Breaking News | Iran–US Tension 2026
तेहरान/वॉशिंगटन।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अमेरिका ईरान से डर गया है या किसी बड़े हमले की तैयारी में है? इस सवाल को और तेज़ कर दिया है उस आपात चेतावनी ने, जो 13 जनवरी 2026 को यू.एस. वर्चुअल एंबेसी (ईरान) की ओर से जारी की गई। इस चेतावनी में अमेरिका ने अपने नागरिकों को साफ़ शब्दों में ईरान छोड़ने को कहा है, जिससे अमेरिका के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है।
ईरान में हालात: प्रदर्शन, इंटरनेट बंदी, उड़ानें रद्द
अमेरिकी एडवाइजरी के मुताबिक, ईरान भर में विरोध-प्रदर्शन तेज़ हो रहे हैं, जिनके हिंसक होने की आशंका जताई गई है। सुरक्षा व्यवस्था सख़्त है, कई इलाक़ों में सड़कें बंद हैं, सार्वजनिक परिवहन प्रभावित है और मोबाइल व राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क पर पाबंदियाँ लागू हैं। हालात का असर विमानन पर भी पड़ा है—कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने ईरान से आने-जाने वाली उड़ानें सीमित या रद्द कर दी हैं, कुछ सेवाएँ 16 जनवरी तक निलंबित हैं।
अमेरिकी नागरिकों के लिए सख़्त फरमान
एडवाइजरी में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक:
- तुरंत ईरान छोड़ने की योजना बनाएं, और अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहें।
- यदि निकलना संभव न हो, तो सुरक्षित स्थानों पर रहें, भोजन-पानी-दवाइयों का भंडार रखें।
- प्रदर्शनों से दूरी बनाए रखें, स्थानीय मीडिया पर नज़र रखें और वैकल्पिक संचार साधन तैयार रखें।
- ज़रूरत पड़ने पर ज़मीन के रास्ते आर्मेनिया या तुर्किये जाने पर विचार करें।
दोहरी नागरिकता वालों के लिए बड़ा ख़तरा
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका–ईरान दोहरी नागरिकों को ईरानी पासपोर्ट पर ही बाहर निकलना होगा, क्योंकि ईरान दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता। अमेरिकी पहचान दिखाना पूछताछ, गिरफ्तारी या हिरासत का कारण बन सकता है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह ऐसे प्रस्थान की स्थिति में सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता।
अमेरिकी बेस और सेंटर्स में ज़्यादा दहशत क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह चेतावनी सिर्फ़ ईरान के भीतर की स्थिति नहीं, बल्कि अमेरिकी बेसों और कूटनीतिक सेंटर्स में बढ़ी आशंकाओं को भी दर्शाती है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जोखिम बढ़ सकता है—इसी वजह से वॉशिंगटन सतर्कता बढ़ा रहा है।
डर या रणनीति?
अयातुल्लाह सैयद अली खामनेई को लेकर आक्रामक बयान देने वाले Donald Trump के दौर की बयानबाज़ी के बाद यह घटनाक्रम कई सवाल खड़े करता है। क्या यह ईरान से डर का संकेत है, या फिर किसी आक्रामक रणनीति से पहले की सावधानी? ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के नेतृत्व में देश ने दबावों के बावजूद संतुलन बनाए रखा है—और यही कारण है कि आज आदेश वॉशिंगटन से जारी हो रहे हैं।
एक बात साफ़ है—मध्य-पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील हैं। अमेरिकी नागरिकों को निकालने की हड़बड़ी ने दुनिया का ध्यान खींचा है। अमेरिका डरा है या हमला करेगा—यह आने वाले दिनों में साफ़ होगा, लेकिन फिलहाल दहशत अमेरिकी बेसों और सेंटर्स में ज़्यादा दिखाई दे रही है।




