तेहरान/क़ुम/मशहद | विशेष रिपोर्ट/सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
ईरान एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ लंबे समय तक याद रखेंगी। इस्लामी गणराज्य ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई की अंतिम विदाई का विस्तृत कार्यक्रम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया गया है। 4 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक तेहरान, क़ुम और मशहद में आयोजित होने वाले ये समारोह केवल एक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम नहीं, बल्कि करोड़ों ईरानियों और दुनिया भर के उनके अनुयायियों के लिए भावनाओं, श्रद्धा और इतिहास का संगम होंगे।
करीब चार दशकों तक ईरान की राजनीतिक, धार्मिक और रणनीतिक दिशा तय करने वाले आयतुल्लाह ख़ामेनेई का व्यक्तित्व केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा। पश्चिम एशिया की राजनीति, इस्लामी जगत की वैचारिक बहसों और वैश्विक कूटनीति पर उनकी गहरी छाप रही। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का वातावरण है और लाखों लोग अपने रहबर को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं।
4 और 5 जुलाई: तेहरान में अंतिम दीदार
कार्यक्रम का पहला चरण राजधानी तेहरान में होगा। आयतुल्लाह ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर आम नागरिकों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले लाखों श्रद्धालु अपने रहबर को आख़िरी सलाम पेश करेंगे।
तेहरान की सड़कों पर विशाल जनसमूह के उमड़ने की संभावना को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सरकारी संस्थानों, धार्मिक संगठनों, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
6 जुलाई: ऐतिहासिक जनाज़ा जुलूस
तेहरान में विशाल जनाज़ा जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें ईरान के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, उलेमा, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और आम नागरिक शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक शोक जुलूसों में से एक होगा।
7 जुलाई: क़ुम में धार्मिक श्रद्धांजलि
इसके बाद पवित्र धार्मिक नगर क़ुम में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। हौज़ा-ए-इल्मिया के वरिष्ठ उलेमा, मराजे-ए-किराम और दुनिया के विभिन्न देशों से आए धार्मिक प्रतिनिधि इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
धार्मिक दृष्टि से यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है, क्योंकि क़ुम शिया इस्लामी शिक्षा और शोध का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
9 जुलाई: मशहद में सुपुर्द-ए-ख़ाक
अंतिम चरण में 9 जुलाई को पवित्र शहर मशहद में इमाम रज़ा (अ.) के रौज़े के निकट तदफ़ीन की रस्म अदा की जाएगी। लाखों ज़ायरीन की मौजूदगी में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। ईरानी प्रशासन ने इस अवसर पर विशेष सुरक्षा और व्यवस्थाओं की घोषणा की है।
दुनिया भर से आएंगे प्रतिनिधिमंडल
ईरानी अधिकारियों के अनुसार अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, राजनयिकों और धार्मिक नेताओं को आमंत्रित किया गया है। भारत की ओर से भी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल
ईरानी सूत्रों के अनुसार भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन तथा विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था।
एक युग का समापन
आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई ने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में ईरान ने क्षेत्रीय राजनीति, परमाणु कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अनेक भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया। समर्थकों की नज़र में वे प्रतिरोध, आत्मनिर्भरता और इस्लामी गणराज्य की वैचारिक निरंतरता के प्रतीक रहे।
उनकी अंतिम विदाई केवल एक नेता की तदफ़ीन नहीं, बल्कि आधुनिक ईरान के कुव्वत ताकत के एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जा रही है। 4 से 9 जुलाई तक होने वाले ये समारोह इतिहास के पन्नों में एक ऐसे दौर के अंत के रूप में दर्ज होंगे, जिसने दशकों तक ईरान की दिशा और वैश्विक राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।




