Supreme Court Rejects Plea Against Bail in Matin Ahmad Murder Case: Senior Advocate Syed Mashhood Abbas Secures Major Legal Victory”

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🌀 तहलका टुडे | कानूनी रिपोर्ट 🌀
दिनांक: 31 जुलाई 2025


⚖️ सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: चर्चित मतीन अहमद हत्याकांड में आरोपियों की जमानत पर लगी अंतिम मुहर, वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद मशहूद अब्बास की कानूनी रणनीति सफल

नई दिल्ली/आजमगढ़:
देश के चर्चित मतीन अहमद हत्याकांड में नया मोड़ तब आया जब माननीय उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 29 जुलाई 2025 को वादी अकील अहमद द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमानत आदेश के विरुद्ध दाखिल की गई विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।

यह मामला थाना गंभीरपुर, जनपद आजमगढ़ के अपराध संख्या 359/2022 से संबंधित है, जिसमें धारा 302, 147, 148, 149, 336, 452, 504, 506 भा.दं.वि. एवं 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले में आरोपी नासिर पुत्र नियाज अहमद निवासी मोहम्मदपुर, थाना गंभीरपुर को पहले माननीय उच्चतम न्यायालय से राहत नहीं मिली थी, किंतु बाद में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिनांक 9 मई 2025 को उन्हें जमानत प्रदान की।

वादी पक्ष द्वारा इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, लेकिन न्यायालय ने सरकार और वादी मुकदमा की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं को सुनने के पश्चात यह विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी


🎓 कानूनी जंग के नायक बने एडवोकेट सैयद मशहूद अब्बास

इस पूरे मुकदमे में एक नाम विशेष रूप से उभरकर सामने आया — वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद मशहूद अब्बास, जिनकी कानूनी सूझबूझ, अनुभव और तार्किक प्रस्तुति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे जटिल आपराधिक मामलों में न्यायिक सफलता के पर्याय हैं।

सैयद मशहूद अब्बास ने न केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट में आरोपी पक्ष का दमदार पक्ष रखा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में भी उनकी मजबूत पैरवी के कारण आरोपी को अंतिम राहत मिली। उनकी रणनीति, तथ्यों की प्रस्तुति, और संवैधानिक प्रावधानों की सटीक व्याख्या ने न्यायालय को यह विश्वास दिलाया कि जमानत आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।


👨‍👩‍👦 परिजनों ने ली राहत की सांस

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी नासिर और उनके परिवारजनों ने राहत की सांस ली। यह फैसला उनके लिए न सिर्फ कानूनी जीत है बल्कि मानसिक सुकून भी लेकर आया है।


🏛️ सैयद मशहूद अब्बास: न्याय की बुलंद आवाज़

सैयद मशहूद अब्बास का नाम आज देश के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की श्रेणी में एक अलग मुकाम रखता है। उन्होंने अनेक जटिल आपराधिक मामलों में न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी लॉजिक आधारित दलीलें, अदालत में आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतिकरण और संवैधानिक मूल्यों की गहरी समझ उन्हें आम व खास सबके बीच लोकप्रिय बनाती है।

उनकी इस सफलता ने एक बार फिर यह साबित किया है कि न्यायालय में केवल भावनाएं नहीं, प्रमाण और विधिक कौशल ही निर्णायक भूमिका निभाते हैं।


📌 संपर्क:
रिपोर्टिंग: तहलका टुडे कानूनी संवाददाता, नई दिल्ली से 9452000001tahalka@gmail.com 
स्रोत: सुप्रीम कोर्ट दस्तावेज़, इलाहाबाद हाईकोर्ट आदेश, वादी और प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बयानों पर आधारित


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