तहलका टुडे टीम
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. महरुख मिर्ज़ा को बड़ी राहत देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि प्रो. मिर्ज़ा को पुनः सेवा में बहाल किया जाए तथा उन्हें नियमों के अनुसार सभी परिणामी सेवा एवं वित्तीय लाभ भी प्रदान किए जाएं।
प्रो. महरुख मिर्ज़ा ने अपनी बर्खास्तगी और अनुशासनात्मक कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती दी थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिका स्वीकार किए जाने योग्य है और उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवादित आदेशों को निरस्त कर दिया।
इस निर्णय को उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए बहाली और अन्य वैधानिक लाभ सुनिश्चित करने होंगे।
फैसले की मुख्य बातें
🔹 प्रो. महरुख मिर्ज़ा की याचिका स्वीकार।
🔹 बर्खास्तगी का आदेश रद्द।
🔹 अनुशासनात्मक कार्रवाई निरस्त।
🔹 सेवा में पुनः बहाली के निर्देश।
🔹 सभी परिणामी सेवा एवं वित्तीय लाभ देने का आदेश।
🔹 हाईकोर्ट के फैसले से पूर्व कुलपति को बड़ी राहत।




