तहलका टुडे टीम
लखनऊ, 12 अप्रैल 2026
कुछ नाम वक्त के साथ फीके नहीं पड़ते…
वो हर गुजरते साल के साथ और गहरे होते जाते हैं।
डॉ. अखिलेश दास गुप्ता
ऐसा ही एक नाम…
जो आज भी लखनऊ की फिज़ाओं में जिंदा है,
लोगों की दुआओं में बसता है,
और हर सेवा के काम में दिखाई देता है।
उनकी 9वीं पुण्यतिथि पर राजधानी लखनऊ में जो कुछ हुआ,
वो सिर्फ एक “कार्यक्रम” नहीं था—
वो इंसानियत की खिदमत का एक जिंदा एहसास था।
पुष्पांजलि से शुरू, सेवा पर खत्म—“अखिल ज्योत” बना मिशन
बीबीडी यूनिवर्सिटी में “अखिल ज्योत” कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई,जहां अलका दास गुप्ता,विराज सागर दास,सोनाक्षी दास और
देवांशी दास सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों, फैकल्टी और हजारों छात्र-छात्राओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
लेकिन असली श्रद्धांजलि वहां नहीं रुकी…
वो सेवा बनकर शहर में फैल गई।
जब खून, कपड़े और राशन—सब बन गए श्रद्धांजलि
- NSS द्वारा रक्तदान शिविर—100 लोगों ने जीवनदान का संकल्प लिया
- NCC द्वारा कपड़ा वितरण—जरूरतमंदों को सम्मान मिला
- उत्तरधौंना गांव में लीगल, साइबर और महिला सशक्तिकरण जागरूकता
- ग्रीन एन्थेम ड्राइव—गरीबों को राशन, कपड़े और जरूरी सामान
यह सब इस बात का सबूत था कि
“विरासत को निभाना हो, तो सेवा करनी पड़ती है…”
ज्ञान का उजाला—AI कॉन्फ्रेंस में भविष्य की झलक
बीबीडी ऑडिटोरियम में “AI in Digital Growth” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ,
जहां
डॉ. निश्चल कुमार वर्मा
ने उनके सामाजिक और शैक्षिक योगदान को याद करते हुए
AI के सुरक्षित उपयोग पर जोर दिया।
वहीं डॉ. जगदीश चंद बंसल
ने ड्रोन और AI तकनीक के भविष्य को विस्तार से समझाया।

हर गली, हर मोहल्ला बना सेवा का केंद्र
राजेंद्र नगर, उदयगंज, ऐशबाग, सप्रू मार्ग…
बाराबंकी के गांवों से लेकर अनाथालयों तक—
हर जगह एक ही मिशन था—
“सेवा रुकनी नहीं चाहिए…”
- निःशुल्क नेत्र जांच और चश्मा वितरण
- चिकित्सा एवं दंत परामर्श शिविर
- मदर टेरेसा आश्रम में फल वितरण
- ओल्ड एज होम में सेवा और मनोरंजन
- प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा सशक्तिकरण
भंडारे में नहीं, बराबरी में दिखी श्रद्धा
बीबीडी कैंपस, टाइम्स स्क्वायर, ग्रीन सिटी और यूपी बैडमिंटन अकादमी में आयोजित भंडारों में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
यह सिर्फ भोजन नहीं था—
यह बराबरी, एकता और इंसानियत का संदेश था।
CSR और समाज सेवा—हर स्तर पर योगदान
फॉर्च्यून होटल द्वारा श्रीराम उद्योग अनाथालय में CSR गतिविधियां आयोजित की गईं,
जहां जरूरतमंद बच्चों के बीच खुशियां बांटी गईं।
“नेक विरासत”—जब अलका दास और विराज सागर निभाते हैं फर्ज़
आज के दौर में जहां विरासत अक्सर दिखावे तक सिमट जाती है,
वहीं
अलका दास गुप्ता
की सादगी और
विराज सागर दास
का समर्पण
यह साबित करता है कि
विरासत सिर्फ नाम नहीं—एक जिम्मेदारी है।
… जो दिल में उतर जाए
पुण्यतिथि हर साल आएगी…
फूल भी चढ़ेंगे… भाषण भी होंगे…
लेकिन जो चीज हमेशा जिंदा रहेगी—
वो है
खामोश सेवा, सच्ची नीयत और इंसानियत का जज़्बा।
“ये याद नहीं… ये जिंदा एहसास है”
जब भी कोई भूखा खाना पाएगा…
जब भी कोई बीमार इलाज पाएगा…
जब भी कोई बच्चा मुस्कुराएगा…
तब समझ लेना—
लखनऊ का वो खादिम आज भी जिंदा है।




