तहलका टुडे टीम
लखनऊ, किसी नए संस्थान की शुरुआत जब उसके मकसद और पहचान को सामने रखकर की जाए तो उसका संदेश भी खास बन जाता है। लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़ा सब्तैनाबाद में सैयदुल उलमा मीडिया सेंटर (एसएमसी) का उद्घाटन कुछ इसी अंदाज में हुआ। यहां न रिबन काटने की रस्म हुई और न शमा रोशन की गई। बल्कि सैयदुल उलमा की इल्मी विरासत को सलाम करते हुए एक किताब के विमोचन के साथ नए मीडिया सेंटर का आगाज किया गया। उद्घाटन आफताब-ए-शरीअत मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने किया। 
इस मौके पर मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन की शख्सियत ऐसी है, जिनसे हर मजहब और मिल्लत के लोग अकीदत रखते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इमाम हुसैन की शहादत के असल मकसद और उनके पैगाम को तमाम मजहबों और समुदायों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि हमारा काम कोशिश करना है, नतीजे का मालिक अल्लाह है।
सैयदुल उलमा सैयद अली नकी नकवी की इल्मी शख्सियत का जिक्र करते हुए बताया गया कि उन्होंने 1988 में अपनी वफात तक 250 से ज्यादा किताबें लिखीं। उनकी तहरीरें उर्दू, अरबी, फारसी, अंग्रेजी और हिंदी समेत कई जुबानों में प्रकाशित हुईं। मीडिया सेंटर का मकसद इसी बेशकीमती इल्मी और अदबी विरासत को आज के डिजिटल दौर में नई नस्ल तक पहुंचाना है।
यादगारे हुसैनी के जनरल सेक्रेटरी सैयद अजीज हैदर ने कहा कि हमने सोचा कि सैयदुल उलमा मीडिया सेंटर का उद्घाटन रिबन काटकर या शमा रोशन करके नहीं, बल्कि किताब के विमोचन से किया जाए, क्योंकि सैयदुल उलमा की असल पहचान उनका इल्म, उनकी किताबें और उनकी तकरीरें हैं। उन्होंने बताया कि सेंटर के जरिए मीडिया कोर्स, पत्रकारों की फलाह-बहबूद और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके लिए सक्रिय मीडिया संगठनों से भी बातचीत चल रही है।
मौलाना रजा हैदर ने कहा कि 1939 में यादगारे हुसैनी की बुनियाद रखने का एक अहम मकसद इमाम हुसैन का पैगाम गैर-मुस्लिमों तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि पैगामे अहलेबैत को देश के हर नागरिक तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
मौलाना असतफा रजा ने सैयदुल उलमा के अदबी और इल्मी मकाम पर रोशनी डालते हुए कहा कि जोश मलीहाबादी और नियाज फतेहपुरी जैसी बड़ी साहित्यिक हस्तियां भी उनसे मुतास्सिर थीं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उन्होंने हमेशा तहजीब और अदब का दामन थामे रखा।
चचा अमीर हैदर ने अपने अंदाज में कहा कि झूठ का साथ देने से बेहतर है कि इंसान सच के रास्ते पर चलते हुए हार कुबूल कर ले।
मौलाना साबिर अली उमरानी ने नौजवानों से सैयदुल उलमा की किताबें पढ़ने और उनकी तकरीरें सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सैयदुल उलमा की खासियत थी कि उनकी तकरीर तहरीर बन जाती थी और उनकी तहरीर तकरीर का असर रखती थी। आज मीडिया के जरिए उनके इल्मी खजाने को आम लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
सेंटर के कन्वीनर डॉ. सैयद अमानत हुसैन नकवी ने यादगारे हुसैनी की 1939 से अब तक की अहम खिदमात और कारनामों पर अपना मकाला पेश किया।
इस अवसर पर ‘आयतुल्लाह शेख मोहम्मद अली अल-उमरी : सीरत व किरदार के आईने में’ किताब का विमोचन भी किया गया। इसका उर्दू तर्जुमा मौलाना साबिर अली उमरानी ने किया है।
कार्यक्रम में मौलाना रजा हैदर, मौलाना असतफा रजा, चचा अमीर हैदर, आदिल फराज, रोशन तकी, नदीम आगा, अमानत हुसैन नकवी, माहेरुख मिर्जा, अमान अब्बास सहित लखनऊ की अनेक प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
सैयदुल उलमा मीडिया सेंटर की शुरुआत ने यह संदेश दिया कि किताबों में महफूज इल्म को आधुनिक मीडिया की ताकत से नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनकी विरासत को जिंदा रखने का सबसे बेहतर रास्ता है।




