तहलका टुडे डेस्क
ईरान को धमकाया, दबाया, घेराबंदी की…
लेकिन जब कुछ नहीं चला, तो डोनाल्ड ट्रंप ने वही किया जो वह सबसे अच्छे से करते हैं—
ट्वीट, टैरिफ और ताव!
अब नया फरमान सुनिए—
“जो भी ईरान से व्यापार करेगा, उसे अमेरिका में 25% अतिरिक्त टैक्स भरना होगा।”
मतलब साफ़ है:
ईरान से नाराज़गी है, तो सज़ा बाक़ी दुनिया को!
वाह रे वैश्विक न्याय! 👏
ईरानी आवाम खड़ी, अमेरिका बौखलाया
ईरान में महंगाई है—सच है।
दिक्कतें हैं—बिलकुल हैं।
लेकिन तेहरान की गलियों में जो खड़ा है, वह डर नहीं बल्कि सब्र और आत्मसम्मान है।
उधर व्हाइट हाउस में बैठे साहब सोच रहे हैं—
“प्रतिबंध से नहीं माने? कोई बात नहीं… टैरिफ मारो!”
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनई के नाम से अमेरिका इतना घबराया हुआ है कि
अब लड़ाई ईरान से कम और अपने ही सहयोगियों से ज़्यादा लग रही है।
महंगाई के लिए ‘समर्थन’ या साज़िश?
अमेरिका बड़ी मासूमियत से कहता है—
हम तो ईरानी प्रदर्शनकारियों के साथ हैं!
और उसी सांस में—
प्रतिबंध भी वही लगाता है
दवाइयाँ महंगी करता है
तेल, खाना, रोज़मर्रा सब मुश्किल बनाता है
वाह!
महंगाई पैदा करो, फिर कहो—हम तुम्हारे दर्द के साथ हैं!
इसे कहते हैं
👉 आग भी लगाओ और फायर ब्रिगेड की फोटो भी खिंचवाओ।
टैरिफ बम: ईरान नहीं तो भारत–यूरोप सही
अब चूंकि ईरान झुका नहीं,
तो ट्रंप साहब ने नया खेल शुरू किया—“टैरिफ क्रिकेट”।
भारत पर पहले 50%
अब ईरान से व्यापार की सज़ा में +25%
कुल = 75% टैक्स!
मतलब संदेश साफ़ है:
या तो अमेरिका की लाइन में चलो,
या टैक्स की बारिश में भीगो! 🌧️
यूरोप से भारत की नज़दीकी भी अमेरिका को चुभ रही है।
EU से FTA की आहट आते ही
ट्रंप के टैरिफ बम का अलार्म बज गया।
सुपरपावर या सुपर-घबराहट?
एक तरफ़ ईरान की आवाम—
महंगाई में भी खड़ी, झुकी नहीं।
दूसरी तरफ़ अमेरिका—
हर नाकामी के बाद
नया टैरिफ, नई धमकी, नया ट्वीट।
सवाल अब ये नहीं कि
ईरान झुकेगा या नहीं—
सवाल ये है कि
क्या दुनिया हमेशा ट्रंप की इस ‘टैरिफ तानाशाही’ को झेलती रहेगी?
क्योंकि जब नीतियाँ मज़ाक बन जाएँ,
तो इतिहास अक्सर जवाब देता है
और इस बार ईरान की आवाम के साथ खड़ा दिख रहा है।
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