तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
तेहरान/वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026।
दुनिया एक बार फिर ऐसे भू-राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है, जिसका असर केवल मिसाइलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह सकता। अमेरिका की ओर से ईरान पर दोबारा हमले की चेतावनी, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे और इंटरनेट के समुद्र के नीचे बिछे केबलों को निशाना बनाए जाने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इसी तनावपूर्ण माहौल में ईरानी संसद के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ का भारत दौरा रद्द होने से कूटनीतिक हलकों में भी सवाल उठने लगे हैं।
इंटरनेट के वैश्विक नेटवर्क पर मंडराता खतरा
रॉयटर्स की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से नए सैन्य हमले होने की स्थिति में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के समुद्र के नीचे बिछे संचार केबलों को निशाना बनाने की योजनाएं तैयार की हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मरम्मत के काम में बाधा डालकर इंटरनेट सेवाओं में लंबे समय तक व्यवधान पैदा किया जा सकता है।
ये केबल अंतरराष्ट्रीय डिजिटल संचार, वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स और क्लाउड सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता वैश्विक क्षमता का एक प्रतिशत से भी कम बताई गई है। इसलिए संभावित प्रभाव की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने केबल क्षतिग्रस्त होते हैं और वैकल्पिक नेटवर्क कितने प्रभावी रहते हैं।
यह अभी संभावित सैन्य कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट है, इंटरनेट के वैश्विक नेटवर्क पर हमले की पुष्टि नहीं।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कूटनीतिक समझौता नहीं होने पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका को आग से न खेलने की चेतावनी दी है। इस बयानबाजी ने पहले से तनावपूर्ण संबंधों में और अनिश्चितता पैदा कर दी है।
यदि संघर्ष दोबारा तेज होता है, तो उसके प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री परिवहन, क्षेत्रीय सुरक्षा और डिजिटल संचार तक पहुंच सकते हैं। लेकिन अभी किसी नए अमेरिकी हमले की निश्चित तारीख या अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी निगाहें
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य खतरों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। फाइनेंशियल टाइम्स की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों से संबंधित खुफिया चिंताओं, रियाद की ओर आने वाली मिसाइल को सऊदी वायु रक्षा द्वारा रोकने और क्षेत्र में अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा संबंधी कदमों का उल्लेख किया गया है।
इस माहौल में ऊर्जा प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, समुद्री मार्गों और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है।
ऐन वक्त पर क़ालिबाफ़ का भारत दौरा रद्द
इसी बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ ने 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में शामिल होने का कार्यक्रम रद्द कर दिया है।
ईरानी दूतावास ने 24 अक्टूबर को जारी बयान में इसकी वजह कुछ “अप्रत्याशित परिस्थितियों” को बताया। हालांकि, दौरा रद्द होने को अमेरिकी धमकियों, इंटरनेट केबलों या सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में हिस्सा लेगा और दूतावास ने भारत सरकार के आतिथ्य के लिए आभार भी जताया है।
दुनिया के सामने बड़ा सवाल
पश्चिम एशिया का संकट अब केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और इंटरनेट जैसी डिजिटल जीवनरेखाएं भी संभावित जोखिमों के दायरे में आ रही हैं।
यदि सैन्य टकराव बढ़ता है और समुद्र के नीचे बिछे संचार केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो क्षेत्रीय इंटरनेट सेवाओं, वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अब दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदमों पर हैं—क्या कूटनीति तनाव को कम करेगी या पश्चिम एशिया का संकट एक नए मोड़ पर पहुंचेगा?
स्रोत: Reuters, The Economic Times, Outlook India और Financial Times की 23–24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें।




