तहलका टुडे टीम/सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
नई दिल्ली।दुनिया के पहले और सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय इमाम ख़ुमैनी अवॉर्ड से सम्मानित होकर भारत लौटे आफ़ताब-ए-शरीयत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी से आज देश के रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर विशेष अतिथि के रूप में मुलाक़ात की। यह मुलाक़ात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें ईरान, पश्चिम एशिया और मौजूदा वैश्विक हालात पर गंभीर, स्पष्ट और उच्चस्तरीय संवाद हुआ।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय इमाम ख़ुमैनी अवॉर्ड मिलने पर हार्दिक मुबारकबाद दी और इसे केवल एक धर्मगुरु का सम्मान नहीं, बल्कि भारत की वैचारिक परंपरा, नैतिक नेतृत्व और वैश्विक विश्वसनीयता को मिला सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत की उस सभ्यतागत सोच की पुष्टि करते हैं, जो शांति, संतुलन और संवाद में विश्वास रखती है।
ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान पर खुलकर चर्चा
मुलाक़ात के दौरान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव और हालिया बयानों की पृष्ठभूमि में—जिनका संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से जोड़ा जा रहा है—ईरान के हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे संवेदनशील समय में कूटनीति, संयम और संवाद ही स्थायी शांति का रास्ता है।
“8 करोड़ की ईरानी आवाम फिदा और कुर्बान”
आफ़ताब-ए-शरीयत मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी ने रक्षा मंत्री को अवगत कराया कि ईरान की लगभग 8 करोड़ की आबादी अपने देश की संप्रभुता, सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए फिदा और कुर्बान रहने का जज़्बा रखती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान में दिखाई देने वाली कुछ सीमित अशांति या प्रदर्शनों के पीछे बाहरी साज़िश की भूमिका बताई जाती है, जिसे Mossad से जुड़े कुछ एजेंटों की खुराफ़ात के रूप में देखा जा रहा है, जबकि ईरानी समाज का विशाल बहुमत अपने देश और नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है।
भारत की शांति-प्रिय और संतुलित नीति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत की विदेश और रक्षा नीति शांति-प्रिय, संतुलित और संवाद-आधारित है। भारत मित्र देशों के साथ संबंधों को आपसी सम्मान, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के आधार पर आगे बढ़ाने में विश्वास रखता है और हर परिस्थिति में टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देता है।
इमाम ख़ुमैनी अवॉर्ड: भारत को मिला वैश्विक सम्मान
गौरतलब है कि हाल ही में ईरान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय समारोह में विश्व का पहला और सबसे बड़ा “इमाम ख़ुमैनी अवॉर्ड” प्रदान किया गया, जिसे ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने प्रदान किया। इस सम्मान को व्यापक रूप से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास और सम्मान की गवाही के रूप में देखा जा रहा है। इसी ऐतिहासिक सम्मान के साथ मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी भारत लौटे हैं।
भारत के 6 करोड़ से अधिक शिया मुसलमानों की प्रतिनिधि आवाज़
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों के अनुसार, इस मुलाक़ात की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भारत में 6 करोड़ से अधिक शिया आबादी मौजूद है, जो दुनिया की सबसे बड़ी शिया आबादियों में से एक मानी जाती है। मौलाना डॉ. कल्बे जवाद नक़वी को इस विशाल समुदाय की प्रमुख धार्मिक और नैतिक अथॉरिटी के रूप में देखा जाता है, जिनकी आवाज़ का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर है।
धर्म, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का संगम
दिल्ली में हुई यह हाई-लेवल मुलाक़ात इस बात का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है कि बदलते वैश्विक हालात में भारत संवाद, शांति और जिम्मेदार वैश्विक नेतृत्व के मार्ग पर मजबूती से खड़ा है। जानकारों के अनुसार, यह संवाद भारत–ईरान मैत्री को नई मज़बूती देने के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक स्थिरता के लिए भारत की भूमिका को भी रेखांकित करता है।
यह मुलाक़ात केवल एक सम्मान के बाद की औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि नई दिल्ली से दुनिया को दिया गया एक स्पष्ट संदेश है—कि भारत टकराव नहीं, संवाद चाहता है; और अस्थिरता नहीं, बल्कि शांति और संतुलन का पक्षधर है।




