तहलका टुडे लीगल डेस्क/सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
लखनऊ:उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह के प्रशासनिक जीवन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले करीब दो वर्षों से सीलबंद लिफाफे में रुकी उनकी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश के बाद अब उनके अपर मुख्य सचिव बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने शासन और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ राय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत सिंह और पुनीत चंद्रा की दलीलें सुनने के बाद सीलबंद लिफाफा खोलने का आदेश पारित किया। इस आदेश के बाद लंबे समय से लंबित प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना तेज हो गई है।
राजेश कुमार सिंह का प्रशासनिक सफर बेहद लंबा और विविध जिम्मेदारियों से भरा रहा है। वर्ष 1999 में उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव, उत्तरांचल विकास विभाग से शुरुआत करने के बाद उन्होंने कुशीनगर, बलिया, मेरठ और अलीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी एवं कलेक्टर की जिम्मेदारी निभाई।
उन्होंने सिंचाई विभाग, भाषा विभाग, वन विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, पर्यावरण विभाग, कृषि विपणन, उद्योग, खेल, आईसीडीएस और रोजगार जैसे अनेक विभागों में महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। इसके अलावा वे राज्य उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक भी रहे।
राजेश कुमार सिंह का अनुभव केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत सरकार में भारी उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में सेवा दी। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
मुरादाबाद मंडल के आयुक्त के रूप में प्रशासनिक नेतृत्व देने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, एनआरआई विभाग, परिवहन विभाग, सार्वजनिक उपक्रम विभाग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग, ग्रामीण विकास संस्थान, सहकारिता विभाग तथा वर्तमान में गृहरक्षक विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
करीब ढाई दशक लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले राजेश कुमार सिंह को शासन-प्रशासन में एक अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारी के रूप में देखा जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनका अपर मुख्य सचिव पद तक पहुंचना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
प्रशासनिक हलकों में अब निगाहें शासन स्तर पर होने वाली आगे की औपचारिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि न्यायालय के आदेश के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में तेजी से निर्णय हो सकता है।
दो वर्षों से बंद फाइल, सीलबंद लिफाफा, न्यायिक आदेश और लगभग 25 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव का यह संगम उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।




