तहलका टुडे डेस्क
लखनऊ, 6 फ़रवरी।पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित जामा मस्जिद ख़दीजातुल कुबरा मस्जिद में जुमे की नमाज़ के दौरान हुए भीषण आत्मघाती आतंकी हमले ने पूरी दुनिया के ज़मीर को झकझोर कर रख दिया है। इस दिल दहला देने वाले हमले में 50 से ज़्यादा नमाज़ियों की मौत हो गई, जबकि 175 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत नाज़ुक बनी हुई है।
इस जघन्य आतंकी वारदात की भारत की सुप्रीम रिलीजियस अथॉरिटी और आफ़ताबे शरीयत मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे न सिर्फ़ आतंकवाद, बल्कि मानवता और इस्लाम दोनों पर हमला क़रार दिया है।
मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने कहा कि पाकिस्तान में शिया समुदाय के ख़िलाफ़ टारगेट किलिंग और धार्मिक स्थलों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन न तो पाकिस्तानी सरकार इस पर गंभीर है और न ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कोई प्रभावी क़दम उठा रही हैं। उन्होंने इस हमले को पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की घोर नाकामी बताया।
मजलिसे उलमा-ए-हिंद के सभी सदस्यों ने एक स्वर में इस आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में हमेशा नाकाम रहा है। उलमा ने आरोप लगाया कि ऐसे आत्मघाती हमले पाकिस्तानी सेना की सरपरस्ती में आंतरिक स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का नतीजा हैं।
मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने दो टूक शब्दों में कहा कि मस्जिदों में धमाके करने वाले हरगिज़ मुसलमान नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवाद को योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे यह साफ़ होता है कि वहां की सरकार आतंकियों के ख़िलाफ़ गंभीर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है।
उन्होंने आगे कहा कि केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि आज किसी भी मुस्लिम देश में शिया समुदाय सुरक्षित नहीं है। तकफ़ीरी विचारधारा ने शियों के कत्लेआम को जायज़ ठहराने का काम किया है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में शिया समुदाय की टारगेट किलिंग हो रही है। मौलाना ने अफ़सोस जताया कि मुस्लिम उलमा ने कभी संगठित रूप से तकफ़ीरी गिरोहों और उनकी विचारधारा की खुलकर निंदा नहीं की, जिसका ख़ामियाज़ा आज पूरी मानवता भुगत रही है।
मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने यह भी कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के कुछ मुस्लिम उलमा और मुफ़्ती भी इस गंभीर मानवाधिकार मुद्दे पर ख़ामोशी इख़्तियार किए हुए हैं, जिससे यह आशंका गहराती है कि वे कहीं न कहीं तकफ़ीरी समूहों और उनकी सोच को अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहे हैं।
उन्होंने इस आत्मघाती हमले में शहीद हुए सभी मोमिनों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र और सभी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि पाकिस्तान में शिया समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तत्काल और ठोस क़दम उठाए जाएं।
मजलिसे उलमा-ए-हिंद के सदस्यों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक व्यक्त किया और आतंकवाद के ख़िलाफ़ सख़्त अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की।





