जार्ज बुश पर फेंका गया जूता ट्रंप क्यों भूल जाते हैं? जब इराक़ ने अमेरिकी घमंड को अदालत में नहीं, जूते से जवाब दिया

The Shoe That Still Haunts America: From George W. Bush to Donald Trump’s Threats Against Iraq

THlkaEDITR
3 Min Read

तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क/

डोनाल्ड ट्रंप आज इराक़ को धमकाते हैं,
उसके चुनावों को “इजाज़त” और “मनाही” के दायरे में बाँधते हैं,

इराक़ी चुनाव में ट्रंप का दख़ल!
अमेरिकी राजनीति की खुली धमकी
डोनाल्ड ट्रंप का बयान:
“इराक़ एक बहुत बड़ा ग़लत फ़ैसला करने जा रहा है।
अगर नूरी अल-मालिकी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाया गया,
तो अमेरिका इराक़ की कोई मदद नहीं करेगा।
अमेरिका के बिना इराक़ के पास
न सफलता की कोई संभावना है,
न समृद्धि की और न ही आज़ादी की।”

लेकिन शायद वे इतिहास की उस तस्वीर को भूल चुके हैं
जिसमें इराक़ की ज़मीन से उठा एक जूता
अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू. बुश की तरफ़ उड़ता है।

यह जूता सिर्फ़ जूता नहीं था।
यह इराक़ की टूटी इमारतों,
मारे गए बच्चों,
उजड़े घरों
और रौंदी गई संप्रभुता की चीख़ थी।

मुन्तज़िर अल-जैदी: एक पत्रकार, एक जूता, और पूरी साम्राज्यवादी सोच पर प्रहार

दिसंबर 2008, बग़दाद।
इराक़ी पत्रकार मुन्तज़िर अल-जैदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान
अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश पर जूता फेंकते हुए कहा था—

“यह इराक़ की तरफ़ से विदाई का चुम्मा है, कुत्ते!”

यह कोई अचानक ग़ुस्सा नहीं था,
यह अमेरिका की युद्ध नीति का मुक़दमा था—
जिसकी सुनवाई अदालत में नहीं,
इतिहास ने की।

आज वही अहंकार, बस चेहरा बदला है

आज ट्रंप वही भाषा बोल रहे हैं—
बस जूते की जगह आर्थिक धमकी,
और युद्ध की जगह चुनावी हस्तक्षेप है।

ट्रंप कहते हैं—
अगर इराक़ ने अपनी मर्ज़ी से नेतृत्व चुना,
तो अमेरिका मदद बंद कर देगा।

मतलब साफ़ है—
या हमारे इशारे पर चलो,
या सज़ा भुगतो।

ट्रंप को याद रखना चाहिए

जिस इराक़ को वे “ज़ीरो चांस वाला देश” कह रहे हैं,
उसी इराक़ ने
अमेरिकी राष्ट्रपति को
दुनिया के सामने बेनक़ाब किया था।

वह जूता आज भी याद दिलाता है कि—
सत्ता कितनी भी बड़ी क्यों न हो,
जब ज़ुल्म हद से बढ़ता है,
तो एक आम इंसान भी इतिहास का पन्ना पलट सकता है।

यह सिर्फ़ इराक़ की बात नहीं

आज ट्रंप इराक़ को धमका रहे हैं,
कल किसी और देश की बारी होगी।

सवाल यही है—
क्या दुनिया अब भी अमेरिकी अहंकार को
सर झुकाकर स्वीकार करेगी?

या फिर इतिहास
एक बार फिर
कोई नया मुन्तज़िर अल-जैदी पैदा करेगा?

बमों से नहीं, जूतों से डरता है साम्राज्यवाद।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *