तक़ी हसनैन
लखनऊ, 3 नवंबर 2026।
लखनऊ की शामों में एक खास बात होती है। यहां शाम ढलती है तो सिर्फ चिराग नहीं जलते, अल्फ़ाज़ भी रोशन होते हैं। यहां बात करने का सलीका भी एक विरासत है और किसी की बात सुनने का हुनर भी एक तहज़ीब। गंगा-जमुनी संस्कृति की इसी खूबसूरत रवायत को उस वक्त एक बार फिर महसूस किया गया, जब इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के 34वें स्थापना दिवस पर अदब, शायरी और कविता की एक शानदार महफिल सजी।
कहीं शेरों की गूंज थी, कहीं कविता की रवानी, कहीं इल्म की बातें थीं तो कहीं बीते 34 वर्षों की मेहनत और कामयाबी का जिक्र। तहबीब ग्लोबल के सहयोग से आयोजित इस अखिल भारतीय मुशायरे और कवि सम्मेलन में मुल्क के नामचीन शायरों, कवियों, शिक्षाविदों और मेहमानों ने शिरकत की। यह महज एक सालगिरह का जश्न नहीं था, बल्कि लखनऊ की उस अदबी पहचान का खूबसूरत इजहार भी था, जहां मजहब और जुबान की सरहदों से ऊपर उठकर मोहब्बत, इंसानियत और इल्म को अहमियत दी जाती है।
न्यायमूर्ति सैयद क़मर हसन रिज़वी ने की प्रो. एस.डब्ल्यू. अख्तर की दूरअंदेशी की तारीफ
कार्यक्रम की सदारत इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के माननीय न्यायमूर्ति सैयद क़मर हसन रिज़वी ने की। उन्होंने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की बुनियाद रखने और उसे एक मुकम्मल शैक्षणिक संस्था के रूप में आगे बढ़ाने में संस्थापक प्रो. एस.डब्ल्यू. अख्तर की दूरअंदेशी, लगन और लगातार की गई मेहनत की सराहना की।
उन्होंने कहा कि किसी भी तालीमी इदारे की असल कामयाबी सिर्फ उसकी इमारतों और सुविधाओं से नहीं, बल्कि उन जिंदगियों से पहचानी जाती है, जिन्हें वह बेहतर मुस्तकबिल की राह दिखाता है। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी ने शिक्षा और समाज के क्षेत्र में अपनी एक अहम पहचान बनाई है।
अच्छी तालीम ही बेहतर समाज की बुनियाद : न्यायमूर्ति ज़फ़ीर अहमद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के माननीय न्यायमूर्ति ज़फ़ीर अहमद ने यूनिवर्सिटी की 34 साल की तरक्की और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में उसके योगदान की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि अच्छी और मयारी तालीम नौजवानों को सिर्फ नौकरी और पेशेवर कामयाबी के काबिल नहीं बनाती, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार इंसान और समाज के लिए उपयोगी नागरिक भी बनाती है। शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि सोच को बेहतर बनाना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना भी है।
34 साल का सफर, इल्म और इंसानियत का पैगाम : प्रो. एस.डब्ल्यू. अख्तर
यूनिवर्सिटी के चांसलर और संस्थापक प्रो. एस.डब्ल्यू. अख्तर ने 34वें स्थापना दिवस पर पूरे विश्वविद्यालय परिवार को मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का सफर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रिसर्च और विद्यार्थियों की मुकम्मल तरबियत के उसूलों पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूनिवर्सिटी का मकसद ऐसे नौजवान तैयार करना है, जिनके पास इल्म भी हो, हुनर भी हो और समाज के लिए कुछ बेहतर करने का जज्बा भी। ऐसे नौजवान ही आने वाले वक्त में मुल्क की तरक्की और खुशहाली में अपना किरदार अदा कर सकते हैं।
नामचीन शख्सियतों की मौजूदगी ने बढ़ाई महफिल की रौनक
इस यादगार मौके पर यूनिवर्सिटी की सह-संस्थापक श्रीमती अज़रा वसीम अख्तर, प्रो-चांसलर डॉ. सैयद नदीम अख्तर, अतिरिक्त प्रो-चांसलर डॉ. निदा फातिमा, सैयद फ़ैज़ान अख्तर और अदनान अख्तर, कुलपति प्रो. फ़ुरक़ान क़मर तथा कुलसचिव प्रो. मोहम्मद हारिस सिद्दीक़ी समेत कई अहम शख्सियतें मौजूद रहीं।
इस दौरान डॉ. सैयद नदीम अख्तर ने यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर को याद करते हुए तालीम और इदारे की तरक्की में उनके योगदान को खिराजे-अकीदत पेश किया। उन्होंने उनकी सेवाओं और छोड़ी गई विरासत को याद किया।
कार्यक्रम के आखिर में कुलपति प्रो. फ़ुरक़ान क़मर ने मेहमानों, शायरों, कवियों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया।
रिसर्च करने वालों की हौसला-अफजाई, शिक्षकों को मिले सम्मान
स्थापना दिवस के मौके पर यूनिवर्सिटी में रिसर्च के मैदान में बेहतर और काबिल-ए-तारीफ काम करने वाले शिक्षकों और शोधकर्ताओं को बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड से नवाजा गया।
वहीं, यूनिवर्सिटी की संस्थागत तरक्की और बेहतरीन इंतजाम में अहम भूमिका निभाने के लिए कुलसचिव प्रो. मोहम्मद हारिस सिद्दीक़ी को चांसलर अवॉर्ड फॉर इंस्टीट्यूशनल ग्रोथ एंड एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर यूनिवर्सिटी के न्यूजलेटर का भी विमोचन किया गया। इसमें संस्थान की तालीमी कामयाबियों, रिसर्च, नई गतिविधियों और विकास के सफर को तस्वीरों और जानकारियों के जरिए पेश किया गया है।
जब शेरों ने दिलों को छुआ और कविता ने सोच को आवाज दी
पूरे कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प और यादगार हिस्सा अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन रहा। मुल्क के अलग-अलग हिस्सों से आए मशहूर शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से महफिल में समां बांध दिया।
किसी के अल्फ़ाज़ में मोहब्बत का पैगाम था, किसी की कविता में जिंदगी के उतार-चढ़ाव की तस्वीर, तो किसी के शेर में समाज की सच्चाइयों का आईना दिखाई दिया। श्रोताओं ने पूरी दिलचस्पी के साथ शायरों और कवियों को सुना और उनकी प्रस्तुतियों का लुत्फ उठाया।
मुशायरे और कवि सम्मेलन ने यह एहसास कराया कि अदब सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं, बल्कि इंसान को इंसान से जोड़ने, समाज को आईना दिखाने और दिलों में मोहब्बत पैदा करने का एक खूबसूरत माध्यम भी है।
एक सालगिरह नहीं, लखनऊ की अदबी रवायत का जश्न
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का 34वां स्थापना दिवस कई मायनों में यादगार रहा। एक तरफ इल्म, तालीम और रिसर्च की कामयाबियों का जिक्र हुआ, तो दूसरी तरफ शायरी और कविता के जरिए मुल्क की साझा सांस्कृतिक विरासत को सलाम किया गया।
लखनऊ की पहचान हमेशा से उसके अदब, तहज़ीब, नफासत और मेहमाननवाजी से रही है। इस महफिल में भी वही रंग नजर आया। यहां इल्म की रोशनी थी, अल्फ़ाज़ की मिठास थी और एक-दूसरे के लिए इज्जत और मोहब्बत का पैगाम था।
यूं इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की 34वीं सालगिरह की यह शाम सिर्फ एक समारोह बनकर नहीं रह गई, बल्कि अपने पीछे ऐसी यादें छोड़ गई, जिनमें तालीम की रोशनी भी थी और अदब की खुशबू भी।




