बाराबंकी में बिलिंग कंपनी के खिलाफ सुपरवाइजरों का खुला मोर्चा Inventive Software Solutions पर मानसिक उत्पीड़न, शोषण और अव्यवस्था के आरोप; शिकायत पत्र से मचा हड़कंप,क्या फील्ड स्टाफ की नाराज़गी और प्रबंधन विवाद से ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा एवं UPPCL MD आशीष गोयल की छवि पर पड़ेगा असर? बार-बार मीटर रीडर और सुपरवाइजर बदलने, वेतन भुगतान में पारदर्शिता न होने तथा कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न को लेकर अधीक्षण अभियंता से जांच की मांग; राजस्व वसूली और उपभोक्ता सेवाओं पर संकट की आशंका।

Supervisors allege mental harassment, workplace pressure and frequent staff transfers; concerns raised over bill recovery and consumer services, with possible impact on the image of UP's power reforms.

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बाराबंकी में विधुत बिलिंग एजेंसी परियोजना पर घमासान: बिलिंग कंपनी के खिलाफ सुपरवाइजरों का मोर्चा, कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

मानसिक उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और बार-बार फील्ड स्टाफ बदलने के आरोप; शिकायत अधीक्षण अभियंता तक पहुंची, बिल रिकवरी व्यवस्था पर मंडराया संकट

तहलका टुडे टीम/हसनैन मुस्तफा 

जनपद बाराबंकी में विद्युत बिलिंग व्यवस्था का संचालन कर रही Inventive Software Solutions Private Limited की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर जहां उपभोक्ताओं और स्थानीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के बीच लगातार मीटर रीडरों और सुपरवाइजरों के बदलाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनी के सुपरवाइजरों ने अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मण्डल बाराबंकी को सामूहिक शिकायत पत्र सौंपकर कंपनी के कलेक्टर हेड पर मानसिक उत्पीड़न, शोषण और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस घटनाक्रम ने बाराबंकी में चल रही विद्युत बिलिंग व्यवस्था और राजस्व वसूली तंत्र को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा प्रभाव उपभोक्ता सेवाओं, शिकायत निस्तारण और बिल रिकवरी पर पड़ सकता है।

लगातार बदलाव से बिगड़ रही फील्ड व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में विभिन्न क्षेत्रों में तैनात मीटर रीडरों और सुपरवाइजरों को बार-बार बदला गया है। कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति को स्थानीय परिस्थितियों, उपभोक्ताओं की समस्याओं और तकनीकी चुनौतियों को समझने में समय लगता है, लेकिन इससे पहले ही उसका कार्यक्षेत्र बदल दिया जाता है।

स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें यह तक पता नहीं चल पाता कि उनके क्षेत्र का जिम्मेदार कर्मचारी कौन है। शिकायतों के निस्तारण में देरी और समन्वय की कमी के कारण उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

सुपरवाइजरों का फूटा गुस्सा

अधीक्षण अभियंता को दिए गए शिकायत पत्र में सुपरवाइजरों ने आरोप लगाया है कि कंपनी के कलेस्टर हेड द्वारा कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता। ज्ञापन में कहा गया है कि फील्ड स्टाफ को लगातार दबाव में रखा जाता है, अनुचित भाषा का प्रयोग किया जाता है तथा ऐसे लक्ष्य दिए जाते हैं जिन्हें व्यावहारिक परिस्थितियों में पूरा करना कठिन होता है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लक्ष्य पूरे न होने पर नौकरी से हटाने, वेतन रोकने और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि क्षेत्रीय और तकनीकी समस्याओं की अनदेखी कर संपूर्ण जिम्मेदारी केवल फील्ड स्टाफ पर डाल दी जाती है।

सर्किल सुपरवाइजर की बहाली की मांग

शिकायत पत्र में एक सर्किल सुपरवाइजर को कार्य से हटाए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि संबंधित सर्किल सुपरवाइजर को बिना किसी स्पष्ट और लिखित कारण के कार्य से पृथक कर दिया गया, जबकि उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ किया था।

सुपरवाइजरों ने अधीक्षण अभियंता से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए उन्हें पुनः बाराबंकी सर्किल में कार्य करने का अवसर दिया जाए।

बिल रिकवरी और उपभोक्ता सेवाओं पर असर की आशंका

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि किसी भी विद्युत वितरण प्रणाली की सफलता काफी हद तक फील्ड स्टाफ की स्थिरता और कार्य संतुष्टि पर निर्भर करती है। मीटर रीडर और सुपरवाइजर उपभोक्ताओं तथा विभाग के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। यदि इन कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता है या उनका बार-बार स्थानांतरण होता है, तो इसका सीधा प्रभाव बिल वसूली, शिकायत निस्तारण और उपभोक्ता सेवाओं पर पड़ सकता है।

जानकारों का कहना है कि यदि कर्मचारियों के आरोपों में सच्चाई है तो यह स्थिति भविष्य में राजस्व वसूली के लिए चुनौती बन सकती है। इससे विभागीय लक्ष्यों और परियोजना की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ सकता है।

विभागीय छवि पर भी उठे सवाल

प्रदेश सरकार द्वारा स्मार्ट मीटर परियोजना को बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और तकनीकी सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया जाता रहा है। ऐसे में जमीनी स्तर पर सामने आ रही शिकायतें और कर्मचारियों का असंतोष परियोजना के क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि यदि कार्यदायी संस्था के प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़ता है तो इसका प्रभाव विद्युत विभाग की छवि पर भी पड़ सकता है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि विभाग और कंपनी दोनों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे कर्मचारियों को सम्मानजनक वातावरण मिले और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्राप्त हों।

जांच की मांग तेज

शिकायत पत्र पर कई सुपरवाइजरों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, जिससे यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर व्यापक असंतोष का संकेत देता है। कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और कार्यस्थल पर स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।

क्लस्टर हेड से जब भी मीटर रीडर की सैलरी स्लिप माँगी जाती वो दी नहीं जाती है की किसका कितना वेतन बना और क्या दिया गया कंपनी द्वारा बताया गया था की मीटर रीडर को ऑटो बिलिंग का 6 रुपये और मैन्युअल का 3 रुपये दिया जाएगा जोकि वो भी नहीं मिल रहा है
जबकि बिलिंग टेंडर ऑटो बिलिंग का 13.41 रुपये हुआ है और मैन्युअल का 8.71 में हुआ है।

फिलहाल कंपनी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं विद्युत विभाग के अधिकारियों की ओर से भी जांच संबंधी कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायतों के बाद विभाग और कंपनी क्या कदम उठाते हैं तथा कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।

कंपनी के MD से नंबर 9837063851 पर संपर्क किया गया बार बार,लेकिन उठा नहीं।।

(संबंधित कंपनी अथवा विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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