तहलका टुडे टीम
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) से जुड़े एक पुराने अवमानना (Contempt) मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को दोबारा व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर मामले में आरोप (Framing of Charges) तय करने की कार्यवाही भी की जाएगी।
माननीय न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने Contempt Application (Civil) No. 698 of 2017 राजीव मेहरा एवं अन्य बनाम श्री सत्येन्द्र सिंह, उपाध्यक्ष, एलडीए एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए वादी की एडवोकेट श्रेया प्रकाश की बहस के बाद यह आदेश पारित किया।
अदालत के समक्ष एलडीए के उपाध्यक्ष श्री प्रथमेश कुमार तथा सचिव श्री विवेक श्रीवास्तव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उपाध्यक्ष द्वारा दायर अनुपालन शपथपत्र (Compliance Affidavit) को न्यायालय ने रिकॉर्ड पर लिया।
हालांकि, न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि दायर शपथपत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिन क्षेत्रों में याचिकाकर्ताओं को भूखंड आवंटित किए गए थे, वहां वैकल्पिक प्लॉट अथवा फ्लैट उपलब्ध क्यों नहीं हैं। अदालत ने इस पहलू को महत्वपूर्ण मानते हुए संबंधित अधिकारी को दो सप्ताह के भीतर अधिक विस्तृत एवं स्पष्ट शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले को 28 जुलाई 2026 को टॉप-30 मामलों में सूचीबद्ध किया जाए। उस दिन वर्तमान में उपस्थित दोनों अधिकारियों को पुनः व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा तथा मामले में आगे की कार्यवाही, जिसमें आरोप तय करने की प्रक्रिया भी शामिल है, की जाएगी।
यह आदेश संकेत देता है कि न्यायालय अपने पूर्व आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर है और यदि संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है।
— रिपोर्ट
सैयद रिज़वान मुस्तफ़ा
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