शैतान की पूजा से जुड़े कथित ठिकाने और धार्मिक स्थल की जमीन पर कब्जे के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग, कार्रवाई नहीं हुई तो हजरतगंज से आंदोलन शुरू करने का ऐलान
लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026 | तहलका टुडे ब्यूरो/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव
राजधानी लखनऊ के नरही स्थित ऐतिहासिक करबला मोतमदुद्दौला आगा मीर की जमीन पर कथित अवैध कब्जे, निर्माण की कोशिश और हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथॉरिटी आफताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद नकवी करबला पहुंचे। उन्होंने मौके का जायजा लिया और पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उचित कार्रवाई नहीं की तो विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर हजरतगंज से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। उनके इस बयान के बाद करबला की जमीन, पेड़ों की कटाई और संबंधित अधिकारियों की कथित भूमिका को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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पुलिस चौकी और वन विभाग की मौजूदगी में पेड़ों की कटाई कैसे हुई?
मौके पर मीडिया से बातचीत के दौरान मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया कि जब करबला के मुख्य द्वार के पास पुलिस चौकी मौजूद है और वन विभाग का कार्यालय भी आसपास है, तो आखिर हरे-भरे पेड़ों को काटने की नौबत कैसे आ गई?
उन्होंने कहा कि करबला परिसर में नीम और पीपल के पेड़ थे, जिन्हें काटे जाने की शिकायत सामने आई है। मौलाना के मुताबिक, पेड़ों की कटाई का कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था। इनमें हिंदू समुदाय के लोग भी शामिल थे। आरोप है कि विरोध करने वालों को बताया गया कि अधिकारियों की ओर से पेड़ काटने की अनुमति दी गई है।
मौलाना ने सवाल किया कि यदि वास्तव में पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति दी गई थी तो वह किस अधिकारी ने और किन परिस्थितियों में दी? क्या इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था? उन्होंने मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की कि पेड़ों की कटाई के पीछे किसकी भूमिका थी और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई है।
हालांकि, पेड़ों की कटाई की अनुमति, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित विभागों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।
धार्मिक स्थल की जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने आशंका जताई कि हरे-भरे पेड़ों को काटने और जमीन पर निर्माण की कोशिश का संबंध करबला की जमीन पर कथित अवैध कब्जे से हो सकता है। उन्होंने मांग की कि केवल पेड़ों की कटाई तक जांच सीमित न रखी जाए, बल्कि जमीन के स्वामित्व, अभिलेखों, निर्माण की प्रकृति और मौके पर हुई गतिविधियों की भी जांच की जाए।
उन्होंने कहा कि करबला एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और इसकी जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित संस्थाओं तथा प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी व्यक्ति या समूह ने अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने या निर्माण करने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
मौलाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उनका कहना था कि राजधानी में इस प्रकार की घटना सामने आना गंभीर विषय है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक स्थलों की जमीन तथा सार्वजनिक पर्यावरण से जुड़े नियमों का उल्लंघन न हो।
‘फ्री मेसन’ को लेकर भी लगाया आरोप, जांच की मांग
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने अपने बयान में करबला की जमीन पर कथित कब्जे के साथ-साथ ‘फ्री मेसन’ से जुड़े एक ठिकाने को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि रौजे की जमीन पर फ्री मेसन का कब्जा है और वहां शैतान की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
यह आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित जमीन के राजस्व एवं वक्फ अभिलेखों, वास्तविक कब्जे की स्थिति और कथित गतिविधियों के प्रमाणों की जांच आवश्यक है। फिलहाल उपलब्ध बयान के आधार पर इन दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित पक्ष का जवाब और प्रशासन की जांच इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
करबला का मुख्य द्वार बंद मिला, पुलिस को सौंपा ज्ञापन
शुक्रवार को निरीक्षण के दौरान मौलाना कल्बे जवाद नकवी जब नरही स्थित करबला मोतमदुद्दौला पहुंचे तो उनके अनुसार परिसर के मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ था। उनके साथ नायब इमाम-ए-जुमा मौलाना रजा हैदर जैदी और अन्य लोग भी मौजूद थे।
मौके पर पुलिसकर्मी भी तैनात थे। मौलाना ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर कथित अवैध कब्जे, पेड़ों की कटाई और निर्माण की कोशिश से संबंधित शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान करनी चाहिए और कानून के अनुसार मुकदमा दर्ज करने पर निर्णय लेना चाहिए।
मौलाना ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उनके मुताबिक, यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल की सुरक्षा और कानून के पालन से जुड़ा विषय है।
वक्फ बोर्ड की भूमिका पर उठाए सवाल
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करबला मोतमदुद्दौला के मामले में वक्फ बोर्ड की ओर से समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने इसकी तुलना करबला अब्बास बाग से करते हुए कहा कि वहां की तरह यहां भी बोर्ड मूकदर्शक बना रहा।
मौलाना के अनुसार, करबला मोतमदुद्दौला वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और इसका वक्फ नंबर 1971 बताया गया है। उन्होंने कहा कि पंजीकृत वक्फ संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना बोर्ड की जिम्मेदारी है और यदि संपत्ति पर अवैध कब्जे या निर्माण की कोशिश हुई है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
इस मामले में वक्फ बोर्ड की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी जरूरी है, ताकि संपत्ति के अभिलेखों, प्रबंधन की जिम्मेदारी और अब तक की गई कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
शैतान की पूजा के आरोप से बढ़ा विवाद, तथ्यों की जांच जरूरी
करबला मोतमदुद्दौला से जुड़े इस विवाद में पेड़ों की कटाई और कथित अवैध कब्जे के साथ शैतान की पूजा से संबंधित आरोप भी सामने आए हैं। इससे मामले ने धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता का पहलू भी ग्रहण कर लिया है।
ऐसे गंभीर आरोपों की जांच भावनाओं या दावों के बजाय दस्तावेजों, प्रत्यक्ष साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के आधार पर की जानी चाहिए। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि जमीन पर किसका वैधानिक अधिकार है, पेड़ों की कटाई किसने की, क्या कोई अनुमति जारी की गई थी और निर्माण से संबंधित गतिविधियों की कानूनी स्थिति क्या है।
साथ ही, सभी समुदायों के लोगों की धार्मिक भावनाओं और कानून के शासन का सम्मान करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना जरूरी है।
अब प्रशासन के सामने तीन बड़े सवाल
करबला मोतमदुद्दौला प्रकरण में फिलहाल तीन सवाल प्रमुख हैं। पहला, हरे-भरे पेड़ों की कटाई किसने की और क्या इसके लिए वैध अनुमति ली गई थी? दूसरा, क्या करबला की जमीन पर अवैध कब्जे या निर्माण की कोशिश हुई है और संबंधित अभिलेख क्या बताते हैं? तीसरा, वक्फ बोर्ड तथा स्थानीय प्रशासन को इस मामले की जानकारी कब मिली और अब तक क्या कार्रवाई की गई?
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है और मांग पूरी न होने पर हजरतगंज से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। अब निगाहें पुलिस, वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
तहलका टुडे की नजर इस मामले पर बनी रहेगी। संबंधित विभागों और आरोपों से जुड़े पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




