तहलका टुडे डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को निवेश का हब बनाने के सरकारी दावों के बीच Lulu Mall Lucknow पर Income Tax Department की सख्त कार्रवाई ने एक नई बहस छेड़ दी है। करीब 27 करोड़ रुपये की टैक्स चूक का हवाला देकर मॉल के बैंक खाते सीज कर दिए गए, जिससे न सिर्फ मॉल का कारोबार प्रभावित हुआ बल्कि प्रदेश की निवेश-छवि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकार एक ओर उत्तर प्रदेश को “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” का मॉडल राज्य बताने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर ऐसे हाई-प्रोफाइल निवेश पर अचानक कार्रवाई ने बाहर से आए निवेशकों में असमंजस और चिंता पैदा कर दी है।
कार्रवाई या संदेश?
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई 2025 के टैक्स निरीक्षण में कथित वित्तीय अनियमितताओं के बाद हुई। मॉल का मुख्य खाता Bank of Baroda में बताया जा रहा है, जिसे सीज करने से भुगतान-श्रृंखला ठप पड़ गई।
सवाल यह है कि—
- क्या यह तकनीकी/प्रक्रियात्मक चूक थी,
- या फिर तुरंत अकाउंट सीज करना ही एकमात्र विकल्प था?
निवेश जगत पूछ रहा है कि क्या नोटिस, समय-सीमा और वैकल्पिक समाधान दिए बिना की गई कार्रवाई विश्वास को ठेस नहीं पहुंचाती?
निवेशकों में संदेश क्या गया?
लुलु मॉल जैसे मेगा प्रोजेक्ट—जिस पर हजारों लोगों का रोज़गार, दर्जनों ब्रांड्स और सैकड़ों सप्लायर्स निर्भर हैं—पर अचानक कठोर कदम का संदेश दूर तक जाता है।
- क्या यूपी में बड़े निवेश असुरक्षित हैं?
- क्या किसी भी वक्त बैंक खाते सीज हो सकते हैं?
- क्या प्रशासनिक समन्वय की कमी निवेशकों को तड़पा रही है?
यही आशंका आज कॉर्पोरेट कॉरिडोर में चर्चा का विषय है।
यूपी की ‘आन–बान–शान’ पर सवाल
लुलु मॉल का उद्घाटन स्वयं Yogi Adityanath ने किया था। लगभग 22 लाख वर्ग फीट में फैला, करीब 2000 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लिए निवेश विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है।
ऐसे में टैक्स बकाया का मुद्दा सामने आना और सीधे खाते सीज होना—
- प्रशासनिक समन्वय पर प्रश्न
- निवेश नीति के क्रियान्वयन पर सवाल
- और प्रदेश की ब्रांड इमेज पर असर
इन तीनों को जन्म देता है।
विवादों की लंबी छाया
यह पहला मौका नहीं है जब लुलु मॉल विवादों में आया हो।
- 2022 में धार्मिक विवाद
- कर्मचारियों से जुड़े आपराधिक मामले
- फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई
अब टैक्स कार्रवाई ने आग में घी डालने का काम किया है। आलोचक कह रहे हैं कि हर बार यूपी का एक बड़ा निवेश प्रोजेक्ट ही क्यों निशाने पर?
संतुलन ज़रूरी है
विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स वसूली कानून के दायरे में ज़रूरी है, लेकिन तरीका भी उतना ही अहम है।
- सख्ती हो, पर संवाद के साथ
- कार्रवाई हो, पर निवेश माहौल को ध्यान में रखकर
- कानून चले, पर विश्वास न टूटे
27 करोड़ की चूक अगर है, तो उसकी जांच और वसूली होनी चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे कदम प्रदेश की निवेश छवि को कमजोर कर रहे हैं?
क्या बाहर से आए निवेशकों को यह संकेत दिया जा रहा है कि यूपी में पूंजी लगाना जोखिम भरा हो सकता है?
आज लुलु मॉल का मामला सिर्फ एक टैक्स कार्रवाई नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की निवेश नीति की अग्नि-परीक्षा बन चुका है।




