तहलका टुडे टीम/आरिफ हुसैनी
जौनपुर की सरज़मीन पर गुरुवार की रात आयोजित मजलिस केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि वह इंसानियत, भाईचारे और भारत-ईरान के ऐतिहासिक रिश्तों का ऐसा खूबसूरत संगम बन गई, जिसने हर दिल को छू लिया। नगर के शिया कॉलेज में आयोजित इस मजलिस में उस समय खास रूहानी और अंतरराष्ट्रीय अहमियत जुड़ गई, जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई के प्रतिनिधि आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शिरकत कर अपने विचार रखे।
अपने संबोधन में आयतुल्लाह डॉ. हकीम इलाही ने कहा कि जौनपुर की धरती पर आकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वह अपने ही घर और अपने लोगों के बीच मौजूद हों। उन्होंने कहा कि यहां की तहज़ीब, इल्म की परंपरा और गंगा-जमुनी संस्कृति पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान का रिश्ता केवल सियासी या कारोबारी नहीं, बल्कि सदियों पुरानी मोहब्बत, साझा संस्कृति और इंसानी रिश्तों पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया नफरत, बंटवारे और टकराव की राजनीति से जूझ रही है, तब जौनपुर जैसे शहर उम्मीद की नई रोशनी दिखाते हैं। यहां हिन्दू और मुसलमान केवल साथ रहने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के दुख-सुख में शरीक होने वाले परिवार की तरह हैं। यही किसी मजबूत और सभ्य समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है।
आयतुल्लाह इलाही ने कहा कि हर मजहब इंसानियत, अमन और मोहब्बत का पैगाम देता है। धर्म कभी नफरत नहीं सिखाता, बल्कि इंसान को इंसान से जोड़ता है। अगर इंसान अपने असली धर्म और उसकी शिक्षा को समझ ले, तो दुनिया के कई झगड़े अपने आप खत्म हो जाएं।
मजलिस में महिलाओं, बुज़ुर्गों, युवाओं और बच्चों की भारी मौजूदगी देखने को मिली। शिया और सुन्नी समुदाय के साथ अन्य वर्गों की सहभागिता ने इस आयोजन को वास्तविक सामाजिक एकता का प्रतीक बना दिया। विभिन्न अंजुमनों और सुन्नी समुदाय की ओर से लगाई गई सबीलें जनपद की मेहमाननवाज़ी और साझा संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर पेश करती रहीं।
मजलिस के दौरान हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तकी नकवी, मौलाना कमर हसनैन, मौलाना कारी शाह फजलुल मन्नान रहमानी और मौलाना कारी ज़िया जौनपुरी ने भी तकरीर कर अमन, भाईचारे और इंसानी अख़लाक़ पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन विख्यात शायर अनीस जायसी ने किया, जिन्होंने अपने अंदाज़-ए-बयान से महफ़िल को और असरदार बना दिया।
यह मजलिस इस बात का जीवंत संदेश बनकर उभरी कि जब दिलों में मोहब्बत, रिश्तों में इख़लाक़ और समाज में इंसानियत जिंदा हो, तब मजहब और सरहदें दूरियां नहीं बल्कि मोहब्बत का पुल बन जाती हैं। जौनपुर की इस ऐतिहासिक रात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब आज भी दुनिया के लिए उम्मीद और भाईचारे की सबसे बड़ी मिसाल है।

आज सुबह मौलाना सफदर हुसैन जैदी के आवास पर रहबर के भारत में नुमाइंदे डॉ अब्दुल माजिद हकीम इलाही साहब मौलाना तकी नकवी साहब, मौलाना कमर हसनैन साहब ने मुलाकात कर उनकी अयादत की




