तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
नई दिल्ली:अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के ईरान को लेकर दिए गए बेहद सख्त और धमकी भरे बयान ने पूरी दुनिया में राजनीतिक भूचाल पैदा कर दिया है। उनके संदेश — “अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो कुछ भी नहीं बचेगा” — के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
दुनिया भर में लाखों लोगों ने इस बयान को “धमकी की राजनीति” बताते हुए सवाल उठाया कि क्या महाशक्तियां अब संवाद की जगह डर और दबाव के जरिए दुनिया चलाना चाहती हैं? कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसे मध्य पूर्व में तनाव को और भड़काने वाला बयान बताया है।
ईरान समर्थकों ने खुलकर कहा कि “ईरान कोई कमजोर मुल्क नहीं, बल्कि हजारों साल की तहज़ीब, सब्र और प्रतिरोध का नाम है।” सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग ईरान के समर्थन में उतर आए और अमेरिका-इज़राइल की नीतियों की आलोचना करते हुए लिखने लगे कि “धमकियां इंसानी हौसलों को खत्म नहीं कर सकतीं।”
मध्य पूर्व के जानकारों का कहना है कि लगातार बढ़ती बयानबाजी पूरी दुनिया को एक बड़े संकट की ओर धकेल सकती है। तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शांति पर इसके गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने लिखा कि “इतिहास गवाह है, जिन कौमों ने अपने आत्मसम्मान के लिए संघर्ष किया, उन्हें दबाया नहीं जा सका।” वहीं कुछ लोगों ने अमेरिका और इज़राइल की नीतियों को “ताकत के घमंड” की राजनीति करार दिया।
इस बीच ईरान समर्थक समूहों ने कहा कि दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने हर मुश्किल दौर में अपने वजूद और संप्रभुता की रक्षा की है। लोगों का कहना है कि किसी भी देश को धमकाकर झुकाने की कोशिशें दुनिया में अशांति और नफरत को ही बढ़ाती हैं।
ट्रंप के बयान के बाद इंटरनेट पर “Iran Will Not Bow” और “Stop War Politics” जैसे संदेश तेजी से वायरल होने लगे। कई देशों के लोगों ने युद्ध और टकराव की राजनीति की बजाय शांति और संवाद की अपील की।
फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें इस बढ़ते विवाद पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर हालात संभाले नहीं गए तो यह बयानबाजी आने वाले समय में वैश्विक तनाव को और खतरनाक मोड़ दे सकती है।




