तहलका टुडे टीम
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष, शायर ,विख्यात आलोचक, शोधकर्ता, शिक्षाविद् और साहित्यकार प्रोफ़ेसर डॉ. अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी को सीनियर प्रोफ़ेसर के प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किए जाने से अकादमिक एवं साहित्यिक जगत में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है। उर्दू भाषा और साहित्य से जुड़े विद्वानों ने इसे न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि उर्दू जगत के लिए एक महत्वपूर्ण सम्मान बताया है।
अंबेडकर नगर जनपद के जलालपुर में 30 जून 1976 को जन्मे प्रोफ़ेसर डॉ. अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपनी असाधारण शैक्षणिक प्रतिभा के बल पर उर्दू साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई। वह 13 जुलाई 1999 से शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर और उर्दू विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
प्रोफ़ेसर नैय्यर उर्दू शायरी, तन्क़ीद (आलोचना), आधुनिक साहित्यिक विमर्श और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम माने जाते हैं। उनकी 30 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 75 से अधिक शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी लेखनी ने उर्दू आलोचना, साहित्यिक सिद्धांत और समकालीन साहित्यिक चिंतन को नई दिशा प्रदान की है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की बागडोर वर्ष 2016 से उनके नेतृत्व में है। उनके कार्यकाल में विभाग ने शैक्षणिक गतिविधियों, शोध परियोजनाओं, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों तथा साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से नई पहचान स्थापित की है। विश्वविद्यालय के इतिहास में उर्दू विभाग की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया जाता है।
प्रोफ़ेसर नैय्यर को उनके साहित्यिक और शैक्षणिक योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठित यश भारती सम्मान, भाषा सम्मान, इंटरनेशनल रिसाई अदब अवार्ड, उर्दू अंजुमन बर्लिन अवार्ड तथा अल्लामा इक़बाल इंटरनेशनल अवार्ड प्रमुख हैं।
देश-विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों, साहित्यिक मंचों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में उन्होंने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न देशों में उर्दू भाषा, साहित्य और शोध पर उनके व्याख्यानों को व्यापक सराहना मिली है। आकाशवाणी, दूरदर्शन तथा अन्य मीडिया मंचों पर भी उनकी विद्वत्तापूर्ण उपस्थिति रही है।
हाल के वर्षों में उन्होंने उर्दू भाषा और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। विभिन्न मंचों पर उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डिजिटल युग में उर्दू भाषा के संरक्षण, प्रचार और शोध के लिए आधुनिक तकनीकी संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर तहलका टुडे के संपादक सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा ने कहा कि प्रोफ़ेसर डॉ. अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी की नियुक्ति उर्दू भाषा और साहित्य की सेवा में लगे सभी लोगों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. नैय्यर की विद्वत्ता, शोध-दृष्टि और साहित्यिक नेतृत्व ने नई पीढ़ी के शोधार्थियों और विद्यार्थियों को एक नई दिशा प्रदान की है।
उन्होंने आगे कहा कि सीनियर प्रोफ़ेसर के पद पर उनका चयन इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, ज्ञान और निरंतर परिश्रम का सम्मान आज भी समाज और शिक्षण संस्थानों में होता है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
अंत में देशभर के साहित्यकारों, शिक्षकों, शोधार्थियों और उर्दू प्रेमियों ने प्रोफ़ेसर डॉ. अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुबारकबाद पेश करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की है।




