तहलका टुडे टीम/हसनैन मुस्तफ़ा
लखनऊ:भारत की धरती पर ऐसे लोग हमेशा जन्म लेते रहे हैं, जो अपने लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए जीते हैं। कोई विद्यालय बनाता है, कोई पुस्तकालय, कोई अस्पताल। और कुछ ऐसे होते हैं जो अस्पताल बनने से पहले ही डॉक्टर तैयार करने का बीड़ा उठा लेते हैं।
ऐसा ही एक सपना लेकर आगे बढ़े मिस्टर यूपी रहे, अम्बर फाउंडेशन लखनऊ के चेयरमैन वफ़ा अब्बास।
कहा जाता है कि उन्हें रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी की राष्ट्रसेवा और युवाओं को आगे बढ़ाने वाली सोच से प्रेरणा मिली। उन्होंने निश्चय किया कि यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो देश के हर गरीब और प्रतिभाशाली बच्चे को अवसर मिलना चाहिए।
इसी सोच से जन्म हुआ “1000 डॉक्टर मिशन” का।
यह कोई सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक ऐसे भारतीय उद्योगपति का सपना है जिसने तय किया कि आर्थिक तंगी किसी बच्चे के डॉक्टर बनने के रास्ते में दीवार नहीं बनेगी।
50 सपने चुने गए…
मिशन के पहले चरण में 50 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन किया गया। उन्हें NEET की प्रतियोगी परीक्षा की व्यवस्थित कोचिंग दिलाई गई। यह केवल पढ़ाई नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास जगाने का अभियान था।
आज उस मेहनत का पहला परिणाम सामने है।
25 विद्यार्थियों ने NEET में सफलता प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि यदि अवसर मिले तो प्रतिभा किसी भी परिस्थिति को पराजित कर सकती है।
इन सफल विद्यार्थियों के नाम हैं—
- सदाकत अब्बास — 578 अंक
- फ़ौज़ान ख़ान — 556 अंक
- शाज़ेब अब्बास — 555 अंक
- आलिया बी — 551 अंक
- शम्सुद्दुहा — 543 अंक
- इकरा सुम्बुल — 540 अंक
- इबाद — 525 अंक
- माधुरी सोनी — 525 अंक
- नशरा फ़ातिमा — 513 अंक
- मोहम्मद मन्नान — 510 अंक
- अमीना — 490 अंक
- अफ़रीन बानो — 490 अंक
- ज़ीनत — 488 अंक
- यासीन ज़हरा — 485 अंक
- शरद गुप्ता — 479 अंक
- हाशिर अली — 478 अंक
- मुस्कान — 469 अंक
- नमराह — 459 अंक
- रोज़ी — 459 अंक
- सबा रईस — 456 अंक
- विवेक कुमार — 455 अंक
- रोज़ी — 451 अंक
- संदीप तिवारी — 450 अंक
- मोहम्मद फैसल — 435 अंक
इनमें से लगभग 5 विद्यार्थी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पात्रता की मजबूत स्थिति में हैं, जबकि करीब 20 विद्यार्थियों के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों के द्वार खुल चुके हैं।
लेकिन कहानी यहीं समाप्त नहीं होती…
सच्चे समाजसेवी की पहचान सफलता का जश्न मनाने में नहीं, बल्कि पीछे रह गए लोगों का हाथ थामने में होती है।
इसलिए जिन विद्यार्थियों का चयन इस वर्ष मेडिकल कॉलेज में नहीं हो पाएगा, अम्बर फाउंडेशन उन्हें दोबारा NEET की कोचिंग उपलब्ध कराएगा। उन्हें फिर अवसर मिलेगा, क्योंकि इस मिशन में हार अंतिम नहीं, बल्कि अगली सफलता की तैयारी है।
यह केवल डॉक्टर नहीं, राष्ट्रनिर्माता तैयार करने का अभियान है
हर वह बच्चा जो सफेद कोट पहनेगा, किसी माँ की दुआ बनेगा, किसी पिता का गर्व बनेगा, किसी गाँव की उम्मीद बनेगा और किसी अजनबी की ज़िंदगी बचाएगा।
वफ़ा अब्बास ने केवल विद्यार्थियों को कोचिंग नहीं दिलाई, बल्कि यह संदेश दिया कि प्रतिभा का सम्मान आर्थिक स्थिति देखकर नहीं, उसके सपनों की ऊँचाई देखकर होना चाहिए।
यदि यह अभियान इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में “1000 डॉक्टर मिशन” केवल एक संख्या नहीं रहेगा, बल्कि भारत के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्थान का एक प्रेरणादायक आंदोलन बन जाएगा।
जब इतिहास लिखा जाएगा, तब शायद यह दर्ज होगा कि किसी उद्योगपति ने केवल उद्योग नहीं लगाए, बल्कि डॉक्टरों की ऐसी पीढ़ी तैयार की, जिसने हजारों नहीं, लाखों लोगों की ज़िंदगी बचाई।
वफ़ा अब्बास का यह मिशन वास्तव में राष्ट्रसेवा का वह दीप है, जिसकी रोशनी आने वाले वर्षों तक भारत के भविष्य को प्रकाशित करती रहेगी।




