नजफ़ अशरफ़ / लखनऊ | विशेष रिपोर्ट
दुनिया के सबसे बड़े शिया मरजा-ए-तक़लीद और प्रतिष्ठित धार्मिक नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी सिस्तानी(दाम ज़िल्लहु) ने ईरान पर जारी सैन्य हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
नजफ़ अशरफ़ से जारी एक अहम बयान में उन्होंने इन हमलों की सख़्त शब्दों में निंदा करते हुए तत्काल जंगबंदी की अपील की है।
मरजा-ए-आला ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से ईरान की धरती पर जारी सैन्य कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की जान जा चुकी है। इन शहीदों में अपने देश की रक्षा करने वाले सैनिक मासूम बच्चे और निर्दोष नागरिक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों में न केवल लोगों की जान गई है बल्कि सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
पूरे क्षेत्र में बढ़ सकता है युद्ध
आयतुल्लाह सिस्तानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के कारण संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ रहा है और यह दूसरे देशों तक फैल सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हालात इस क्षेत्र में लंबे समय से देखने को नहीं मिले थे और यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
अपने बयान में उन्होंने साफ कहा कि किसी भी देश पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को नजरअंदाज कर एकतरफा युद्ध थोपना अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाएगा लंबे समय तक अशांति पैदा करेगा और पूरी दुनिया के लिए गंभीर संकट बन सकता है।

दुनिया के इंसाफ़ पसंद लोगों से अपील
मरजइयत-ए-आलिया ने दुनिया के मुसलमानों और न्यायप्रिय लोगों से अपील की कि वे इस अन्यायपूर्ण युद्ध की निंदा करें और ईरान की जनता के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करें। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खास तौर पर इस्लामी देशों से अपील की कि वे तुरंत कदम उठाकर इस युद्ध को रोकने की कोशिश करें। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु मुद्दे का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
यह बयान 14 रमज़ान 1447 हिजरी (4 मार्च 2026) को नजफ़ अशरफ़ से जारी किया गया।





