विशेष रिपोर्ट | तहलका टुडे डेस्क
भोपाल/नई दिल्ली
वक्फ की संपत्तियाँ मुसलमानों के आबा-ओ-अजदाद ने अल्लाह की रज़ा के लिए दान की थीं, ताकि उनसे मस्जिदें आबाद हों, मदरसे चलें, गरीबों की मदद हो, बेटियों के निकाह हों और समाज का भला हो। लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम इस अमानत की हिफाज़त कर सके?
शायद यही वजह है कि अब इतिहास में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों को शामिल किया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए मनोज मालपानी (इंदौर) और अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना) को सदस्य नियुक्त किया है। डॉ. सनवर पटेल को पुनः बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने संशोधित कानून के तहत नए स्वरूप में वक्फ बोर्ड का गठन किया है।
सवाल केवल इतना नहीं कि हिंदू सदस्य क्यों आए…
असल सवाल यह है कि ऐसी नौबत क्यों आई?
वर्षों से देशभर में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्ज़े, फर्जी लीज़, करोड़ों रुपये की जमीनों का औने-पौने दामों पर हस्तांतरण, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगते रहे हैं।
अल्लाह के नाम पर वक्फ की गई ज़मीनों को कई जगह निजी कमाई का साधन बना दिया गया। जिस अमानत की रक्षा होनी चाहिए थी, वहीं कई स्थानों पर “खाओ और कमाओ” की मानसिकता हावी होती चली गई।
यही कारण बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने वक्फ कानून में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव किए।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की नई टीम
अध्यक्ष
- डॉ. सनवर पटेल
सदस्य
- नजमा हेपतुल्ला
- आतिफ अकील
- फैजान खान
- बहन फातेमा चौधरी
- शाइस्ता सुल्तान
- शबाना खान
- मनोज मालपानी
- अनिमेष भार्गव
- आयुक्त, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (पदेन)
मध्य प्रदेश में कितनी वक्फ संपत्तियाँ हैं?
उपलब्ध जिला-वार सूची के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 14,985 पंजीकृत वक्फ संपत्तियाँ दर्ज हैं।
सबसे अधिक वक्फ संपत्तियाँ वाले जिले
| जिला | संपत्तियाँ |
|---|---|
| शाजापुर–आगर | 1118 |
| उज्जैन | 1061 |
| विदिशा | 925 |
| भोपाल | 797 |
| सीहोर | 706 |
| रायसेन | 670 |
| इंदौर | 645 |
| धार | 635 |
| देवास | 577 |
| बुरहानपुर | 566 |
| मंदसौर | 525 |
| रतलाम | 477 |
| ग्वालियर | 453 |
| राजगढ़ | 420 |
अन्य प्रमुख जिले
- गुना-अशोकनगर – 366
- खरगोन – 302
- सिवनी – 273
- सागर – 261
- शिवपुरी – 261
- नीमच – 253
- छतरपुर – 250
- सतना – 232
- जबलपुर – 232
- भिंड – 212
- टीकमगढ़-निवाड़ी – 208
- खंडवा – 194
- मुरैना – 186
- छिंदवाड़ा – 185
- रीवा – 181
- बालाघाट – 164
- नर्मदापुरम – 149
- पन्ना – 144
- हरदा – 143
- नरसिंहपुर – 132
- झाबुआ – 129
- बैतूल – 123
- बड़वानी – 120
- दमोह – 117
- श्योपुर – 96
- मंडला – 90
- कटनी – 84
- शहडोल – 70
- दतिया – 69
- उमरिया – 42
- डिंडोरी – 23
- अनूपपुर – 13
- अलीराजपुर – 4
- सिंगरौली – 0
वक्फ बोर्ड का काम क्या है?
वक्फ बोर्ड का उद्देश्य धार्मिक कार्य करना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन, संरक्षण, रिकॉर्ड, आय की निगरानी, अतिक्रमण हटाना और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। संशोधित कानून में डिजिटलीकरण, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है।
सबसे बड़ा संदेश
यदि मुसलमान अपनी औक़ाफ़ की संपत्तियों की ईमानदारी से हिफाज़त करते, मुतवल्ली अमानत को अमानत समझते और भ्रष्टाचार पर समय रहते रोक लगाते, तो शायद आज कानून को बोर्ड की संरचना बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
वक्फ की ज़मीन किसी व्यक्ति या संस्था की निजी मिल्कियत नहीं, बल्कि अल्लाह के नाम की अमानत है। उसकी रक्षा करना केवल कानूनी नहीं, बल्कि धार्मिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है।
आज मध्य प्रदेश का फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी और आत्ममंथन का अवसर है—**क्या हम अपने औक़ाफ़ की हिफाज़त स्वयं करेंगे, या फिर उसकी निगरानी की जिम्मेदारी दूसरों को सौंपनी पड़ेगी?**




