तहलका टुडे टीम
लखनऊ।आज सुबह 3 बजे समाज का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए खो गया। प्रो. निशीथ राय – शिक्षक, कुलपति,अखबार के संस्थापक, मार्गदर्शक और सच्चे इंसान – अब हमारे बीच नहीं रहे।
उनके निधन से न सिर्फ़ एक परिवार, बल्कि पूरा समाज गहरे शोक में डूबा हुआ है। कैंसर जैसी निर्दयी बीमारी से जूझते हुए भी उन्होंने अंत तक हार नहीं मानी। चेहरे पर मुस्कान और दिल में जज़्बा लिए वे आख़िरी सांस तक योद्धा बने रहे।
🌟 संघर्ष और साहस की कहानी
ज़िंदगी से उन्हें बेहद प्यार था। अनुशासन, सादगी और सच्चाई उनके जीवन का आधार रहे। लेकिन जब तक कैंसर का पता चला, बीमारी काफी बढ़ चुकी थी।
फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी दो बड़ी ख्वाहिशें थीं— बेटे को आईएएस बनते देखना और उसकी शादी कराना। दोनों इच्छाएँ पूरी हुईं और इसी तसल्ली के साथ वे शांत हो गए।
📰 पत्रकारिता उनका धर्म था
डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट (डीएनए) अख़बार उनका पैशन था।
उन्होंने इस अख़बार को जिंदा रखने के लिए हर तरह की सरकारी प्रताड़ना और दबाव सहे। जब हालात कठिन हुए और कई लोग किनारा कर गए, तब भी उनका साहस अडिग रहा।
वे अक्सर कहते थे ,
पत्रकारिता उनके लिए नौकरी नहीं, बल्कि धर्म और कर्म था।
🧑🎓 शिक्षा का दीपक
लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर उन्होंने विद्यार्थियों की पीढ़ियाँ गढ़ीं। वे सिर्फ़ किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने का साहस और इंसानियत की सीख देते थे।
📖 भावनाओं का सैलाब
- एडवोकेट कमल कृष्ण राय – “निशीथ भाई का यूं चले जाना इलाहाबादियों के लिए वज्रपात है। उनका जीवन समाज और शिक्षा को समर्पित रहा।”
- प्रो. डॉ. अतुल मोहन सिंह – “यह समाचार पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए स्तब्ध करने वाला है। उनकी प्रेरणा हमारे लिए हमेशा मार्गदर्शन का स्रोत रहेगी।”
- दिव्येन्दु वत्स – “वे कहा करते थे – ‘हम बुरे तभी होते हैं जब किसी का भला करते हैं।’ उनकी यह सीख अब हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।”
- यशवंत सिंह (भड़ास4मीडिया) – “उनकी मुस्कान, उनका अपनापन, उनका संघर्षशील व्यक्तित्व – सब हमें हमेशा याद रहेगा। यह मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।”
🕯 अंतिम यात्रा और पंचतत्व में विलीन
उनके छोटे भाई उत्पल राय ने बताया –
“आज सुबह 3 बजे बड़े भाई डॉ. निशीथ राय का निधन हुआ। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए सरोजिनी नायडू मार्ग, लखनऊ स्थित आवास पर रखा गया। दोपहर बाद भैंसाकुंड बैकुंठ धाम ले जाकर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हजारों की भीड़ ‘अमर रहो’ के नारों के बीच उन्हें विदाई देने पहुंची। वे आज पंचतत्व में विलीन हो गए।”
✍️ व्यक्तिगत श्रद्धांजलि
सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
एडिटर – तहलका टुडे
प्रेसिडेंट – प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट
मेरे लिए निशीथ भाई सिर्फ़ एक वरिष्ठ पत्रकार या कुलपति नहीं थे, बल्कि बड़े भाई जैसे थे।
उनकी मोहब्बत जताने का अंदाज़ निराला था—कभी हिम्मत देकर, कभी राह दिखाकर, और हमेशा मुझे छोटे भाई की तरह मानकर।
वे तहलका टुडे की खबरों से हमेशा मुतास्सिर रहते थे। तारीफ़ करते, हिम्मत बढ़ाते और मेरी बेबाक रिपोर्टिंग पर विश्वास जताते। यही उनका दिया हुआ हौसला मेरी सबसे बड़ी दौलत है।
आज जब वे पंचतत्व में विलीन हो गए हैं, तो दिल बेहद भारी है।
लेकिन उनका अपनापन, उनकी सीख और उनका दिया हुआ आत्मविश्वास हमेशा मेरी राह को रोशन करता रहेगा।
🙏 निशीथ भाई! आप हमेशा दिलों में जिंदा रहेंगे। विनम्र श्रद्धांजलि