तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
काहिरा/यरुशलम:
मध्य पूर्व में पहले से सुलग रही आग के बीच अब इज़राइली संसद कनेस्सेट ने ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के ज़मीर को झकझोर दिया है। फ़िलिस्तीनी क़ैदियों को फांसी देने वाले कानून को मंजूरी दिए जाने पर मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, जिनेवा कन्वेंशन और इंसाफ़ के बुनियादी उसूलों का खुला कत्ल बताया है।
मिस्र ने साफ कहा है कि यह कानून सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि कब्ज़े, नस्ली भेदभाव और राज्य-प्रायोजित दमन को वैधता देने की खतरनाक कोशिश है।
“यह कानून नहीं, इंसाफ़ की हत्या है”
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि फ़िलिस्तीनी क़ैदियों को फांसी देने का यह फैसला बेहद खतरनाक और अभूतपूर्व उकसावे का कदम है। यह सिर्फ किसी एक कैदी या एक केस का मसला नहीं, बल्कि पूरे फ़िलिस्तीनी समाज के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
सवाल यह है कि
क्या अब अदालतें इंसाफ़ देंगी, या कब्ज़े की राजनीति का औज़ार बनेंगी?
भेदभाव की हद: कानून सबके लिए नहीं, सिर्फ फ़िलिस्तीनियों के लिए?
मिस्र ने अपने बयान में सबसे अहम बात यह कही कि इस कानून का इस्तेमाल फ़िलिस्तीनियों और अन्य लोगों के बीच भेदभावपूर्ण तरीके से किया जाएगा।
यानी एक ही जमीन पर रहने वालों के लिए अलग न्याय, अलग सज़ा, अलग इंसानियत!
यह सिर्फ अन्याय नहीं, बल्कि नस्ली अलगाव की कानूनी मुहर है।
जिनेवा कन्वेंशन की धज्जियाँ
मिस्र ने दो टूक कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा कन्वेंशनों की खुली अवहेलना है।
इसके साथ ही यह फेयर ट्रायल यानी निष्पक्ष सुनवाई के मूल अधिकार को भी कुचलता है।
जब कोई सत्ता यह तय करने लगे कि
किसे जीने का हक़ है और किसे नहीं,
तो समझ लीजिए कि वहाँ लोकतंत्र नहीं, दमन का राज है।
वेस्ट बैंक और गाज़ा में पहले ही हालात नाज़ुक
मिस्र ने यह भी चेतावनी दी कि वेस्ट बैंक और गाज़ा पट्टी में पहले से ही हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। ऐसे समय में इस तरह का कानून लाना, आग में पेट्रोल डालने जैसा है।
यह फैसला सिर्फ जेलों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर
- क्षेत्रीय शांति पर,
- आम फ़िलिस्तीनियों की सुरक्षा पर,
- और पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ेगा।
मिस्र ने दुनिया को ललकारा: अब बोलो!
मिस्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि वह अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियाँ निभाए और इन खुले उल्लंघनों को रोकने के लिए तुरंत और सख़्त कदम उठाए।
यानी बात अब सिर्फ बयानबाज़ी से आगे निकल चुकी है।
अब सवाल यह है कि:
क्या दुनिया फिर वही करेगी—बयान देगी, चिंता जताएगी, और फिर चुप बैठ जाएगी?
इज़राइल की एकतरफा नीतियों पर मिस्र का साफ इनकार
मिस्र ने दोहराया कि वह इज़राइल की सभी एकतरफा नीतियों और कदमों को पूरी तरह खारिज करता है।
यह बयान सिर्फ एक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि अगर दुनिया ने अब भी आंखें मूंद लीं, तो आने वाले दिन और भी खतरनाक हो सकते हैं।
तहलका टुडे का सवाल
क्या फ़िलिस्तीनियों के लिए इंसाफ़ की किताब अलग लिखी जा रही है?
क्या “कानून” के नाम पर “क़त्ल” को वैध बनाया जा रहा है?
और क्या दुनिया की चुप्पी, इस ज़ुल्म की सबसे बड़ी साझेदार नहीं बन चुकी?




