तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क
जब भी पश्चिमी मीडिया या कुछ ताक़तवर देश ईरान का नाम लेते हैं, तो उसके साथ “ख़तरा”, “आक्रामकता” और “युद्ध” जैसे शब्द जोड़ दिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ईरान ने वाक़ई कभी किसी देश पर पहले हमला किया है?
अगर हम भावनाओं नहीं, बल्कि इतिहास और तथ्यों के आईने में देखें, तो जवाब बिल्कुल साफ़ है — नहीं।
इतिहास की अदालत में ईरान
आधुनिक इतिहास, विशेषकर 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का दौर उठाकर देख लीजिए।
ईरान पर:
- आर्थिक प्रतिबंध लगे
- वैज्ञानिकों की हत्याएँ हुईं
- सैन्य जनरलों को शहीद किया गया
- परमाणु ठिकानों पर साइबर हमले हुए
- खुलेआम युद्ध की धमकियाँ दी गईं
लेकिन इसके बावजूद ईरान ने कभी किसी मुल्क पर पहला सैन्य हमला नहीं किया।
ईरान–इराक युद्ध: सच्चाई जो अक्सर छुपाई जाती है
1980 में सद्दाम हुसैन ने पश्चिमी ताक़तों के समर्थन से ईरान पर हमला किया।
आठ साल तक चला यह युद्ध:
- लाखों ईरानियों की शहादत का कारण बना
- शहरों पर मिसाइलें गिरीं
- केमिकल हथियारों का इस्तेमाल हुआ
इसके बावजूद ईरान ने:
- युद्ध को दूसरे देशों तक नहीं फैलाया
- किसी निर्दोष देश पर हमला नहीं किया
- केवल अपनी ज़मीन और संप्रभुता की रक्षा की
यह युद्ध इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि ईरान आक्रामक नहीं, बल्कि सब्र और आत्मरक्षा की मिसाल है।
सीरिया, इराक और क्षेत्रीय भूमिका
अक्सर आरोप लगाया जाता है कि ईरान दूसरे देशों में दख़ल देता है।
सच्चाई यह है कि:
- इराक और सीरिया की सरकारों के आमंत्रण पर ईरान ने सहयोग किया
- दाइश (ISIS) जैसे आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ मोर्चा संभाला
- मज़हबी स्थलों और आम नागरिकों की रक्षा की
यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आक्रमण नहीं, बल्कि वैध सहयोग की श्रेणी में आता है।
“पहला वार नहीं, लेकिन जवाब ज़रूर”
ईरान की सैन्य नीति एक वाक्य में समझी जा सकती है:
हम युद्ध शुरू नहीं करते, लेकिन अगर हम पर हमला हुआ तो जवाब इतिहास लिखेगा।
जनरल क़ासिम सुलेमानी की शहादत के बाद:
- ईरान ने सीधे अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया
- लेकिन वह भी पहले किए गए हमले के जवाब में, न कि पहल के तौर पर
तुलना ज़रूरी है
अगर दुनिया की बड़ी ताक़तों को देखें:
- अमेरिका: इराक, अफ़ग़ानिस्तान, वियतनाम, लीबिया
- इज़राइल: फ़िलिस्तीन, लेबनान, ग़ाज़ा
- ब्रिटेन, फ्रांस: उपनिवेशों का इतिहास
तो सवाल उठता है —
क्या असली आक्रामक ईरान है या वे जो उसे बदनाम करते हैं?
किसको डर लगता है
ईरान को इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि:
- वह झुकता नहीं
- वह अपनी शर्तों पर जीता है
- वह मज़लूमों की आवाज़ बनता है
- और वह साम्राज्यवादी ताक़तों के सामने घुटने नहीं टेकता
इतिहास गवाह है — ईरान ने कभी पहले हमला नहीं किया,
लेकिन जब-जब ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़ा हुआ, दुनिया ने उसे “ख़तरा” कह दिया।
यह सवाल नहीं कि ईरान युद्ध क्यों नहीं करता,
सवाल यह है कि युद्ध करने वाले जालिम ईरान से डरते क्यों हैं।




