तहलका टुडे डेस्क/मनोज शुक्ला
नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास में आज एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मुलाकात हुई। सामाजिक कार्यों में अग्रणी, सेवाभावी व भारतीय सादात के प्रतिनिधि सैयद रिज़वान मुस्तफा रिज़वी ने भारत में ईरान के राजदूत डॉ. ईराज इलाही से विशेष भेंट की। इस मुलाकात में न केवल आपसी रिश्तों की गर्मजोशी झलकी, बल्कि ईरान की हालिया कूटनीतिक कामयाबियों पर बधाई और सलाम पेश किया गया।
डॉ. ईराज इलाही ने जिस शराफत, मोहब्बत और इज्जत के साथ मुलाकात की—और फिर स्वंय बाहर तक छोड़ने आए—वह भारतीय तहज़ीब और सैयदाना रिवायत की गहराई को और भी दिल से जोड़ने वाली रही। यह वह लम्हा था जिसने दिल को छू लिया और एहसास करा दिया कि सच्चे रिश्ते सरहदों से परे होते हैं।
इस गरिमामयी मुलाकात का सबसे महत्वपूर्ण पहलू था बाराबंकी जिले के किन्तूर में “इमाम खुमैनी रिफाइनरी परियोजना” को लेकर विस्तृत चर्चा। सैयद रिज़वान मुस्तफा ने ईरान सरकार को इस प्रस्ताव की तफ़सीलात दीं और यह समझाया कि कैसे यह रिफाइनरी प्रोजेक्ट न सिर्फ़ भारत-ईरान रिश्तों को मज़बूत करेगा, बल्कि इमाम खुमैनी के किन्तूर जैसे महाभारत काल के ऐतिहासिक स्थल को आर्थिक और सामाजिक विकास की नई दिशा भी देगा।
इस मौके पर सैयद रिज़वान मुस्तफा ने एक विशेष पत्र भी ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़िक्शियान के नाम राजदूत डॉ. ईराज इलाही को सौंपा, जिसमें बाराबंकी के लोगों की आशाएं, इमाम खुमैनी से जुड़ी सांस्कृतिक भावना, और इस परियोजना के माध्यम से दोनों देशों के बीच नए युग की शुरुआत की अपील दर्ज थी।
इस उच्चस्तरीय संवाद में अंबर फाउंडेशन के चेयरमैन वफा अब्बास की भी अहम भूमिका रही। सामाजिक बदलाव और इंसानी भलाई के क्षेत्रों में सक्रिय वफा अब्बास ने इस संवाद को सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विकास के पुल से जोड़ते हुए इसे ज़मीनी हकीकत देने की कोशिश की है।
यह मुलाकात इस बात का प्रतीक बनी कि जब नीयत नेक हो और मक़सद मज़बूत, तो एक सच्ची बातचीत राष्ट्रों के भविष्य को नई रोशनी दे सकती है।
बाराबंकी के किन्तूर से उठी यह आवाज़ अब अंतरराष्ट्रीय फलक पर गूंजने लगी है—और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही रुकी हुई इमाम खुमैनी रिफाइनरी योजना को मूर्त रूप मिलेगा।