तहलका टुडे ब्यूरो | लखनऊ/ सलमान रिजवी विधि संवाददाता
उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) जीशान रिज़वी को वक्फ न्यायाधिकरण द्वारा सुनाई गई एक माह के सिविल कारावास की सजा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से फिलहाल तत्काल राहत मिलती नहीं दिख रही है।
हाईकोर्ट के दिनांक 7 जुलाई 2026 के उपलब्ध आदेश के अनुसार, वक्फ अपील संख्या 13/2026 को वक्फ अपील संख्या 8/2026 के साथ सूचीबद्ध (List) और संबद्ध (Connect) करने का निर्देश दिया गया है। उपलब्ध आदेश में सजा या ट्रिब्यूनल के आदेश पर किसी प्रकार के स्थगन (Stay) का उल्लेख नहीं है।
सिर्फ लिस्टिंग, स्टे का उल्लेख नहीं
माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार द्वारा पारित संक्षिप्त आदेश में केवल इतना कहा गया है कि अपील को वक्फ अपील संख्या 8/2026 के साथ सूचीबद्ध और संबद्ध किया जाए। आदेश में न तो ट्रिब्यूनल के निर्णय के क्रियान्वयन पर रोक का उल्लेख है और न ही सिविल कारावास के आदेश को स्थगित करने का कोई निर्देश दिखाई देता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि केवल अपील दायर हो जाना और उसे सूचीबद्ध कर देना, अपने आप में ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक नहीं माना जाता। यदि किसी पक्ष को अंतरिम राहत चाहिए होती है, तो उसके लिए न्यायालय का स्पष्ट स्थगन आदेश आवश्यक होता है।
अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर
ट्रिब्यूनल द्वारा एक माह के सिविल कारावास का आदेश पारित किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की आगामी कार्यवाही पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत कोई अंतरिम राहत देती है या ट्रिब्यूनल के आदेश को प्रभावी रहने देती है।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से भी अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उपलब्ध आदेश क्या कहता है?
7 जुलाई 2026 के उपलब्ध हाईकोर्ट आदेश में केवल इतना निर्देश दिया गया है कि वक्फ अपील संख्या 13/2026 को वक्फ अपील संख्या 8/2026 के साथ सूचीबद्ध एवं संबद्ध किया जाए। उपलब्ध आदेश में स्थगन (Stay) का कोई उल्लेख नहीं है।




