TahalkaToday Team /Sultan Mehdi
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Skill India और युवाओं को हुनर देकर रोजगार से जोड़ने के अभियान के तहत उत्तर प्रदेश सरकार का उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख कौशल उपलब्ध कराने के लिए संचालित किया जा रहा है। मिशन की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे युवाओं की employability बढ़ाने और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाला राज्य स्तरीय मिशन बताती है।
लेकिन अब इसी सरकारी मिशन की जमीनी व्यवस्था में बड़ा टकराव सामने आ गया है।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण केंद्र संचालित करने वाले Training Partners (TPs) ने प्रशासनिक उदासीनता, भुगतान में कथित अत्यधिक विलंब और तकनीकी विसंगतियों को लेकर 24 अगस्त 2026, सोमवार से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और प्रदेशव्यापी तालाबंदी का ऐलान किया है।
उत्तर प्रदेश कौशल प्रशिक्षण प्रदाता एसोसिएशन की ओर से जारी 22 अगस्त के पत्र में कहा गया है कि जब तक उनकी 10 सूत्रीय बुनियादी मांगों पर समयबद्ध लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक प्रदेशभर के प्रशिक्षण केंद्र और संबंधित कार्य बंद रहेंगे।
यानी अब सवाल केवल Training Partners और विभाग के बीच विवाद का नहीं है—सवाल उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य और सरकार की महत्वाकांक्षी कौशल विकास योजना की विश्वसनीयता का है।
सरकारी योजना, लेकिन जमीनी व्यवस्था में हड़कंप!
UPSDM कोई सामान्य निजी प्रशिक्षण योजना नहीं है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक मिशन सरकार और निजी Training Providers की साझेदारी से कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगारोन्मुख कार्यक्रम लागू करता है। Training Partners को प्रशिक्षण, उम्मीदवारों की मोबिलाइजेशन और प्लेसमेंट जैसी जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
ऐसे में यदि वही Training Partners अब प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार और तालाबंदी का ऐलान कर रहे हैं तो शासन के लिए इसे गंभीर चेतावनी के रूप में लेना होगा।
क्योंकि केंद्रों पर ताला लगा तो उसका असर फाइलों पर नहीं, सीधे प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं पर पड़ेगा।
10 मांगें बनीं टकराव की वजह
Training Partners ने अपने पत्र में 10 बुनियादी मांगें रखी हैं। इनमें भुगतान, मूल्यांकन, Attendance, बैच Extension, BG प्रक्रिया और डिजिटल पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
पहली मांग—लिखित आश्वासन, वरना केंद्र बंद
एसोसिएशन का कहना है कि उसकी मांगों पर समयबद्ध लिखित आश्वासन मिलने तक सभी प्रशिक्षण केंद्र और कार्य बंद रहेंगे।
यानी अब मौखिक आश्वासन से बात बनने वाली नहीं है।
दूसरी मांग—5 सितंबर तक भुगतान
सभी सत्यापित और Advance SSDF बैचों का भुगतान 5 सितंबर तक किए जाने की मांग है।
Training Partners का आरोप है कि भुगतान में देरी से केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा है।
तीसरी मांग—30 सितंबर तक मूल्यांकन
सभी बैचों की मूल्यांकन प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी करने की मांग की गई है, ताकि प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं की आगे की प्रक्रिया लटकी न रहे।
चौथी मांग—25 प्रतिशत एडवांस भुगतान
600 घंटे या उससे कम अवधि वाले बैचों में 25 प्रतिशत एडवांस भुगतान तत्काल लागू करने की मांग की गई है।
पत्र में बैच की उपस्थिति और बिल जमा होने के बाद 7 कार्य दिवस में भुगतान की मांग भी उठाई गई है।
पांचवीं मांग—DEBAR Training Partners की बहाली
एसोसिएशन ने DEBAR किए गए Training Partners को 25 अगस्त तक बहाल करने की मांग की है।
छठी मांग—Attendance में राहत
Training Partners ने Attendance व्यवस्था में Flexibility की मांग करते हुए कहा है कि बैच Hours के दौरान पंचिंग के लिए पर्याप्त समय मिले और Face तथा Retinal Attendance की अनुमति दी जाए।
सातवीं मांग—Batch Extension का नियम बदले
एसोसिएशन का कहना है कि 70 प्रतिशत उपस्थिति के बाद यदि बैच में कोई एक कैंडिडेट रह जाता है तो Extension की समस्या पैदा होती है।
Training Partners ने इसे Flexible करने तथा MSDE SOP के आधार पर न्यूनतम 50 प्रतिशत उपस्थिति वाले 10 कैंडिडेट तक भी 40 प्रतिशत तक Extension देने की मांग रखी है।
आठवीं मांग—DD के बजाय BG
Training Partners ने DD के स्थान पर BG प्रक्रिया 10 सितंबर तक पूरी करने की मांग की है।
साथ ही पत्र में Startup से जमा कराई गई लगभग 8 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि वापस करने की मांग भी की गई है।
नौवीं मांग—Payment सिस्टम में पारदर्शिता
यह सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक है।
Training Partners का कहना है कि DSC लगाने के बाद Payment Status केवल “Under Process” दिखाई देता है। उनकी मांग है कि TP Login पर यह साफ दिखाई दे कि भुगतान किस स्तर पर और किस अधिकारी के पास लंबित है।
यह मांग सीधे प्रशासनिक जवाबदेही और डिजिटल पारदर्शिता से जुड़ी है।
दसवीं मांग—Roll Back Batch का भुगतान
एसोसिएशन ने मांग की है कि Roll Back Batch को पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाए और निर्धारित समयसीमा में उनका भुगतान शुरू किया जाए।
सोमवार को UPSDM मुख्यालय घेरने का ऐलान
Training Partners ने आंदोलन को कागजी विरोध तक सीमित नहीं रखा है।
पत्र में सोमवार को UPSDM मुख्यालय, अलीगंज ITI, लखनऊ पर 10 सूत्रीय मांगों को लेकर घेराव की घोषणा की गई है।
अब 24 अगस्त को राजधानी लखनऊ में Training Partners के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल—युवाओं का क्या होगा?
सरकार का लक्ष्य है कि युवा प्रशिक्षण प्राप्त करें, कौशल हासिल करें और रोजगार या स्वरोजगार की ओर बढ़ें। UPSDM की आधिकारिक व्यवस्था में Registration → Training → Assessment → Placement का पूरा ढांचा बताया गया है।
लेकिन यदि Training Partners का आंदोलन लंबा खिंचता है तो इस पूरी श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।
Training रुका तो Assessment प्रभावित होगा, Assessment रुका तो आगे की प्रक्रिया प्रभावित होगी और अंततः युवा ही सबसे ज्यादा परेशान होगा।
यही वजह है कि इस विवाद को तत्काल सुलझाना जरूरी है।
योगी सरकार की योजनाओं की जमीन पर परीक्षा
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कौशल विकास जैसी योजनाएं सीधे युवाओं और रोजगार से जुड़ी हैं।
सरकारी योजना की सफलता केवल बजट जारी करने या पोर्टल बनाने से नहीं होती। सफलता तब मानी जाती है जब प्रशिक्षण केंद्र चलें, प्रशिक्षक काम करें, युवाओं को प्रशिक्षण मिले, मूल्यांकन समय पर हो और रोजगार तक रास्ता पहुंचे।
UPSDM के आधिकारिक दस्तावेज भी Private Training Providers को प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपते हैं।
इसलिए Training Partners की शिकायतों पर तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा जरूरी दिखाई देती है।
“खाऊ-कमाऊ नीति” के आरोप—जांच जरूरी, फैसला तथ्यों से
Training Partners की ओर से व्यवस्था में कथित “खाऊ-कमाऊ नीति” जैसे गंभीर आरोपों की बात उठाई गई है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। लेकिन यदि ऐसे आरोप बड़े पैमाने पर उठ रहे हैं तो शासन को निष्पक्ष जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए।
अगर कहीं भ्रष्टाचार या अनुचित लाभ का मामला सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
और यदि आरोप बेबुनियाद हैं तो सरकार को भी स्पष्ट रूप से वास्तविक स्थिति जनता और Training Partners के सामने रखनी चाहिए।
आरोपों की अनदेखी करना भी समाधान नहीं है।
UPSDM के सामने सबसे बड़ा इम्तिहान
अब सवाल यह है कि 24 अगस्त से पहले क्या होगा?
क्या Training Partners को लिखित आश्वासन मिलेगा?
क्या लंबित भुगतान की समयसीमा घोषित होगी?
क्या DEBAR Training Partners के मामले में निर्णय होगा?
क्या Attendance और Batch Extension के पेच सुलझेंगे?
क्या BG और लगभग 8 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि के मुद्दे पर फैसला होगा?
क्या Payment Tracking को TP Login पर पारदर्शी बनाया जाएगा?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या 24 अगस्त को कौशल विकास केंद्रों के दरवाजे खुलेंगे या प्रदेशभर में लगेगा ताला?
यह टकराव जितना लंबा खिंचेगा, उतना ही नुकसान उत्तर प्रदेश के युवाओं और Skill Development Mission की विश्वसनीयता को हो सकता है।
अब गेंद योगी सरकार और UPSDM प्रशासन के पाले में है।
Training Partners ने अपना रुख साफ कर दिया है—




