🔥 राम के भारत को चाहिए अब सीधी टक्कर — रावण की आर्थिक गुलामी से आज़ादी की हुंकार
🇮🇳 ईरान से व्यापार करने पर अमेरिका की बौखलाहट, भारतीय कंपनियों पर गिरी पाबंदियों की गाज
✊ भारत बोलेगा अब: हम संप्रभु हैं, तुम्हारे गुलाम नहीं!
✍️ विशेष लेख – तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क/संतोष शुक्ला
❝चौखट पे गुलामी का साया, बंदिशों की जंजीरों में जकड़ता भारत…
अगर ज़िंदा रहना है सुकून से, तो रावण का मुकाबला राम के भारत को करना होगा❞
यह केवल कविता नहीं — आज के वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य का कड़वा सच है।
भारत, जो अब अपनी विदेश नीति को आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जाना चाहता है, उसे एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगी इज़राइल के आर्थिक और कूटनीतिक शिकंजे में जकड़ने की कोशिश की जा रही है।
🛢️ भारत-ईरान संबंधों की अहमियत
ईरान भारत का न केवल पुराना व्यापारिक साझेदार है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक कनेक्टिविटी (जैसे चाबहार बंदरगाह) और सांस्कृतिक निकटता का भी एक मजबूत स्रोत है।
2010 से पहले तक भारत, ईरान से प्रतिदिन 4 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात करता था। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद यह संख्या शून्य तक पहुँच गई — लेकिन व्यापारिक इच्छाशक्ति दोनों देशों में अब भी ज़िंदा है।
🧨 30 जुलाई 2025: अमेरिका की आक्रामक चाल
अमेरिका के विदेश विभाग ने 30 जुलाई को भारत की छह प्रमुख कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए। आरोप है कि इन कंपनियों ने जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की ‘संवेदनशील मात्रा में खरीद’ की।
🔒 प्रतिबंधित कंपनियों के नाम और व्यापार राशि:
कंपनी का नाम | ईरानी व्यापार का अनुमानित मूल्य |
---|---|
Alchemical Solutions Pvt. Ltd. | $84 मिलियन (₹700+ करोड़) |
Global Industrial Chemicals Ltd. | $51 मिलियन |
Jupiter Dye Chem Pvt. Ltd. | $49 मिलियन |
Ramniklal S. Gosalia & Co. | $22 मिलियन |
Persistent Petrochem Pvt. Ltd. | $14 मिलियन |
Kanchan Polymers | $1.3 मिलियन |
इन कंपनियों की अमेरिका में स्थित सभी संपत्तियां फ्रीज़ कर दी गई हैं और अमेरिकी कंपनियों को इनके साथ कोई व्यापार करने की अनुमति नहीं है।
🛑 प्रश्न उठता है — भारत को ईरान से व्यापार करने से कौन रोक सकता है?
जब अमेरिका खुद:
- सऊदी अरब से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल खरीदता है,
- इज़राइल की हर सैन्य कार्रवाई को खुला समर्थन देता है,
- यूएई, तुर्की, और कतर से अरबों डॉलर का व्यापार करता है,
तो क्या भारत को यह तय करने का अधिकार नहीं कि उसे किस देश से ऊर्जा लेनी है?
यह प्रतिबंध सीधे-सीधे भारत की राजनीतिक और आर्थिक संप्रभुता पर हमला है।
🇮🇱🇺🇸 अमेरिका-इज़राइल की दोहरी नीति का पर्दाफाश
अमेरिका और इज़राइल की विदेश नीति अब एक स्पष्ट पैटर्न दिखा रही है:
- जो देश उनकी नीतियों से असहमत हो, उस पर ‘संभावित खतरा’ का टैग लगाओ।
- उस देश के व्यापारिक सहयोगियों पर दबाव डालो।
- मीडिया के ज़रिए उसके खिलाफ माहौल बनाओ।
- और अंततः उसे झुकाने की कोशिश करो।
ईरान ने यह दबाव कभी स्वीकार नहीं किया — और अब भारत से उसकी नजदीकी अमेरिका को चुभ रही है।
🪔 भारत को चाहिए अब स्पष्ट और स्वाभिमानी विदेश नीति
भारत अब 1991 का नवउदारवादी देश नहीं है।
- हम 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर बढ़ रहे हैं,
- हम चंद्रयान और गगनयान की तकनीकी शक्ति हैं,
- हम G20 अध्यक्ष रह चुके हैं,
- और अब वक्त है कि हम अपनी भू-राजनीतिक रीढ़ भी सीधी रखें।
🎯 भारत को चाहिए ये कदम:
- सरकारी स्तर पर अमेरिका से विरोध दर्ज कराया जाए।
- प्रतिबंधित कंपनियों को राजनयिक और कानूनी सुरक्षा दी जाए।
- ईरान के साथ व्यापारिक संबंध और प्रगाढ़ किए जाएं – एक रणनीतिक सन्देश के रूप में।
- UN और BRICS जैसे वैश्विक मंचों पर अमेरिकी आर्थिक तानाशाही को चुनौती दी जाए।
- मीडिया, बुद्धिजीवी और आम जनता एक सुर में बोले – “हम झुकेंगे नहीं!”
🗣️ भारत की जनता अब पूछ रही है:
“क्या अब भी हम अमेरिका के दबाव में अपने राष्ट्रहितों की बलि चढ़ाते रहेंगे?”
“क्या ईरान से व्यापार करना गुनाह है, जब खुद पश्चिमी देश उनके साथ ‘बैक डोर डील्स’ करते हैं?”
“क्या आत्मनिर्भर भारत की नींव दूसरों के इशारों पर हिल जाएगी?”
📢 अब जरूरी है प्रतिरोध की आवाज़
अगर हम आज नहीं बोले, तो कल बोलने का हक भी छिन जाएगा।
अब समय है—
🔥 झुकने का नहीं, उठने का।
🔥 डरने का नहीं, लड़ने का।
🔥 रावण की आर्थिक नीतियों से टकराने का।
✊ यह भारत 1947 से भी आगे है
“अब न तेल पर सौदा होगा,
न आत्मसम्मान की नीलामी होगी।
भारत अब दोस्ती निभाएगा,
और दबाव में नहीं आएगा।”
📌 #IndiaIranFriendship
📌 #StopUSSanctions
📌 #EconomicSovereignty
📌 #NoMoreImperialism
📌 #SayNoToEconomicBullying
📌 #NewIndiaNewPolicy
📣 इस लेख को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएं। आज कलम उठाइए, कल राष्ट्र उठेगा।
🖊️ तहलका टुडे | जनआवाज़ की ताक़त | संतोष शुक्ला