UNO में भारत का बग़ावती ‘NO’ ,ईरान के साथ खड़ा हिंदुस्तान, जालिम अमेरिका-इज़राइल बेनकाब “यह सिर्फ एक वोट नहीं था, यह पश्चिमी दबावों के खिलाफ भारत का ऐलान था।”

India sent a powerful global message by voting NO at the United Nations, rejecting selective human rights politics and external pressure. The move reflects India’s independent diplomacy and commitment to sovereign equality. At the UN, India once again stood tall as a confident and principled global power.

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तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क 

जब UNO में गूंजा भारत का आत्मसम्मान

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 39वें विशेष सत्र में भारत ने जो किया, उसने पूरी वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया।
ईरान के खिलाफ लाए गए पश्चिमी देशों के निंदा प्रस्ताव पर भारत ने ‘NO’ वोट देकर साफ कर दिया कि नया भारत अब दबाव में फैसले नहीं करता।

यह वही प्रस्ताव था जिसे अमेरिका और इज़राइल समर्थित यूरोपीय गुट ईरान को घेरने के लिए लाया था — और यही वह क्षण था जब भारत ने पूरी दुनिया के सामने खड़े होकर कहा:

“मानवाधिकारों की आड़ में राजनीति नहीं चलेगी।”

🌍 दुनिया दो खेमों में, भारत हक़ के साथ

UNO की वोटिंग स्क्रीन पर जब नतीजे आए, तो साफ दिखा —
दुनिया दो हिस्सों में बंट चुकी है।

  • एक तरफ अमेरिका-यूरोप-इज़राइल लॉबी,
  • दूसरी तरफ भारत, चीन, इंडोनेशिया जैसे एशियाई देश

यह एक दुर्लभ ऐतिहासिक क्षण था जब भारत, चीन और पाकिस्तान — तीनों ने ईरान के पक्ष में एक ही सुर में वोट किया।

👉 यह वोट सिर्फ ईरान के समर्थन का नहीं,
👉 यह वोट पश्चिमी दोहरे मापदंडों के खिलाफ विद्रोह था।

☠️ गाज़ा पर चुप, ईरान पर शोर — यही है पश्चिम का मानवाधिकार मॉडल

जो देश:

  • गाज़ा में मासूम बच्चों की लाशों पर खामोश हैं
  • फिलिस्तीन पर इज़राइल की बमबारी को जायज़ ठहराते हैं
  • यमन, इराक और सीरिया को तबाह कर चुके हैं

👉 वही आज ईरान को मानवाधिकारों का सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं।

Tahalka Today सवाल पूछता है:
क्या मानवाधिकार सिर्फ उन देशों पर लागू होते हैं, जो पश्चिम की लाइन पर नहीं चलते?

🇮🇳 भारत का बदला हुआ चेहरा, बदली हुई विदेश नीति

अब तक भारत ऐसे प्रस्तावों पर अक्सर Abstain रहता था,
लेकिन इस बार भारत ने सीधा ‘NO’ कहकर दुनिया को चौंका दिया।

इसके मायने साफ हैं:

  • भारत अब पश्चिम का जूनियर पार्टनर नहीं
  • भारत ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनकर उभरा है
  • भारत संप्रभुता और सम्मान के साथ खड़ा है

ईरान के साथ भारत के रिश्ते:

  • ऐतिहासिक
  • रणनीतिक
  • और एशिया की स्थिरता के लिए अनिवार्य

चाबहार पोर्ट से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक — भारत जानता है कि ईरान को कमजोर करना पूरे क्षेत्र को अस्थिर करना है।

🔥 नैतिक जीत किसकी?

भले ही प्रस्ताव संख्याबल से पास हो गया,
लेकिन भारत, चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों का विरोध
इस प्रस्ताव को नैतिक रूप से खोखला कर देता है।

👉 UNO में कल एक बात तय हो गई:
सच पश्चिम के साथ नहीं, भारत के साथ खड़ा था।

🧭 TAHALKA TODAY VERDICT

“भारत न बिकता है, न झुकता है।
और जब बात इंसाफ़ की हो —
तो भारत सबसे आगे खड़ा होता है।”

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