तहलका टुडे टीम
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2025
भारत के रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने अपने कार्यकाल में जो ऐतिहासिक काम किए हैं, वे सिर्फ़ विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति और गंगा-जमुनी तहज़ीब को भी मज़बूती देते हैं। यही वजह है कि आज उनका नाम सिर्फ़ राजनीति तक नहीं, बल्कि देश की हिफ़ाज़त और तहज़ीब के रखवाले के तौर पर लिया जाता है।
लखनऊ का कायाकल्प और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संरक्षण
लखनऊ संसदीय क्षेत्र में मेट्रो सेवा, आधुनिक फ्लाईओवर, स्मार्ट पार्क, नगरीय सौंदर्यीकरण और सड़कों का जाल – इन सबने राजधानी का चेहरा बदल दिया है। लेकिन राजनाथ सिंह का योगदान सिर्फ़ विकास कार्यों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने गंगा-जमुनी तहज़ीब, यानी अमन, भाईचारा और मोहब्बत की संस्कृति को भी हमेशा प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि आज लखनऊ का हर वर्ग उन्हें अपना रहनुमा मानता है।
रक्षा के मोर्चे पर सुनहरी उपलब्धियाँ
ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के प्रधान सचिव सैयद बाबर अशरफ़ किछौछवी ने कहा —
“राजनाथ सिंह जी की अगुवाई में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता हासिल की, ब्रह्मोस मिसाइल का स्वदेशीकरण तेज़ी से हुआ और देश रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मज़बूती से बढ़ा। ये उपलब्धियाँ सिर्फ़ सैन्य नहीं, बल्कि भारत की पहचान और संप्रभुता के स्थायी प्रतीक हैं, जिनसे आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेंगी।”
उन्होंने यह भी कहा —
“जैसे अतीत में सूफ़िया-ए-किराम ने मुल्क की आन-बान-शान की हिफ़ाज़त के लिए सीना तानकर खड़े रहे, वैसे ही आज भी मिशन और उसके सदस्य मातृभूमि की सुरक्षा और गरिमा के लिए हर क़ुर्बानी देने को तैयार हैं।”
सूफ़ी विचारधारा और राष्ट्रीय एकता पर चर्चा
नई दिल्ली स्थित 17, अकबर रोड पर रक्षामंत्री से मुलाक़ात के दौरान मोहम्मदी मिशन के प्रतिनिधिमंडल ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
बाबर अशरफ़ ने कहा —
“सूफ़ी विचारधारा ही भारत की असली ताक़त है। यह विचारधारा ‘एकता में विविधता’ की प्रतीक है, जिसने हमेशा मोहब्बत, अमन और भाईचारे को मज़बूत किया है। इसी ने भारत की राष्ट्रीय एकता को नई ऊर्जा दी है।”
इस पर रक्षामंत्री ने सहमति जताते हुए कहा —
“देश में अमन-ओ-चैन और सौहार्द को बढ़ाने में सूफ़ी परंपरा की भूमिका हमेशा केंद्रीय रही है। भारत की आत्मा में यह परंपरा गहराई से रची-बसी है।”
जुलूस-ए-मोहम्मदी: अमन और मोहब्बत का पैग़ाम
बाबर अशरफ़ ने इस अवसर पर पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ की विलादत के दिन को “अमन दिवस” बताते हुए कहा —
“लखनऊ में जुलूस-ए-मोहम्मदी सदियों से शान-ओ-शौकत से निकलता रहा है और ज्योतिबा फुले पार्क पर अमन की दुआओं के साथ संपन्न होता है। लेकिन हाल के वर्षों में पार्क को एलडीए द्वारा विवाह समारोह और पार्किंग के लिए आवंटित कर दिए जाने से इस ऐतिहासिक परंपरा में बाधाएँ आ रही हैं।”
प्रतिनिधिमंडल ने इस पर रक्षामंत्री से हस्तक्षेप की अपील की और एक स्मरण-पत्र भी सौंपा।
इस पर राजनाथ सिंह ने आश्वासन दिया —
“जुलूस-ए-मोहम्मदी के अमन और मोहब्बत के पैग़ाम को गरिमा और उत्साह के साथ जारी रखने के लिए आवश्यक कदम ज़रूर उठाए जाएँगे।”
अम्बर फ़ाउंडेशन की सराहना
बैठक में बाबर अशरफ़ ने समाजसेवी संस्था अम्बर फ़ाउंडेशन की भी प्रशंसा की और कहा —
“यह संस्था समाज के ग़रीब और वंचित तबकों की मदद कर रही है। यह एक अनुकरणीय प्रयास है, जो सीधे कमज़ोर तबके तक पहुँचता है। ऐसे प्रयास वाक़ई प्रशंसा और माननीय रक्षामंत्री की सराहना के पात्र हैं।”
रक्षामंत्री ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा —
“देश में भाईचारे और इंसानियत की सेवा से जुड़ी हर पहल को मेरा पूरा सहयोग मिलेगा। जुलूस-ए-मोहम्मदी का पैग़ाम-ए-मोहब्बत और अमन हमेशा जारी रहेगा।”
लखनऊ का भविष्य और जनता का विश्वास
प्रतिनिधिमंडल ने अंत में यह अपील की कि राजनाथ सिंह जी लखनऊ के विकास और गंगा-जमुनी तहज़ीब की हिफ़ाज़त पर अपना विशेष ध्यान बनाए रखें।
उन्होंने कहा —
“राजनाथ सिंह जी की कार्यशैली ने हर मज़हब और हर बिरादरी का अटूट विश्वास अर्जित किया है, क्योंकि उनके लिए असली धर्म वतन और इंसानियत की सेवा है। यही वजह है कि आज उनकी लोकप्रियता हर वर्ग में बराबर है।”
यह मुलाक़ात सिर्फ़ एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि इसने यह साबित किया कि भारत का भविष्य विकास, अमन और तहज़ीब की त्रयी पर टिका है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इस राह के सबसे मज़बूत रहनुमा बनकर उभरे हैं।