वफ़ा अब्बास ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पेश किया गुलदस्ता, हज़रत अली (अ.स.) इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की कार्यवाही पर

THlkaEDITR
4 Min Read

तहलका टुडे टीम

लखनऊ | 15 नवंबर 2025,लखनऊ की गंगा–जमुनी तहज़ीब की सरज़मीन पर आज एक ऐसा ऐतिहासिक दिन दर्ज हुआ
जिसने शहर की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दिशा को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

बिहार चुनाव में शानदार जीत के बाद लखनऊ पहुंचे
माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह से
अंबर फाउंडेशन के चेयरमैन वफ़ा अब्बास ने आज मुलाक़ात की
और लखनऊवासियों की ओर से उन्हें गुलदस्ता पेश कर धन्यवाद दिया।

यह मुलाक़ात सिर्फ़ शिष्टाचार नहीं,
बल्कि उस “ऐतिहासिक निर्णय” का आभार थी
जिसने “हज़रत अली (अ.स.) इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी” के सपने को
सरकारी दस्तावेज़ों से निकलकर धरातल की ओर बढ़ा दिया है।

सरकार की आधिकारिक कार्रवाई: प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय और संबंधित विभागों तक पहुँचा

वफ़ा अब्बास द्वारा रक्षा मंत्री को सौंपे गए प्रस्ताव पर
राजनाथ सिंह जी ने न सिर्फ़ गंभीरता दिखाई
बल्कि उसे OSD क़े.पी. सिंह के माध्यम से
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय को अग्रेषित भी कर दिया।

इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने
6 नवंबर 2025 को औपचारिक ज्ञापन जारी करके
इस प्रस्ताव को अन्य संबंधित विभागों तक भेज दिया है।

सरकार की यह तेज़ी और पारदर्शिता
इस बात का संकेत है कि
लखनऊ में एक अंतरराष्ट्रीय स्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना
अब केवल सपना नहीं,
बल्कि “प्रक्रियाधीन परियोजना” बन चुकी है।

लखनऊ के शिया समुदाय की ओर से विशेष धन्यवाद

वफ़ा अब्बास ने मुलाक़ात में रक्षा मंत्री से कहा—

“माननीय राजनाथ सिंह जी,
लखनऊ के हजारों शिया नागरिकों, उलेमाओं, बुद्धिजीवियों और नौजवानों की ओर से
मैं आपका दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।
जो काम आज़ादी के बाद 75 वर्षों में नहीं हो सका,
उसे आपने आगे बढ़ाया है।
यह विश्वविद्यालय हज़रत अली (अ.स.) की
इंसानियत, इल्म और इंसाफ़ की शिक्षाओं पर खड़ा होगा।”

लखनऊ का शिया समुदाय इस निर्णय को
अपनी आवाज़, अस्मिता और पहचान की पुनर्स्थापना के रूप में देख रहा है।

क्यों ज़रूरी है “हज़रत अली (अ.स.) इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी”?

हज़रत अली (अलैहिस्सलाम)—

  • न्याय की मिसाल
  • ज्ञान का महासागर
  • साहस और सत्य की प्रतीक आवाज़
  • और मानवता के मार्गदर्शक

उनके नाम पर विश्वविद्यालय का निर्माण
सिर्फ़ एक इमारत या संस्थान नहीं,
बल्कि भारत की साझा संस्कृति और नैतिक मूल्यों को समर्पित एक शैक्षणिक क्रांति होगी।

यह विश्वविद्यालय आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा का संगम होगा—

📚 प्रस्तावित विभाग:

  • Artificial Intelligence (AI)
  • Robotics
  • Cybersecurity
  • Data Science
  • Ethics and Leadership Studies
  • Interfaith Studies & Peace Research

यानी यह विश्वविद्यालय लखनऊ को
तकनीक, विज्ञान, नैतिकता और इंसानियत का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बना सकता है।

दो बड़े कदम जिन्होंने शिया समुदाय में विश्वास पैदा किया

वफ़ा अब्बास ने राजनाथ सिंह जी को बताया कि—

20 वर्षों से बंद शिया सुन्नी जुलूसों को भाजपा सरकार ने अनुमति दी

यह शिया समाज के लिए भावनात्मक, धार्मिक और ऐतिहासिक जीत थी।

लगभग 30 वर्षों बाद  वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन हुआ

जिससे धार्मिक–सामाजिक संस्थाओं को नई पहचान मिली।

इन दोनों कदमों ने
शिया समुदाय में सम्मान, भरोसे और संवाद का नया अध्याय खोला है।

🌟 लखनऊ—जहाँ तहज़ीब और इल्म साथ-साथ चलते हैं

वफ़ा अब्बास ने कहा—

“आज महसूस हुआ कि जब नीयत साफ़ हो और इरादा नेक हो,
तो सरकारें भी साथ देती हैं और खुदा भी।
‘हज़रत अली (अ.स.) इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी’
एक ऐसा ख्वाब है जिसे हम सब मिलकर
हक़ीक़त बनाएंगे, इंशा अल्लाह।”

उन्होंने आगे कहा कि यह विश्वविद्यालय
लखनऊ को शिक्षा और संस्कृति का
वैश्विक मानचित्र पर असाधारण स्थान दिलाएगा।

❤️ लखनऊवासियों के नाम विशेष संदेश

वफ़ा अब्बास ने जनता से कहा—

“लखनऊ के सभी समुदायों, उलेमाओं, बुद्धिजीवियों और युवाओं—
आपकी दुआएँ, आपका भरोसा और आपका साथ
ही इस मिशन की सबसे बड़ी ताक़त है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *