नई दिल्ली / तेहरान | तहलका टुडे टीम
ईरान की इस्लामी क्रांति की विजय की 47वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूदी पेज़ेशकियान और ईरान की जनता को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ प्रेषित कीं। प्रधानमंत्री ने यह शुभकामनाएँ न केवल अपनी ओर से बल्कि भारत की जनता की ओर से भी भेजीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंध किसी तात्कालिक कूटनीति का परिणाम नहीं हैं, बल्कि वे दोनों देशों के बीच मौजूद गहरी सभ्यतागत, ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि दोनों देशों के संबंध सदियों पुराने हैं और समय के साथ इन रिश्तों ने और अधिक मजबूती हासिल की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ईरान के बीच साझा इतिहास, साहित्य, संस्कृति और विचारधारा ने दोनों देशों को एक-दूसरे के और निकट लाने का कार्य किया है।
जन–जन के रिश्ते भारत–ईरान संबंधों की असली ताकत
भारत और ईरान के बीच मज़बूत पीपुल-टू-पीपुल कनेक्शन को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:
“हमारी जनता के बीच एक सुदृढ़ और मजबूत संबंध है, और मुझे पूरा विश्वास है कि भारत और ईरान के बीच यह स्थायी बंधन आने वाले वर्षों में और अधिक सशक्त होगा।”
प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच सहयोग भविष्य में व्यापार, संस्कृति, शिक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और अधिक गहराई प्राप्त करेगा।
रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ते भारत–ईरान संबंध
राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत और ईरान दोनों ही एशिया में स्थिरता, शांति और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह संदेश भारत की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें वह अपने पारंपरिक मित्र देशों के साथ संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाना चाहता है।





