“ईडी की बड़ी कार्रवाई: लखनऊ और दिल्ली में रोहतास ग्रुप पर ₹487 करोड़ के रियल एस्टेट और औक़ाफ़ ज़मीन घोटाले में छापेमारी, 83 एफआईआर में खुला धोखाधड़ी का जाल”

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औक़ाफ़ की ज़मीन हड़पने वालों के लिए कड़ा सबक – देख लें रोहतास ग्रुप का अंजाम, हवाई महल ढहकर मिला मिट्टी में; सेव वक़्फ़ इंडिया ने अदा किया खुदा का शुक्र

तहलका टुडे टीम /हसनैन मुस्तफा 

लखनऊ, 14 अगस्त 2025 – जो लोग लालच, धोखाधड़ी और जालसाज़ी के दम पर गरीबों, यतीमों और औक़ाफ़ की ज़मीन पर कब्ज़ा करके महल बनाते हैं, उनके लिए आज की यह ख़बर एक चेतावनी है। कभी रियल एस्टेट की दुनिया में अपना सिक्का जमाने वाला रोहतास ग्रुप अब बर्बादी और बदनामी की मिसाल बन चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ताज़ा कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि हक़ मारकर बनाई गई इमारतें कितनी भी ऊंची हों, उनका अंजाम गिरकर मिट्टी में मिलना ही है।

ईडी के लखनऊ ज़ोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत 13 अगस्त 2025 को लखनऊ और दिल्ली में कुल 9 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एम/एस रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड और इसके प्रमोटरों – परेश रस्तोगी, पीयूष रस्तोगी, पंकज रस्तोगी और दीपक रस्तोगी – के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।

धोखाधड़ी की कहानी – सपनों के प्लॉट, लेकिन हकीकत में सिर्फ ठगी

ईडी की जांच 48 एफआईआर पर आधारित है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की थीं। आरोप है कि रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड ने दो बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट – ‘सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट’ और ‘रायबरेली रोड प्रोजेक्ट’ – लॉन्च किए। इन योजनाओं के तहत ग्राहकों को अलग-अलग आकार के प्लॉट/ज़मीन बुक करने का ऑफर दिया गया। वादा था कि बुकिंग के 30 महीने बाद या तो उन्हें प्लॉट का कब्ज़ा मिलेगा, या फिर बुकिंग राशि का 150% वापस किया जाएगा।

लेकिन न तो प्रोजेक्ट पूरे हुए, न प्लॉट मिले, और न ही पैसा लौटा। हज़ारों लोगों की मेहनत की कमाई डूब गई।

खुलासा – 83 एफआईआर और 487 करोड़ का घोटाला

ईडी की जांच में सामने आया कि अब तक रोहतास ग्रुप के खिलाफ कुल 83 एफआईआर दर्ज हैं। आरोप है कि कंपनी के प्रमोटरों ने निवेशकों को अच्छे मुनाफ़े और समय पर कब्ज़ा देने के झूठे सपने दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी की।

एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण) ने एम/एस रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और एम/एस एंडेस टाउन प्लानर प्रा. लि. के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू किया है। दिवाला पेशेवर के पास 2000 से अधिक खरीदारों और निवेशकों के दावे पहुंचे हैं, जिनकी कुल रकम ₹487 करोड़ है। ये दावे रोहतास ग्रुप की योजनाओं – रोहतास प्लुमेरिया, रोहतास सवाना और क्रिसेंट फार्म्स – से जुड़े हैं।

ईडी का बड़ा एक्शन – अहम दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत बरामद

छापेमारी के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनसे घोटाले के पूरे नेटवर्क और मनी ट्रेल का पता लगाया जाएगा। जांच फिलहाल जारी है।

सेव वक़्फ़ इंडिया मिशन का बयान – “खुदा का इंसाफ़ ज़िंदा है”

इस कार्रवाई पर सेव वक़्फ़ इंडिया मिशन ने राहत और शुक्र का इज़हार किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा –
“यह उन तमाम लोगों के लिए अल्लाह की तरफ से एक खुला सबक है, जो औक़ाफ़ की ज़मीन, गरीबों और यतीमों का हक़ मारकर अपनी दुनिया सजाते हैं। रोहतास ग्रुप का अंजाम देख लें – दौलत, शोहरत और रुतबे के बावजूद न तो हक़ मारने का खेल चला, न ही कानून का शिकंजा ढीला पड़ा। दुनिया में ही रुसवाई हो गई, आख़िरत में तो हिसाब और भी सख़्त होगा।”

सबक – हक़ मारने वालों का अंजाम हमेशा रुसवाई

रोहतास ग्रुप की बर्बादी सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी के लिए सबक है जो औक़ाफ़, गरीबों और बे-सहाराओं का हक़ हड़पने में लगे हैं।
कानून देर से सही, लेकिन चलता ज़रूर है – और जब चलता है तो ताज और तख़्त दोनों गिरा देता है।

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