तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव/मोहम्मद वसीक
बाराबंकी। अगस्त क्रांति दिवस और काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ के अवसर पर रविवार को गांधी भवन में लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति उत्तर प्रदेश और गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास, क्रांतिकारी संघर्ष और 9 अगस्त 1942 के महत्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई। इसके बाद महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया गया।
‘अंग्रेजों से आर-पार की लड़ाई चाहते थे डॉ. लोहिया’
मुख्य वक्ता प्रख्यात समाजवादी चिंतक एवं आचार्य नरेंद्र देव समाजवादी संस्थान के संयुक्त सचिव नवीन तिवारी ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक और आर-पार की लड़ाई के पक्षधर थे। उन्होंने कहा कि 1942 का आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में एक ऐसा मोड़ था, जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ देशव्यापी प्रतिरोध ने निर्णायक रूप लिया।
उन्होंने बताया कि 8 अगस्त को मुंबई में कांग्रेस के अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव रखा, जिसका सरदार पटेल ने समर्थन किया। आचार्य नरेंद्र देव, अच्युत पटवर्धन और डॉ. लोहिया सहित अनेक नेताओं ने भी प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया। अगले दिन अरुणा आसफ अली ने गोवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
नवीन तिवारी ने यूसुफ मेहर अली द्वारा ‘भारत छोड़ो’ का नारा दिए जाने को भी आंदोलन के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।
9 अगस्त को मिला था निर्णायक संघर्ष का संदेश
गांधीवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कहा कि 9 अगस्त 1942 का दिन भारतीय इतिहास में जनशक्ति और एकजुटता का प्रतीक है। इसी दौर में देश के अलग-अलग हिस्सों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा हुआ।
उन्होंने कहा कि 1942 की क्रांति ने स्वतंत्रता की लड़ाई को नई दिशा दी, लेकिन इसके साथ देश के भीतर राजनीतिक और सामाजिक विभाजन की प्रक्रिया भी तेज हुई, जिसका परिणाम आगे चलकर देश के विभाजन के रूप में सामने आया।
काकोरी कांड ने युवाओं में जगाया क्रांतिकारी साहस
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोकतंत्र सेनानी कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रामसेवक यादव ने काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ को स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी अध्याय की महत्वपूर्ण स्मृति बताया।
उन्होंने कहा कि काकोरी की घटना केवल इतिहास का एक प्रसंग नहीं, बल्कि उस दौर के क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। इस घटना ने बड़ी संख्या में युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने की प्रेरणा दी और देश की संप्रभुता के लिए संघर्ष का संदेश दिया।
‘आजादी की नींव 9 अगस्त 1942 को मजबूत हुई’
पूर्व विधायक सरवर अली खान ने कहा कि 9 अगस्त 1942 का दिन स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इसी दौर में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आंदोलन ने ‘करो या मरो’ जैसे निर्णायक संदेश के साथ पूरे देश को आंदोलित कर दिया।
उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में उन लोगों की भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष और बलिदान दिया।
इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, त्याग, जेल यात्राओं और बलिदानों की गाथा है। अगस्त क्रांति और काकोरी जैसे अध्याय नई पीढ़ी को लोकतंत्र, स्वतंत्रता और देश की संप्रभुता के मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
कार्यक्रम का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया।
इस अवसर पर बसंत कुमार शर्मा, सलाउद्दीन किदवई, शऊर कामिल किदवई, हुमायूं नईम खान, मुस्तफा हुसैन, मृत्युंजय शर्मा, सभासद अश्वनी शर्मा, बेचई यादव, सुशील गुप्ता, शिवशंकर शुक्ला, दुर्गा प्रसाद, हरि श्याम वर्मा, अशोक शुक्ला, उमानाथ यादव, सत्यवान वर्मा, मोहम्मद अहमद किदवई, अताउर्रहमान सज्जन, अंबरीश वर्मा, अनंत कुमार पांडेय सहित विभिन्न जनपदों से आए लोकतंत्र रक्षक सेनानी, अधिवक्ता, समाजसेवी और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।




