अमेरिकी दबाव के बीच भारत-ईरान रिश्तों की नई दस्तक: “अब समय है साथ चलने का” – ईरानी राजदूत और भारतीय रणनीतिक प्रस्ताव

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ईरान ने भारत को दी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की पेशकश, तेल व्यापार, ऑटोमोबाइल, तकनीक और लोकल करेंसी ट्रेड को लेकर दिखाया भरोसा। उधर, भारत के उद्योग संगठन ने किन्तूर (बाराबंकी) में “इमाम खुमैनी रिफाइनरी” की स्थापना और तेल आयात पुनः शुरू करने का प्रस्ताव भेजा प्रधानमंत्री को।

 

नई दिल्ली/लखनऊ, 8 अगस्त 2025 जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की, तो उसी वक्त ईरान ने भारत से रिश्तों को नई मजबूती देने का प्रस्ताव रखकर यह स्पष्ट कर दिया कि अब एशियाई देशों को न दबाव की ज़रूरत है, न इजाज़त

भारत में ईरान के राजदूत डॉ. इराज इलाही ने हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार में कहा:

“अब भारत और ईरान को दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर साझेदारी की ओर बढ़ना चाहिए। हम मुनाफाखोर सहयोग नहीं, बल्कि आपसी आत्मनिर्भरता पर आधारित संबंध चाहते हैं।”


🛢️ भारत के लिए सस्ता और भरोसेमंद ईरानी तेल तैयार

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह फिर से भारत को सस्ता, स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल देने को तैयार है। इसके साथ ही ईरानी बाजार भारतीय उत्पादों के लिए एक बड़ा मंच बन सकता है — जिसे राजदूत ने “विन-विन साझेदारी” बताया।


🚘 तेल से आगे: तकनीक, ऑटोमोबाइल और शिक्षा तक फैली साझेदारी की पेशकश

ईरान ने भारत के साथ सहयोग के नए द्वार खोले हैं — विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, स्पेयर पार्ट्स, मेडिसिन, तकनीकी ट्रांसफर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में।
डॉ. इलाही ने कहा:

“ईरान अब केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहना चाहता। भारत के पास वह क्षमता है, जो ईरान के साथ मिलकर एशिया में नया नेतृत्व गढ़ सकती है।”


💵 डॉलर नहीं, लोकल करेंसी में ट्रेड का मॉडल

ईरान ने यह भी सुझाव दिया कि भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम की जाए और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को प्राथमिकता दी जाए।
यह नीति BRICS जैसे मंचों को मज़बूती देगी और वैश्विक दक्षिण को मजबूती।


🔧 भारतीय कंपनियों को खुले निवेश के अवसर

ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र में ईरान ने भारतीय कंपनियों को “रेड कारपेट” आमंत्रण दिया है। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया जा चुका है, और ईरान भारतीय टेक्नोलॉजी और निवेश का स्वागत करने को तैयार है।


📜 भारत से आया विशेष प्रस्ताव: किन्तूर में बने “इमाम खुमैनी रिफाइनरी”

ईरानी प्रस्तावों को ज़मीन पर लाने के लिए भारत की ओर से भी एक अहम पहल की गई है।
भारतीय इंडस्ट्रीज चेंबर ऑफ ट्रस्ट के सचिव सैयद रिज़वान मुस्तफा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र भेजा है, जिसकी कॉपी विदेश मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री, रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है।

इस पत्र में दो प्रमुख प्रस्ताव रखे गए हैं:


1. ईरान से तेल आयात फिर से शुरू किया जाए

पत्र में लिखा गया है कि वैश्विक तेल संकट और महंगाई के बीच ईरान से सस्ता और भरोसेमंद तेल आयात भारत की आर्थिक रणनीति के लिए फायदेमंद साबित होगा।

“ईरान वर्षों से भारत का भरोसेमंद साझेदार रहा है। केवल अमेरिकी दबाव में आकर यह संबंध रोकना आत्मनिर्भर विदेश नीति के खिलाफ है।” — सैयद रिज़वान मुस्तफा


🏭 2. किन्तूर (बाराबंकी) में “इमाम खुमैनी रिफाइनरी” की स्थापना की जाए

किन्तूर — जो आयतुल्लाह इमाम खुमैनी के पुश्तैनी रिश्ते से जुड़ा क्षेत्र है — को एक रणनीतिक ऊर्जा परियोजना का केंद्र बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह न सिर्फ भारत-ईरान के ऐतिहासिक रिश्तों को नया आयाम देगा, बल्कि पूरब के युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर भी देगा।

“यह परियोजना भारत की आत्मनिर्भर ऊर्जा रणनीति का हिस्सा बन सकती है। यह उत्तर प्रदेश के विकास और भारत की रणनीतिक स्थिति दोनों को मजबूत करेगी।”


🕊️ राजदूत का संदेश + रणनीतिक सोच = एशिया का नेतृत्व भारत-ईरान के हाथ

राजदूत डॉ. इलाही ने भारतीय नेतृत्व से आग्रह किया कि भारत को अब अमेरिका जैसे देशों के “अतिरिक्त निर्देशों” पर नहीं, बल्कि अपने “राष्ट्रीय हितों” के आधार पर विदेश नीति बनानी चाहिए।

“21वीं सदी एशिया की है। भारत और ईरान मिलकर संतुलित और न्यायपूर्ण व्यवस्था की ओर बढ़ सकते हैं।”


दबाव  बनाम दिशा – भारत का फैसला अब इतिहास रचेगा

ईरान की पहल और भारत से आए विचारशील प्रस्ताव से स्पष्ट है कि दबाव की राजनीति अब पुरानी हो चुकी है, और नई साझेदारी, आत्मनिर्भरता और एशियाई नेतृत्व का युग शुरू हो चुका है।

ईरान भारत के लिए सिर्फ एक तेल साझेदार नहीं, बल्कि भविष्य का रणनीतिक मित्र बन सकता है — अगर भारत समय पर निर्णय ले।


📌 यह विस्तृत रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब वैश्विक पटल पर नई ध्रुवीयता उभर रही है। भारत के पास आज यह ऐतिहासिक मौका है कि वह अमेरिका के प्रभाव से हटकर अपने आर्थिक और रणनीतिक फैसले खुद करे।

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