अमरीकी साज़िशों के ख़िलाफ़ ईरान की संयुक्त राष्ट्र में ज़ोरदार शिकायत, अंतरराष्ट्रीय क़ानून की खुलेआम धज्जियाँ, संप्रभुता पर हमला और अवाम को भड़काने की कोशिश

“Iran accuses the United States of regime-change agenda, sanctions warfare, and inciting unrest — UN put on notice.”

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तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क

न्यूयॉर्क/तेहरान।
इस्लामी गणराज्य ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में एक बेहद अहम और गंभीर शिकायत दर्ज कराते हुए अमरीका पर हिंसा भड़काने, शासन परिवर्तन की साज़िश रचने और सैन्य हस्तक्षेप की धमकी देने का खुला आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन की ओर से 13 जनवरी 2026 को भेजे गए आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि अमरीकी राष्ट्रपति के हालिया बयान अंतरराष्ट्रीय क़ानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन हैं।

ईरान ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि अमरीकी राष्ट्रपति ने ईरान के भीतर प्रदर्शन कर रहे लोगों को संबोधित करते हुए खुले शब्दों में कहा कि “संस्थानों पर क़ब्ज़ा करो, प्रदर्शन जारी रखो—मदद रास्ते में है”। ईरान के मुताबिक यह बयान केवल बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता फैलाने, हिंसा को उकसाने और सैन्य आक्रमण का बहाना गढ़ने की सोची-समझी साज़िश है।

अंतरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) (बल प्रयोग या धमकी पर प्रतिबंध) और अनुच्छेद 2(7) (आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का सिद्धांत) का हवाला देते हुए कहा कि अमरीका लगातार इन मूल सिद्धांतों को रौंद रहा है। पत्र में यह भी याद दिलाया गया कि बीते हफ्तों में अमरीका कई बार ईरान के ख़िलाफ़ बल प्रयोग की धमकी दे चुका है, जिनकी शिकायतें पहले ही 30 दिसंबर 2025, 2 जनवरी 2026 और 9 जनवरी 2026 को दर्ज कराई जा चुकी हैं।

“अधिकतम दबाव” नीति और विफल साज़िशें

ईरान ने अपने पत्र में साफ़ कहा कि यह सब “मैक्सिमम प्रेशर” यानी अधिकतम दबाव की उसी पुरानी नीति का हिस्सा है, जिसमें

  • अवैध एकतरफ़ा पाबंदियाँ,
  • आर्थिक व सामाजिक अस्थिरता,
  • अवाम को भड़काकर प्रदर्शन,
  • और अंततः अराजकता फैलाकर सैन्य हस्तक्षेप का बहाना
    तैयार किया जाता है।
    ईरान ने याद दिलाया कि जून 2025 में हुए 12 दिनों के आक्रमण में भी यही रणनीति अपनाई गई थी, जो पूरी तरह नाकाम रही।

अमरीका–इज़राइल पर मासूम जानों की ज़िम्मेदारी

पत्र में बेहद कड़े शब्दों में कहा गया है कि अमरीका और इज़राइली शासन ईरान में अस्थिरता फैलाने के प्रयासों के कारण होने वाली मासूम नागरिकों की मौतों, खासकर युवाओं की जान जाने, की सीधी और निर्विवाद कानूनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकते।

संयुक्त राष्ट्र से ईरान की अपील

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद से मांग की है कि:

  1. अमरीका द्वारा हिंसा भड़काने, सैन्य धमकियों और ईरान के आंतरिक मामलों में दख़ल की खुले शब्दों में निंदा की जाए।
  2. सभी सदस्य देश ऐसे भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयानों से बचें, जो ईरान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हों।
  3. इस पत्र को सुरक्षा परिषद के आधिकारिक दस्तावेज़ के रूप में प्रसारित किया जाए।

“शैतानी हरकतों” पर दुनिया की नज़र

ईरान का कहना है कि यह वही पुरानी अमरीकी–इज़राइली कहानी है—पहले पाबंदियाँ, फिर दूसरे मुल्कों से युद्ध, फिर अवाम को भड़काकर सड़कों पर उतारना, और अब खुलेआम शासन बदलने की पुकार
यह सब ऐसे देश के ख़िलाफ़ किया जा रहा है, जहां सामाजिक मूल्यों, नैतिकता और धार्मिक सिद्धांतों को क़ानून का दर्जा हासिल है—जहां शराब, जुआ, सूदखोरी और अय्याशी को बढ़ावा नहीं दिया जाता।

ईरानी अवाम का साफ़ संदेश

ईरान ने दो टूक कहा है कि अमरीकी कल्पनाएँ और नीतियाँ शासन परिवर्तन के भ्रम पर टिकी हैं, लेकिन यह नुस्ख़ा पहले भी फेल हुआ है और एक बार फिर नाकाम होगा
ईरानी अवाम अपने वतन की हिफ़ाज़त करना जानती है—और करेगी।

यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि ज़ुल्म के ख़िलाफ़ इंसाफ़ की पुकार है।
अब सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और दुनिया क़ानून के साथ खड़ी होगी, या ताक़तवरों की शैतानी चालों पर फिर खामोश रहेगी?

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