तहलका टुडे टीम/सदाचारी लाला उमेश चंद्र श्रीवास्तव
लखनऊ/बाराबंकी। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा जारी एक आदेश इन दिनों वक्फ हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि बोर्ड के निर्वाचित चेयरमैन अली जैदी की भूमिका को दरकिनार कर कुछ विशेष व्यक्तियों के प्रभाव में निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी बीच बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) जीशान रिजवी द्वारा जारी एक पत्र ने नई बहस छेड़ दी है।
प्राप्त पत्र के अनुसार, पत्र संख्या 706 दिनांक 29 मई 2026 के माध्यम से बाराबंकी निवासी जुल्फिकार हैदर को संबोधित करते हुए बताया गया है कि **मुजाहिद हुसैन नकवी, रसूलपुर बाराबंकी ** द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि वक्फ कर्बला बडेल, बाराबंकी से संबंधित वाद संख्या 848/2006, श्रीमती खालिदा रसूल बनाम कर्बला स्थित मोहल्ला दयानंद नगर में अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), बाराबंकी द्वारा 30 अप्रैल 2026 को आदेश पारित किया गया है। उक्त आदेश के विरुद्ध अपील दाखिल करने तथा उसकी पैरवी करने के लिए मुजाहिद हुसैन नकवी द्वारा जुल्फिकार हैदर को अधिकृत किए जाने की जानकारी बोर्ड को दी गई।
सीईओ जीशान रिजवी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि चूंकि संबंधित वक्फ में मुतवल्ली अथवा प्रबंध समिति की नियुक्ति का मामला अभी लंबित है, इसलिए अंतिम निर्णय होने तक वाद संख्या 848/2006 में सक्षम न्यायालय के समक्ष अपील दाखिल करने, पैरवी करने तथा आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए जुल्फिकार हैदर को अधिकृत किया जाता है।
आदेश पर उठ रहे सवाल
वक्फ मामलों पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि यह आदेश कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है
जब वक्फ में तौलियत और प्रबंधन का मामला लंबित 25 फरवरी 2025 से है तो किसी व्यक्ति को मुकदमे की पैरवी के लिए अधिकृत करने का आधार क्या है?
क्या इस प्रकार की अनुमति वक्फ एक्ट के तहत बोर्ड के चेयरमैन अथवा बोर्ड बैठक की स्वीकृति से दी गई?
पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी के खास रहे मुजाहिद हुसैन नकवी की सिफारिश पर कार्रवाई क्यों की गई?
क्यों नहीं पूर्व कमेटी के कार्यकाल घोटालों और विपक्षी से मिली भगत कर मुकदमा हारने की समीक्षा की गई ,बल्कि इस पर आगे की अदालत को मोहर लगाने के लिए छोड़ दिया गया।
क्या संबंधित वक्फ के अन्य पक्षकारों और दावेदारों को भी सुना गया?
इन सवालों के कारण यह पत्र सोशल मीडिया और वक्फ हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विरोधियों का आरोप
बोर्ड के आलोचकों का आरोप है कि वर्तमान में कई मामलों में निर्णय बोर्ड की सामूहिक प्रक्रिया के बजाय कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की सिफारिशों खासकर पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी के भ्रष्ट साथियों के निर्देश पर लिए जा रहे हैं। विरोधी पक्ष यह भी दावा कर रहा है कि इस आदेश से ऐसा संदेश जा रहा है मानो बोर्ड का प्रशासनिक ढांचा निर्वाचित नेतृत्व की अपेक्षा कुछ विशेष लोगों के प्रभाव में काम कर रहा हो।
बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं
खबर लिखे जाने तक उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से इस आदेश को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया था। हालांकि, बोर्ड के रिकॉर्ड में यह आदेश सीईओ स्तर से जारी प्रशासनिक आदेश के रूप में दर्ज बताया जा रहा है।
वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, मुकदमों की पैरवी और प्रबंधन संबंधी विवादों के बीच यह आदेश अब बाराबंकी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के वक्फ हलकों में चर्चा और बहस का विषय बन गया है।
आपको ये भी बता दे कि पूर्व में सीईओ जीशान रिजवी जो ग्राम विकास विभाग के पीसीएस एलाइड श्रेणी के अफसर है , डेप्युटेशन पर सीईओ यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड अपनी ख़्वाहिश से बने हुए है,
2016 में एक बरेली के प्रकरण में 1 लाख रूपये रिश्वत के एफिडेविट की शिकायत पर चलता कर दिए गए थे,
बाद में 2024 में फिर आ गए ,उसके बाद से कई पत्र और आदेश ऐसे जारी कर रहे है जो चर्चा का विषय बना हुआ है,उनके द्वारा दो दो मुकदमे में चार्ज शीटेड सेवा निवृत प्रशासनिक अधिकरी हसन रज़ा का एक वर्ष कार्यकाल विस्तार बोर्ड में पास कराए बिना ,शासनादेश के खिलाफ जाकर बगैर मुख्यमंत्री ,कैबिनेट मंत्री और शासन से संस्तुति कराए बगैर बढ़ा दिया गया।
और कई पत्रावलियों और शिकायतों को दबाया गया हुआ है ,इसके अलावा आगरा,मेरठ,बरेली के कई विवादित आदेश जन चर्चा का विषय बने है




