समुदाय को अवसर देना सरकार की संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मंत्री असीम अरुण बोले— ‘हर वर्ग तक शिक्षा का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता’
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार शिक्षा को मजबूत बनाने और हर वर्ग तक उसका लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जो छात्र किसी कारणवश इस योजना से छूट गए हैं, उन्हें भी दोबारा पूरा अवसर दिया जाए। ताकि वे अपनी शिक्षा जारी रख सकें और अपने भविष्य को मजबूत बना सकें।
असीम अरुण का यह बयान साफ संकेत देता है कि सरकार शिक्षा को केवल एक योजना के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए उम्मीद की नई किरण
यह फैसला केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आया है।
अक्सर गरीब, निम्न मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के छात्र अपनी पढ़ाई पूरी तरह सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं के भरोसे जारी रखते हैं। ऐसे में अगर किसी तकनीकी या दस्तावेजी वजह से छात्रवृत्ति रुक जाती है, तो इसका सीधा असर उनकी फीस, पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा पोर्टल को दोबारा खोलने की तैयारी इस बात का प्रमाण है कि सरकार अब उन विद्यार्थियों तक भी पहुंचना चाहती है, जो पहले किसी न किसी वजह से सिस्टम से बाहर रह गए थे।
जल्द जारी होगी आधिकारिक सूचना, छात्रों को रखना होगा दस्तावेज तैयार
समाज कल्याण विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक सूचना जारी करेगा, जिसके बाद पात्र छात्र-छात्राएं दोबारा आवेदन कर सकेंगे।
ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को अभी से अपने आवश्यक दस्तावेज जैसे—
- आधार कार्ड
- आय प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र (जहां लागू हो)
- बैंक खाता विवरण
- प्रवेश/संस्थान संबंधी प्रमाण पत्र
- पिछली शैक्षिक योग्यता के दस्तावेज
- पासपोर्ट साइज फोटो
आदि तैयार रखने चाहिए, ताकि पोर्टल खुलते ही आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
शिक्षा को सहारा, युवाओं को संबल, भविष्य को नई उड़ान
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों-लाखों छात्रों के सपनों को फिर से गति देने की पहल है।
जो विद्यार्थी आर्थिक तंगी, प्रक्रिया संबंधी भूल या तकनीकी त्रुटियों के कारण पीछे छूट गए थे, अब उनके पास आगे बढ़ने का नया अवसर होगा।
स्पष्ट है कि यह निर्णय न केवल शिक्षा को मजबूती देगा, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास और भविष्य दोनों को नई दिशा देगा।
छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित छात्रों के लिए पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला उत्तर प्रदेश के शिक्षा परिदृश्य में एक बेहद महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य कदम है।
यह निर्णय बताता है कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उनका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।
अब सभी की नजरें समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। जैसे ही पोर्टल खुलेगा, हजारों छात्र-छात्राओं के लिए यह एक नई उम्मीद, नई राहत और नए भविष्य का दरवाजा बन जाएगा।
वफा अब्बास ने कहा— यह फैसला हजारों छात्रों के सपनों को नई उड़ान देगा
अम्बर फाउंडेशन के चेयरमैन वफा अब्बास ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति जैसी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अक्सर कई होनहार छात्र केवल तकनीकी त्रुटियों, दस्तावेजों की कमी, सत्यापन में देरी या अन्य प्रशासनिक कारणों की वजह से छात्रवृत्ति से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं।
वफा अब्बास ने कहा कि सरकार द्वारा पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्णय उन हजारों छात्रों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जो आर्थिक तंगी के बावजूद पढ़-लिखकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और कोई भी योग्य छात्र केवल प्रक्रिया की वजह से इससे वंचित नहीं रहना चाहिए। सरकार का यह कदम निश्चित रूप से हजारों परिवारों के लिए राहत और बच्चों के भविष्य के लिए नई रोशनी साबित होगा।”




