✦ इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) के इंतज़ार की तैयारी करने वाला ईरान
✦ उसी ईरान से क्यों घबराए हैं अमेरिका और इज़राइल?
तहलका टुडे टीम/सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
कुछ मुल्क हथियारों से डर पैदा करते हैं,
कुछ साज़िशों से…
लेकिन ईरान वह मुल्क है जो “यक़ीन, सब्र और इंतज़ार” से ताक़त बनाता है।
और यही बात अमेरिका व इज़राइल को सबसे ज़्यादा डराती है।
ईरान सिर्फ़ एक देश नहीं,
एक विचार है — इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) के इंतज़ार की तैयारी का विचार।
इमाम-ए-ज़माना का इंतज़ार: खामोशी नहीं, तैयारी है
Imam Mahdi का इंतज़ार शिया सोच में हाथ पर हाथ रखकर बैठना नहीं है,
बल्कि:
- जुल्म के खिलाफ़ खड़ा होना
- हराम से पाक समाज बनाना
- मज़लूम का साथ देना
- ज़ालिम से टकराना
ईरान ने इस इंतज़ार को निज़ाम, समाज और राजनीति में ढाल दिया है।
यही इंतज़ार उसे कमजोर नहीं, बेहद मज़बूत बनाता है।
आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई: इंतज़ार की ज़मीन पर रहनुमा
Ayatollah Ali Khamenei
वह रहनुमा हैं जो कहते हैं:
“हम ज़ालिम के साथ अमन नहीं कर सकते,
क्योंकि ज़ुल्म के साथ अमन, ख़ुद ज़ुल्म है।”
उनकी क़यादत में ईरान ने सीखा कि:
- डर से आज़ादी नहीं मिलती
- समझौते से इज़्ज़त नहीं बचती
- और जुल्म को स्वीकार करना, गुनाह है
यही वह तालीम है जो इमाम-ए-ज़माना के सिपाहियों की तैयारी करती है।
अमेरिका और इज़राइल को डर क्यों लगता है?
United States और Israel
उनकी पूरी ताक़त टिकी है:
- डर पर
- हथियारों पर
- मीडिया के झूठ पर
- नैतिक पतन पर
लेकिन ईरान:
- मौत से नहीं डरता
- शहादत को हार नहीं मानता
- हरामकारी को तरक़्क़ी नहीं कहता
- और ज़ुल्म के आगे झुकता नहीं
👉 जो क़ौम इमाम-ए-ज़माना के इंतज़ार में खुद को पाक करती है,
वह किसी सुपरपावर से नहीं डरती।
और जो डरता नहीं —
उसी से ज़ालिम सबसे ज़्यादा डरता है।
इज़राइल की घबराहट: क़ुद्स की सच्चाई
ईरान ने फ़िलिस्तीन को सिर्फ़ एक सियासी मुद्दा नहीं माना,
बल्कि इमाम-ए-ज़माना के इंसाफ़ से जोड़ा।
क़ुद्स का ज़िक्र,
ज़ालिम की नींद हराम कर देता है।
इज़राइल जानता है:
- हथियार सब कुछ नहीं
- जब यक़ीन जाग जाए, तो दीवारें गिर जाती हैं
- और जब इंतज़ार तहरीक बन जाए, तो साम्राज्य ढह जाते हैं
हरामकारी से पाक समाज: पश्चिम की सबसे बड़ी हार
पश्चिमी समाज:
- बेहयाई को आज़ादी कहता है
- रिश्तों की तबाही को प्रगति
- और हराम को व्यक्तिगत पसंद
जबकि ईरान:
- हया को इबादत
- परिवार को ताक़त
- और पाकीज़गी को सियासत मानता है
👉 यही नैतिक ताक़त,
अमेरिका और इज़राइल के लिए
सबसे बड़ा ख़तरा है।
ईरान की सड़कें नहीं कांपतीं, दुश्मनों की कुर्सियाँ कांपती हैं
जब मीडिया कहता है “ईरान में प्रदर्शन”,
तो सच्चाई यह है:
- यह प्रदर्शन नहीं, जागृत समाज है
- सवाल करना बग़ावत नहीं
- और बहस कमजोरी नहीं
ईरान आज भी:
- इमाम-ए-ज़माना के नाम पर जीता है
- शहादत की संस्कृति से डर को हराता है
- और रहबर पर भरोसा करता है
🌙 आख़िरी बात… जो दिल में उतर जाए
ईरान से अमेरिका और इज़राइल इसलिए नहीं घबराते कि वहाँ फ़ौज है या मिसाइलें,
वे इसलिए काँपते हैं क्योंकि वहाँ ज़मीर ज़िंदा है।
वहाँ एक क़ौम पल रही है जो अपने बच्चों को डर नहीं,
इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) का इंतज़ार सिखाती है।
यह इंतज़ार आँसुओं में नहीं,
उसूलों में लिखा जाता है —
हराम से नफ़रत,
जुल्म से बग़ावत,
और मज़लूम से मोहब्बत के उसूलों में।
आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई की क़यादत में
ईरान ने दुनिया को यह पैग़ाम दिया है कि
जो क़ौम अपने इमाम के इंसाफ़ पर यक़ीन रखती हो,
उसे न धमकियाँ तोड़ सकती हैं,
न साज़िशें डरा सकती हैं।
क्योंकि जो इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) के इंतज़ार में खुद को पाक करता है,
वह किसी ज़ालिम के सामने सिर नहीं झुकाता।
और सच यही है —
👉 ज़ुल्म को सबसे ज़्यादा डर,
ऐसे ही इंतज़ार से लगता है…




