🇮🇳🤝🇷🇺 पुतिन, मेरे देश में आपका स्वागत है!
नई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का आगमन, भारत-रूस दोस्ती के नए अध्याय की उम्मीद
नई दिल्ली में एक बार फिर भारत और रूस की पुरानी दोस्ती की गर्माहट महसूस की जा रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन ने देश-दुनिया का ध्यान राजधानी की ओर खींच लिया है। भारत की धरती पर पुतिन का स्वागत केवल एक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा नहीं, बल्कि दशकों पुराने भारत-रूस के भरोसेमंद रिश्ते की एक महत्वपूर्ण तस्वीर है।
राष्ट्रपति पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत सरकार के अनुसार, 2026 की भारतीय अध्यक्षता का केंद्रीय विषय “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” है।
पुतिन की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात होगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, तकनीक, संपर्क और लोगों के बीच रिश्तों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है।
कुछ ही दिन पहले, 31 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बिश्केक में मुलाकात हुई थी। भारत सरकार के मुताबिक दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। दोनों नेताओं ने भारत-रूस की “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
यही वजह है कि पुतिन का नई दिल्ली पहुंचना भारत-रूस संबंधों के लिहाज से खास महत्व रखता है। दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों, ऊर्जा संकट और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से गुजर रही है। ऐसे दौर में भारत और रूस के बीच संवाद की निरंतरता अपने आप में एक महत्वपूर्ण संदेश है।
BRICS भी अब केवल कुछ देशों का आर्थिक मंच नहीं रह गया है। भारत सरकार के अनुसार, इसका विस्तार चार महाद्वीपों तक हो चुका है और यह विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार तथा ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। मौजूदा BRICS में 11 देश शामिल हैं, जो मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत की कोशिश है कि BRICS को टकराव की राजनीति के बजाय सहयोग, विकास और समाधान के मंच के रूप में आगे बढ़ाया जाए। ऐसे में पुतिन की मौजूदगी इस शिखर सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बनाती है।
भारत और रूस के रिश्तों की खासियत यह रही है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद बना रहा है। ऊर्जा से लेकर अंतरिक्ष तक और रक्षा से लेकर व्यापार तक दोनों देशों ने लंबे समय में व्यापक सहयोग विकसित किया है। भारत सरकार भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत और लचीला बताती रही है।
नई दिल्ली की धरती पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत है।
यह यात्रा केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उस दोस्ती का प्रतीक है जिसे भारत और रूस ने वर्षों के विश्वास, सहयोग और कठिन दौर में एक-दूसरे के साथ खड़े रहकर मजबूत किया है।
भारत-रूस दोस्ती जिंदाबाद।
भारत-रूस साझेदारी और मजबूत हो। 🇮🇳❤️🇷🇺
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